सती के श्राप से पूरा गांव हो गया था वीरान:नरवल के नजफगढ़ घाट पर स्थापित है मंदिर, नहीं है कोई मूर्ति

नरवल3 महीने पहले
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कानपुर शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर गंगा नदी के किनारे नजफगढ गांव स्थित है। जहां पर माता सती का एक मंदिर भी स्थापित है। मान्यता है कि मां के श्राप के कारण एक बार पूरा गांव वीरान पड़ गया था और कोई उनकी सुध लेने वाला भी नहीं था।

ब्रिटिश इतिहास

कानपुर जिले का नजफगढ गांव मैनचेस्टर था। गांव के बुजुर्ग बताते है कि ब्रिटिश हुकूमत में नजफगढ़ गांव व्यापार का एक हब था। यहां नावों के द्वारा व्यापार होता था। क्षेत्र में नील और कपास का बहुत बड़ा कारोबार था। लोग खेतों में कपास की खेती किया करते थे।

जिसके कुछ अवशेष आज भी गांव में मिल जाते है। नील बनाने के हौज आज भी बने हुए है। अंग्रेजों के शासन काल में नजफगढ़ गांव में 12 बड़े फाटक लगे थे और गांव के चारो ओर बाउंड्री थी। रात के समय बिना अंग्रेजी सैनिकों के आदेश के कोई भी गांव के अंदर नही प्रवेश कर सकता था।

इतिहास बताने वाले आर.एस. तिवारी
इतिहास बताने वाले आर.एस. तिवारी

मंदिर का इतिहास

आर.एस. तिवारी बताते हैं कि प्राचीन काल में जब सती प्रथा का प्रचलन था और पति के मृत्यु के उपरांत महिलाएं अपने पति के साथ सती हो जाती थी। तब नजफगढ़ गांव में एक महिला अपने पति के साथ सती हो रही थी तो उसे अंग्रेजों ने रोका तो सती ने श्राप दे दिया की ये पूरा गांव वीरान हो जाएगा।

इस गांव में जो भी रहेगा कोई जीवित नहीं बचेगा। उसी के कुछ दिनों बाद प्लेग नाम की एक भयानक बीमारी आ गई। जिससे प्रभावित होकर कई लोगों की मौत हो गई और बहुत से लोग गांव छोड़कर चले गए। कई वर्षों के बाद दोबारा फिर कुछ लोगों के द्वारा इस गांव को बसाया गया।

गंगा तट के किनारे स्थापित सती माता का मंदिर

माता सती का मंदिर नजफगढ़ गंगा घाट के तट पर बना हुआ है। कई वर्षों तक मन्दिरों की स्थित बहुत ही दयनीय हो गई। सरकार सरकार के द्वारा कोई भी मरम्मत का कार्य नही कराया गया। फिर एक परमहंस महात्मा ने एक मंदिर और घाट का जीर्णोद्धार कराया। इसके बाद गांव व आसपास के क्षेत्रीय समाजसेवियों द्वारा मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया गया। जिससे मंदिर खूबसूरत दिखने लगे।

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