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कानपुर मेट्रो ट्रायल को लेकर काम और तेज:अप और डाउन लाइन मिलाकर 18 किमी. में से 3.5 किमी. तक ट्रैक हुआ तैयार, देश में सबसे तेज हो रहा निर्माण

कानपुर14 दिन पहले
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9 किमी. के प्रॉयोरिटी सेक्शन में अप और डाउन लाइन मिलाकर 18 किमी. ट्रैक बिछाया जाएगा। 11 मई से ट्रैक बिछाने का काम शुरू हुआ था और अब तक 3.5 किमी. ट्रैक बिछाया जा चुका है। - Dainik Bhaskar
9 किमी. के प्रॉयोरिटी सेक्शन में अप और डाउन लाइन मिलाकर 18 किमी. ट्रैक बिछाया जाएगा। 11 मई से ट्रैक बिछाने का काम शुरू हुआ था और अब तक 3.5 किमी. ट्रैक बिछाया जा चुका है।

कानपुर मेट्रो के प्रयॉरिटी कॉरिडोर का काम बहुत तेजी से पूरा किया जा रहा है। गुरुवार को मेट्रो प्रशासन ने जानकारी देते हुए बताया कि आईआईटी से तीसरे स्टेशन एसपीएम तक ट्रैक बिछाने का काम पूरा कर लिया गया है। 9 किमी. के प्रॉयोरिटी सेक्शन में अप और डाउन लाइन मिलाकर 18 किमी. ट्रैक बिछाया जाएगा। 11 मई से ट्रैक बिछाने का काम शुरू हुआ था और अब तक 3.5 किमी. ट्रैक बिछाया जा चुका है।
वायडक्ट पर ही जोड़े जा रहा ट्रैक
कानपुर में मेट्रो रेल के 18-18 मीटर के सेग्मेंट जोड़कर कई मीटर लंबी रेल तैयार की जा रही है। प्रयॉरिटी कॉरिडोर पूरी तरह से एलिवेटेड है और यहां पर ट्रैक की वेल्डिंग के लिए उपयोग में आने वाले प्लान्ट्स को मेनलाइन वायडक्ट पर ही लगाया गया है। फ्लैश वेल्डिंग के जरिए ट्रैक को वेल्ड भी किया जा रहा है।

तेजी से बिछाया जा रहा है मेट्रो के लिए ट्रैक।
तेजी से बिछाया जा रहा है मेट्रो के लिए ट्रैक।

डिपो में 18 में से 12 ट्रैक बिछाए गए
कानपुर में आईआईटी से नौबस्ता के बीच पहला कॉरिडोर बनना है, जिसका डिपो राजकीय पॉलिटेक्निक के कैंपस में तैयार हो रहा है। पहले कॉरिडोर के तहत आईआईटी से मोतीझील के बीच नवंबर-2021 में ट्रायल रन प्रस्तावित है। ट्रायल तय समय पर होता है तो ये देश में सबसे तेज निर्माण होने वाला मेट्रो कॉरिडोर बन जाएगा। अगस्त के अंत तक डिपो का काम पूरा कर लिया जाएगा। अभी तक लगभग 65% काम पूरा हो चुका है। डिपो में कुल 18 लाइनें बिछाई जानी हैं, जिनमें से 12 बिछाई जा चुकी हैं।
2 तरह के तैयार हो रहे ट्रैक
मेट्रो कॉरिडोर के मेनलाइन और डिपो में दो अलग-अलग तरह के ट्रैक तैयार किए जा रहे हैं। मेट्रो डिपो में बैलास्ट ट्रैक (गिट्टी-सहित) ट्रैक बिछाया जाना है, जबकि मेनलाइन के वायडक्ट पर बैलास्ट-लेस (गिट्टी-रहित) ट्रैक तैयार किया जा रहा है। ट्रैक के साथ-साथ सिग्नलिंग, टेलिकॉम और इलेक्ट्रिकल सिस्टम्स के काम भी तेजी से किया जा रहा है।

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