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कानपुर नगर निगम में टेंडर घोटाला!:एक ही काम के करा डाले 3 टेंडर, चेहते ठेकेदारों को काम दिलाने के लिए नहीं कराते हैं ई-टेंडरिंग, ऑडिट में पकड़ा गया खेल

कानपुर2 महीने पहले
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जोनल ऑफिसेस में मौजूद चहेते ठेकेदारों को टेंडर दिलाने के लिए लगातार अनियमितताएं बरती जा रही हैं। - Dainik Bhaskar
जोनल ऑफिसेस में मौजूद चहेते ठेकेदारों को टेंडर दिलाने के लिए लगातार अनियमितताएं बरती जा रही हैं।

कानपुर नगर निगम विकास कार्यों को लेकर हमेशा ही विवादों में रहा है। अब टेंडर में नया मामला सामने आया है। जोन-2 की बिल्डिंग की मरम्मत के लिए के 28 लाख रुपए के एक ही कार्य के लिए 3 टेंडर कराए गए। जबकि नियमों के मुताबिक ये पूरी तरह गलत है। जोन में मौजूद चहेते ठेकेदारों को टेंडर दिलाने के लिए लगातार इस तरह की अनियमितताएं बरती जा रही हैं।
ई-टेंडरिंग से बचाने के लिए
दरअसल, शासनादेश के मुताबिक 10 लाख रुपए से नीचे के विकास कार्य बिना ई-टेंडर किए करा सकते हैं। इस नियम की आड़ में जोनल अभियंता 10 लाख से ऊपर के कार्यों के छोटे-छोट बजट की फाइल बनाकर मैनुअल टेंडर कराते हैं। इससे अपने चहेतों ठेकेदारों को भी आसानी से टेंडर भी दिला लेते हैं और मोटा कमीशन भी ले लेते हैं।
ऑडिट में खुला खेल
नगर निगम में विकास कार्यों का ऑडिट चल रहा है। जिसमें ये खेल पकड़ में आया है। 3 दिसंबर 2020 को कृष्णा नगर स्थित जोन-2 ऑफिस की बिल्डिंग का मेंटेनेंस कार्य कराया गया। इसके लिए 10 लाख रुपए से कम की साढ़े 9 लाख रुपए तक की 3 फाइलें तैयार की गई। इससे मैनुअल टेंडर कराकर चहेतों को कार्य का ठेका भी दिलाया गया। अब ऑडिट के बाद ज्येष्ट लेखा परीक्षक विजय कृष्ण मौर्य की रिपोर्ट के बाद मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने चीफ इंजीनियर एसके सिंह से 15 दिन में जवाब मांगा है।
रेवेन्यू का होता है नुकसान
एक ही कार्य के विकास कार्य कराने पर नगर निगम को रेवेन्यू का भी लॉस होता है। क्योंकि ई-टेंडरिंग में कई ठेकेदार 20 परसेंट तक बिलो टेंडर डालते हैं, इससे विकास कार्य की लागत भी कम हो जाती है। मैनुअल टेंडर में बिलो रेट काफी कम होता है। इससे नगर निगम को नुकसान भी होता है। वहीं महापौर प्रमिला पांडेय भी कई बार इसको लेकर आपत्ति जता चुकी हैं।
जोन-2 के इन टेंडर में किया गया खेल
1. जोनल ऑफिस में जर्जर भवन की मेंटेनेंस (पश्चिमी भाग)- 9.40 लाख
2. जोनज ऑफिस के क्षतिग्रस्त भवन की मरम्मत- 9.78 लाख
3. जोनल ऑफिस के जर्जर भवन की मरम्मत (पूर्व भाग)- 9.05 लाख

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