CSA ने जारी की अलसी किसानों को एडवाइजरी:25 नवंबर तक बोआई करने की दी सलाह, कैंसर रोधी होती है अलसी

कानपुरएक महीने पहले
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चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय - Dainik Bhaskar
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में अलसी के उत्पादन को लेकर अडवाइजरी जारी क़ई गयी है। 25 नवंबर तक अलसी बोआई के लिए सही समय है। सीएसए अलसी विभाग कि डॉ नलिनी तिवारी ने बताया कि अलसी के सेवन से कैंसर को रोका जा सकता है। अलसी में लिगनेन नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है जो कि एक प्लांट एस्ट्रोजन होता है। यह कैंसर रोधी होता है और ट्यूमर की ग्रोथ को रोकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था में क्षेत्रफल एवं उत्पादन की दृष्टि से तिलहनी फसलें खाद्यान्न फसलों के बाद दूसरा महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

अलसी उत्पादन में भारत तीसरे स्थान पर

डॉ नलिनी तिवारी ने बताया कि अलसी के क्षेत्रफल में तीसरा एवं उत्पादन में भारत का विश्व में में पांचवा स्थान है। क्षेत्रफल में भारत का स्थान चीन के साथ एवं कनाडा व कजाकिस्तान के बाद आता है। जबकि उत्पादन में कनाडा, कजाकिस्तान, चीन एवं यूएसए के बाद आता है। हमारे देश की अलसी का कुल क्षेत्रफल 2.94 लाख हेक्टेयर तथा उत्पादन 1.54 लाख टन एवं उत्पादकता 525 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। उत्तर प्रदेश में अलसी का क्षेत्रफल उत्पादन एवं उत्पादकता क्रमश: 0.32 लाख हेक्टेयर , 0.17 लाख टन एवं 531 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। उत्तर प्रदेश में अलसी की खेती बुंदेलखंड क्षेत्र जालौन,हमीरपुर, बांदा, झांसी,ललितपुर एवं कानपुर नगर, कानपुर देहात, बस्ती, प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर आदि में की जाती है।

महात्मा गांधी करते थे अलसी का सेवन

डॉ तिवारी ने बताया कि अलसी की बुवाई का समय चल रहा है। किसान 20 नवंबर तक अलसी की बुवाई कर सकते हैं। किसान इसे असिंचित और सिंचित दशा में अलसी के बीज की बुवाई करें। अलसी के बारे में गांधी जी ने कहा था कि जिस घर में अलसी का सेवन होता है वह घर निरोगी होता है। अलसी के बीज में तेल 40 से 45%, प्रोटीन 21%,खनिज 3%, कार्बोहाइड्रेट 29%,ऊर्जा 530 किलोग्राम कैलोरी, कैल्शियम 170 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम, लोहा 370 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम इसके अलावा कैरोटीन, थायमीन, राइबोफ्लेविन एवं नाएसीन भी होता है।

अलसी के सेवन से बढ़ता है इम्यून सिस्टम

अलसी के छिलके में मुएसिटेड होता है जिससे सर्दी, जुखाम,खांसी एवं खराब में फायदा होता है। इसके सेवन से इम्यून सिस्टम बहुत बढ़ता है। अलसी में लिगनेन नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है जो कि एक प्लांट एस्ट्रोजन होता है। यह कैंसर रोधी होता है तथा ट्यूमर की ग्रोथ को रोकता है। अलसी के बीज में खाद्य रेशा भी होता है जिसके कारण कब्ज एवं शरीर के रक्त में शर्करा के स्तर को नियमित करने में सहायक एवं कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होता है। इसके बीज में ओमेगा 3 एवं ओमेगा 6 वसा अम्ल भी होते हैं omega-3 हमारे शरीर में संश्लेषी नहीं होता है। ओमेगा 6 से बुद्धि एवं स्मरण शक्ति, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जो कि कोरोना में लड़ने की क्षमता बढ़ाता है।