मदर डे 2022:कन्नौज में एक मां के प्यार को तरस रही किशोरी को चाचा-चाची ने बेसहारा छोड़ा, पत्रकार ने दिया सहारा

कन्नौज8 दिन पहले

आज भले ही हमारे देश की बेटियां हर क्षेत्र में पुरुषों से किसी मायने में कम नहीं है। इसके बावजूद पुरुष प्रधान समाज में अभी भी बेटियों को वह समझने वाले लोगों की कमी नहीं है। जहां आज पूरा देश मदर्स डे के मौके पर अपनी मां को याद कर रहा तो वहीं एक किशोरी अपने मां के जैसा प्यार पाने के लिए मोहताज है, लेकिन समाज उसकी मदद करने को भी तैयार नहीं। ऐसा ही एक मामला उस समय सामने आया। जब सगे चाचा-चाची ने मानवीय संवेदनाओं को तार-तार करते हुए नाबालिग किशोरी को बीच बाजार में अकेला छोड़ दिया और खुद लापता हो गए। हर ओर से हताश हो गई किशोरी ने धर्मगुरु महिला हेल्पलाइन समेत कोतवाली पुलिस से मदद की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने भी उसके सर पर हमदर्दी का हाथ नहीं फेरा। तभी एक निजी चैनल के पत्रकार मोबिन मंसूरी ने उसे अपनी बेटी बनाकर पालने का जिम्मा लिया और उसे अपने घर ले गए।

इसी बीच मामला मीडिया के संज्ञान में आ गया और मामले में तूल पकड़ लिया। शहर में हर ओर किशोरी की चर्चा होने लगी। पुलिस अधिकारियों ने भी मामले का संज्ञान लिया और चाइल्ड हेल्पलाइन को भी सूचना हो गई, जिसके बाद किशोरी को चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया गया। किशोरी के मुताबिक उसका नाम साबिया बानों है। उसके पिता का नाम सफीक है। वह तिर्वा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम बेला मऊ सरैया निवासी है। कई सालों पहले उसके माता पिता की मौत हो गई थी। जिसके बाद उसके चाचा हबीब एवं चाची शबाना उसे अपने साथ दिल्ली ले गए और वहीं रखने लगे चाचा की भी चार बेटियां हैं। पांचवी साबिया बानो भी उन्हीं के साथ रहने लगी लेकिन चाची साबिया के साथ अच्छा बर्ताव नहीं करती थी।

चाचा-चाची ने छोड़ा बेसहारा

बीते मंगलवार को चाची उसे बहला-फुसलाकर दिल्ली से अपने पैतृक गांव बेला मऊ सरैया कन्नौज में लेकर आई। जहां रात को पड़ोसियों के यहां साबिया बानो और उसकी चाची रुकी थी। अगले दिन बुधवार को चाची उसे लेकर तेलवा बाजार आई। जहां ठठिया रोड पर साबियाबानो को बैठा दिया और खुद लापता हो गई काफी देर तक जब चाची नहीं आई तब साबिया रोने लगी। किशोरी को रोता भी लगता देख आसपास के लोग जमा हो गए। समाज के लोगों ने उसकी दास्तां सुनी और भावुक हो गए तभी मुस्लिम समुदाय के दो लोगों ने साबिया को कन्नौज हम मालीपुरा स्थित मदरसे में पहुंचा दिया।

मौलवी ने साबिया से उसका आधार कार्ड मांगा लेकिन आधार कार्ड ना होने की वजह से मदरसे में भी उसे रहने की जगह नहीं मिली एक बार फिर बेघर हुई साबिया ने सदर कोतवाली का रुख किया और वह कोतवाली पुलिस से मदद मांगने पहुंच गई पुलिस ने भी उसे भगा दिया। जिसके बाद साबिया रोती बिलखती आईडीबीआई बैंक के बाहर खड़ी थी तभी सहायता समूह की महिलाओं ने महिला थाने पहुंचाया वहां भी ना उम्मीद ही हाथ लगी जिसके बाद उक्त महिलाएं उसे कोतवाली लेकर गई और किशोरी की मदद करने की सिफारिश की इसके बावजूद पुलिस ने कोई मदद नहीं की।तभी वहां मौजूद निजी चैनल के पत्रकार मोबिन मंसूरी ने साबिया को बेटी बनाकर रखने का आश्वासन दिया और उसे अपने घर ले गए मामला मीडिया में आने के बाद पुलिस हरकत में आ गई और बच्ची को चाइल्ड हेल्पलाइन के हवाले कर दिया गया।

हालांकि किशोरी पत्रकार मोबिन मंसूरी के साथ ही रहना चाहती है अब देखना यह है कि प्रशासन दोषी चाचा चाची को कानूनी शिकंजे में कस कर साबिया को न्याय दिलाने का काम कर पाता है या नहीं।

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