कानपुर में 5 हजार लोगों की जा सकती है जान:बारिश तेज होने पर कभी भी गिर सकते हैं जिले के 717 मकान; 18 इलाकों में खतरा ज्यादा, सक्रिय हुई नगर निगम की टीम

कानपुर4 महीने पहले
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कानपुर समेत पूरे प्रदेश में मानसून सक्रिय हो चुका है। ऐसे में कानपुर नगर में जगह-जगह जर्जर मकान आसपास के लोगों के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं। नगर-निगम सिर्फ नोटिस तामील कर मगन है। यहां 717 ऐसे मकान हैं जो कभी भी आंधी-तूफान और बारिश के बीच ढह सकते हैं। इन मकानों में रहने वाले 5 हजार से ज्यादा लोगों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। पिछले साल एक जर्जर बिल्डिंग गिरने से एक वृद्धा की जान भी जा चुकी है।

अब तक 500 से ज्यादा आए आवेदन
बारिश का मौसम जैसे ही आता है, जर्जर भवनों के मालिकों द्वारा भवनों को गिराने की एप्लिकेशन नगर निगम में आने लगती है। इस बार भी नगर निगम में 500 से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। इस पर कार्रवाई के नाम पर जोनल अधिकारी नोटिस देकर खानापूर्ति कर लेते हैं। इस बार भी नगर निगम 100 से ज्यादा जर्जर भवनों को खुद से गिराने और खाली करने की नोटिस जारी कर चुका है। हालसी रोड, शारदा नगर, मनीराम बगिया, कुलीबाजार के अलावा कई हादसों में लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

फोटो चमनगंज की है। यहां जर्जर भवन के नीचे कई दुकानें भी हैं।
फोटो चमनगंज की है। यहां जर्जर भवन के नीचे कई दुकानें भी हैं।

चिह्नित करना है काम
अधिकारियों का काम जर्जर भवनों को सिर्फ चिन्हित करने का काम रह गया है। नगर निगम अगर बिल्डिंग गिराता है तो गिराने का खर्च मकान मालिक को ही देना होता है। वहीं सिटी में 157 जर्जर भवन ऐसे हैं, जिनमें मकान मालिक और किराएदार के बीच कोर्ट में केस चल रहे है। फैसले के इंतजार में कई जर्जर भवन गिर भी चुके हैं। बीते 4 सालों में नगर निगम ने महज 12 भवनों को ही गिराया है।

जर्जर भवन यहां सबसे ज्यादा
बेकनगंज, कछियाना, हरबंशमोहाल, टोपी बाजार, मछलीबाजार, नौघड़ा, नयागंज, मनीराम बगिया, बांसमंडी, लाटूश रोड, चमनगंज, लक्ष्मीपुरवा, लाठीमोहाल, सिरकीमोहाल, भन्नानापुरवा, चटाई मोहाल, जवाहर नगर, अनवरगंज आदि।

फोटो रूपम चौराहे की है। यहां भी कई मकानों की हालत बेहद खराब है।
फोटो रूपम चौराहे की है। यहां भी कई मकानों की हालत बेहद खराब है।

जोन वार जर्जर मकानों की संख्या

जोनसंख्या
1338
216
340
4268
527
628

क्या कहते हैं अधिकारी?
नगर निगम के चीफ इंजीनियर एसके सिंह ने बताया कि जर्जर भवनों को चिह्नित कर नोटिस दिया गया है और उन्हें खाली करने के लिए कहा गया है। जो मकान गैरविवादित होता है, उसे नगर निगम गिराता है। कई मकानों के कोर्ट में केस पेंडिंग हैं।

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