कानपुर रेप-मर्डर केस में तीसरे जांच अधिकारी की एंट्री:18 दिन में केस की जांच करने वाले तीसरे अफसर होंगे ADCP बसंत लाल, बृजेश श्रीवास्तव पर आरोपी के माता-पिता को बचाने के आरोप

कानपुर2 महीने पहले
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कल्याणपुर के गुलमोहर रेजिडेंसी अपार्टमेंट में रेप के बाद 10वीं मंजिल से फेंक कर लड़की की हत्या के केस में 18 दिन में तीसरी बार जांच अफसर बदला गया है। अब तक इस मामले की जांच ADCP वेस्ट बृजेश श्रीवास्तव कर रहे थे। लेकिन श्रीवास्तव ने आरोपी की गिरफ्तारी उसके घर से न दिखाकर बिठुर चौराहे से दिखाई थी। सवाल उठे थे कि पुलिस ने आरोपी प्रतीक वैश्य के माता-पिता को बचाने के लिए ऐसा किया।

हालांकि कानपुर के पुलिस कमिश्नर असीम अरुण का कहना है कि श्रीवास्तव गोरखपुर के मनीष गुप्ता हत्याकांड की जांच में व्यस्त हैं, इसलिए उनसे यह जिम्मेदारी लेकर एडीसीपी लाइन बसंत लाल को दी गई है।

18 दिन में तीसरे जांच अधिकारी

  • 21 सितंबर- कल्याणपुर थाना प्रभारी वीर सिंह
  • 28 सितंबर- जांच एडीसीपी वेस्ट बृजेश श्रीवास्तव को दे दी गई। उन पर आरोपी के माता-पिता को नामजद न करने के आरोप लगे।
  • 7 अक्टूबर- एडीसीपी बसंत लाल को जांच अधिकारी नियुक्ति किया।

15 दिन में जांच पूरी कर चार्जशीट के आदेश

पुलिस कमिश्नर कानपुर असीम अरुण ने बताया कि मामले की जांच एडीसीपी लाइन बसंत लाल को दी गई है। इसके साथ ही 10 से 15 दिनों में जांच पूरी करके कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने का भी आदेश दिया है।

एडवोकेट ने कमिश्नर से पूछा था सवाल

चर्चित निर्भया कांड में पीड़िता की पैरवी करने वाली अधिवक्ता सीमा समृद्धि पूरे मामले की निगरानी कर रही हैं। सीमा ने बताया कि वह पुलिस की जांच का रोजानाअपडेट ले रही हैं। जरूरत पड़ने पर कानपुर भी आएंगी। विवेचक की वयस्तता होने पर उन्होंने ही पुलिस कमिश्नर से सवाल पूछा था।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा मुकदमा
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। इससे जल्द से जल्द आरोपियों को कड़ी सजा मिल सकेगी। विवेचक टीम ही केस की फास्ट ट्रैक कोर्ट में पैरवी भी करेगी। वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे को फास्ट ट्रैक कोर्ट में लेकर जाएगी। इसलिए एडीसीपी स्तर के अफसर से मामले की जांच कराई जा रही है।

CM ने लिया था मामले का संज्ञान
रेप के बाद जघन्य हत्याकांड का सीएम योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लेते हुए पुलिस कमिश्नर असीम अरुण को तलब किया था। पूरे मामले को समझने के साथ ही आदेश दिया था कि निष्पक्ष जांच होने के साथ ही आरोपी को कड़ी सजा मिले। इसके बाद पुलिस कमिश्नर हरकत में आए और मामले में एडीसीपी की अध्यक्षता में नई जांच कमेटी गठित की थी।

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