कानपुर देहात में बाढ़ का कहर:5 मीटर ऊपर बह रही यमुना, गांव से निकलकर सड़क किनारे लोगों ने बनाया आशियाना, तंबू लगाकर रह रहे

कानपुर देहात4 महीने पहले
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ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बाढ़ का पानी गांव से निकल नहीं जाता है तब तक वह अपना जीवन सड़क किनारे व सुरक्षित स्थान पर लगे तंबू में रहकर ही बिताएंगे। - Dainik Bhaskar
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बाढ़ का पानी गांव से निकल नहीं जाता है तब तक वह अपना जीवन सड़क किनारे व सुरक्षित स्थान पर लगे तंबू में रहकर ही बिताएंगे।

कानपुर देहात में बारिश के बाद यमुना व सेंगुर नदी अपना कहर बरपा रही है। यमुना नदी खतरे के निशान से 5 मीटर ऊपर से बह रही है जिसके चलते जहां आम जनमानस का जीवन प्रभावित हुआ है।

कानपुर देहात में यमुना व सेंगुर नदी का जलस्तर बढ़ने से आढ़न, पथार, पड़ाव, चपरघटा, चतुरीपुरवा, रसूलपुर, भुंडा, भरतौली, कुम्हापुर, मुसरिया, नगीना बांगर, नयापुरवा, कट्टापुरवा, बम्हरौली घाट, अहरौली घाट, सिमरिया, हंसपुर, मौदन, जगदीशपुर का उमरिया, क्योटरा बांगर, ट्योगा, क्योटरा, दौलतपुर, डिलौलिया बांगर, दिवैर की मड़ैया, हलिया, चपरेहटा गांव में बाढ़ का पानी भर गया है। वहीं, आढ़न पथार, मुसरिया, नगीना बांगर, नयापुरवा, क्योटरा बांगर, चपरघटा में बना मुगल कालीन पुराना पुल, दिवैर की मड़ैया, मनकी घाट की पुलिया भी पानी में डूब गई है।

पलायन को मजबूर
बाढ़ की वजह से लोग पलायन करने को मजबूर हैं। गांव में हर तरफ पानी ही पानी भर गया है। उससे बचने के लिए लोगों ने अपने मकानों को छोड़कर सड़क किनारे व सुरक्षित स्थान पर तंबू लगाकर नया आशियाना खड़ा कर लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बाढ़ का पानी गांव से निकल नहीं जाता है तब तक वह अपना जीवन सड़क किनारे व सुरक्षित स्थान पर लगे तंबू में रहकर ही बिताएंगे।

व्यवस्था के नाम पर खानापूर्ति
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिला प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं की गई हैं। लेकिन सिर्फ खानापूर्ति है। हालात इस कदर है कि जो नाव लगाई गई हैं, वह इतनी कम हैं कि गांव से बाहर निकलना उन गांव के सहारे आसान नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि अभी बहुत से ऐसे लोग हैं जो गांव के अंदर ही फंसे हुए हैं।

बाढ़ में बह गए बेजुबान
यमुना नदी में छप्पर के सहारे कुछ बकरियां बहती हुई नजर आईं। तहसील भोगनीपुर के अंतर्गत पड़ने वाले गांव डिलौलिया बांगर में बेजुबान पानी में बह गए। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने गांव छोड़ कर सुरक्षित स्थान पर आशियाना बसा लिया है। ज्यादातर ग्रामीण अपने जानवरों को गांव में ही छोड़ आए हैं।

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