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कानपुर... रोक के बावजूद शत्रु संपत्तियों की कर डाली रजिस्ट्री:रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों ने मिलकर दिया फर्जीवाड़े को अंजाम, डीएम को भी दिया चकमा, 4 पर कार्रवाई

कानपुर2 महीने पहले
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जांच रिपोर्ट के बाद डीएम विशाख जी ने अपर मुख्य सचिव स्टांप एंव पंजीयन विभाग को कड़ी कार्रवाई करने के लिए लिखा है। - Dainik Bhaskar
जांच रिपोर्ट के बाद डीएम विशाख जी ने अपर मुख्य सचिव स्टांप एंव पंजीयन विभाग को कड़ी कार्रवाई करने के लिए लिखा है।

रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों ने शत्रु संपत्तियों की धड़ल्ले से रजिस्ट्री कर डाली। जबकि डीएम ने 8 साल पहले ही इनकी रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी थी। जांच में ये तथ्य सामने आया है कि चारों ही अधिकारियों ने सुनियोजित तरीके से जानकर इन रजिस्ट्रियों को किया। जांच रिपोर्ट के बाद डीएम विशाख जी ने अपर मुख्य सचिव स्टांप एंव पंजीयन विभाग को कड़ी कार्रवाई करने के लिए लिखा है।

मनमाने तरीके से कर डाली रजिस्ट्री
शहर में 13 शत्रु संपत्तियों की कुल 49,887 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जे हो गए। इसमें ज्यादातर सम्पत्तियां शहर के सबसे पॉश एरिया में हैं। इन जमीनों पर स्वरूप नगर स्थित शहर का एक नामी हॉस्पिटल, मॉल और बड़े बंगले बन गए हैं। शहर में ग्वालटोली, दलेलपुरवा, रोशन नगर, अनवरगंज, स्वरूप नगर आदि जगहों पर 13 शत्रु संपत्तियां हैं। आठ साल पहले इन संपत्तियों की खरीद और बिक्री पर रोक लगाई गई थी। यह रोक डीएम ने लगाई थी और डीआईजी स्टांप, एआईइजी स्टांप को भी इसकी जानकारी दी गई थी। बावजूद इसके निबंधन अधिकारियों ने रजिस्ट्री कर दी।

डीएम को भी रखा अंधेरे में
जांच में ये भी तथ्य सामने आए हैं कि मामले में आरोपी उपनिबंधक-2 शीलभद्र चंद ने 5 दिसंबर 2017 को रजिस्ट्री की। इसके बाद महानिरीक्षक निबंधन को लेटर लिखकर मार्गदर्शन मांगा गया। डीएम ने रोक लगाई थी, इसके बावजूद डीएम को ये लेटर नहीं भेजा गया। वहीं मामला हाईकोर्ट में है और पिछले दिनों जब एसडीएम ने शत्रु संपत्तियों पर काबिज लोगों को कब्जे खाली करने की नोटिस दी तो मामला सामने आया।

डीएम ने तलब की रिपोर्ट
मामले का खुलासा होने के बाद डीएम विशाख जी ने रजिस्ट्रियों का विवरण तलब किया है और एडीएम वित्त एवं राजस्व से प्रत्येक रजिस्ट्री की डिटेल मांगी है। हाईकोर्ट को भी इसकी जानकारी दी जाएगी। साथ ही दोषी अफसरों के विरुद्ध शासन को संस्तुति की जाएगी और हाईकोर्ट के संज्ञान में भी इस कार्रवाई को लाया जाएगा।

ये होती हैं शत्रु संपत्ति
भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बीच जो लोग घर छोड़कर पाकिस्तान चले गए। उन्हें शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया। इन जमीनों की देखरेख जिला प्रशासन के पास होती है। कई सालों से जिला प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और इन पर बेतहाशा कब्जे होते चले गए।

मामले में ये अधिकारी पाए गए दोषी
-शीलभद्र चंद्रा, उप निबंधक-2। इन्होंने 9 सपंत्तियों की रजिस्ट्री की।
-रामचंद्र, तत्कालीन प्रभारी, उप निबंधक। इन्होंने 4 शत्रु सपंत्तियों की रजिस्ट्री की।
-वशंलाल पाल, उप निबंधक-2। इन्होंने 2 शत्रु संपत्तियों की रजिस्ट्री की।
-देवेंद्र सिंह, तत्कालीन सहायक महानिरीक्षक। इन्हें मामले में संलिप्त पाया गया।

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