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कुरसौली गांव में डेंगू बुखार से अब तक 6 मौतें:डीएम के आदेश के बाद सीएमओ पहुंचे गांव, घर-घर ढूंढे गए डेंगू के लार्वा, डर के कारण ग्रामीण पलायन को मजबूर

कानपुरएक महीने पहले
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स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा लगाया गया कैंप - Dainik Bhaskar
स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा लगाया गया कैंप

कानपुर शहर में अनजान बुखार अब तक 18 से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है, इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग पूरी सक्रिय नहीं दिखा रहा है। ना तो कहीं फॉगिंग हो रही और नही कोई दवा का छिड़काव। अब तक कल्याणपुर के ब्लॉक कुरसौली गांव में रविवार तक 6 मौतें हो चुकी है। आपको बता दें भास्कर ने दो दिन पहले एक ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें इन दो मौतों का उल्लेख किया था। रविवार तक मरने वाले लोगों की संख्या इस गांव में 6 हो चुकी है। उसके बाद कहीं जाकर प्रशासन जागा है।

6 हुई मौतों पर प्रशासन सुस्त
कुरसौली गांव में हुई इन 6 मौतों पर प्रशासन अपनी चुप्पी साधे हुए है, न तो सीएमओ कुछ बोलने को तैयार है और न ही डीएम। इस गांव में हुई मौतों ने लाचार स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। अगर उस गांव में बने सीएचसी में अच्छी सुविधाएं होती तो शायद उन 6 लोगों की जानों बचाई जा सकती थी। डॉक्टर यह भी नहीं पता लगा पाए की इनकी मौत कैसे हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां बने सरकारी हेल्थ सेंटर में खून की जांच के नमूने की सुविधा न होना बना।

यहां जो भी सैंपल लिए जाते हैं वह मेडिकल कॉलेज भेजे जाते हैं। जांच के लिए और तीन से चार दिन बाद मरीजों की जांच रिपोर्ट मिल पाती है। ऐसे में जब मरीज की हालत बिगड़ती है तो डाक्टरों को मरीज की कंडीशन समझने में काफी तकलीफ होती है।

गांव वालों में हुई डेंगू की पुष्टि

इस गांव के 28 से ज्यादा लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। कल्याणपुर ब्लॉक के कुरसौली गांव में बुखार से अब तक 6 मौतें हुई है। इस समय करीब 200 से ज्यादा ग्रामीणों को बुखार ने अपनी चपेट में ले रखा है। इसके अलावा 25 से ज्यादा लोग क्षेत्र के अलग अलग अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं।

आपको बता दें इस गांव के लोगों के प्लेटलेट्स काउंट काफी कम होते जा रहे हैं और बुखार भी नहीं उतर रहा है। स्थिति को देखते हुए डीएम आलोक तिवारी शनिवार रात को ही सीएमओ को कुरसौली गांव में कैंप करने को कहा था, लेकिन खानापूर्ति करने के बाद सीएमओ अपनी टीम के साथ वापस रात में ही आ गये थे।

रविवार को हुई तीन के बाद लगाया मेडिकल कैंप

शनिवार शाम को डीएम अलोक तिवारी ने सीएमओ डॉ नेपाल सिंह को ये आदेश दिए थे कि अब इस गांव में किसी की भी मौत नहीं होनी चाहिए, लेकिन सीएमओ ने शनिवार को सिर्फ अपनी टीम भेजी और वहां से शनिवार रात को ही टीम लौट आई।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किया दौरा और लगाया कैंप

रविवार तक चार और मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह के साथ मौके पर पहुंची और उन्होंने गांव वालों को आश्वासन देते हुए कहा कि अब यहां अब किसी की मौत नहीं होगी। गांव वालों ने उनसे सवाल करते हुए कहा कि आप जैसे साहब यहां शनिवार को भी आए थे उन्होंने भी यही बोला था, लेकिन आज फिर से तीन मौतें हो गई।

निजी डॉक्टरों ने विशेष तौर पर खोले अपने क्लिनिक

निजी डॉक्टरों के यहां भी बुखार के मरीजों की भरमार है। मिली जानकारी के अनुसार कल्याणपुर इलाके के डॉक्टरों ने रविवार खासतौर पर कुरसौली गांव के लोगों के लिए अपना क्लिनिक खोला। इंदिरानगर में अपना क्लिनिक चलाने वाले जनरल फिजिशियन डॉ एसके अवस्थी ने बताया, इनदिनों हमारे यहां आसपास के इलाके से कई मरीज बुखार के आ रहे हैं। ज्यादातर मरीजों को तेज बुखार के साथ ठंड और निमोनिया की शिकायत है। यह सब डेंगू के लक्षण है। एकदम से इतने मरीजों का आना किसी बड़ी समस्या की तरफ इशारा करता है।

गांव में कर्फ्यू जैसा माहौल

इस गांव में हुई मौतों के बाद से ही कुरसौली में कर्फ्यू जैसा माहौल है। लोगों अपने घरों में कैद रहने को मजबूर हो गए है। साथ ही कुछ लोग तो यहां अपने घर पर ताला लगा कर रिश्तेदारों के यहां रहने चले गया है। यहां बचे लोगों के हर एक घर में कोई न कोई बुखार से पीड़ित है। गांव वालों का कहना है कि इतना सन्नाटा तो इस गांव में कोरोना के समय भी नहीं हुआ था, लेकिन जब से इस अनजान बीमारी से दो लोगों की मौत हुई है उसके बाद से यहां कोई रहना पसंद नहीं कर रहा है।

पलायन करने पर मजबूर हैं लोग

कुरसौली गांव में हर घर में बीमार लोग चारपाई में लेटे व कई घरों में ताला लटकता हुआ नजर आया। आस पड़ोस के लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि गांव के कुछ लोगों के परिवार के लोग कानपुर के निजी अस्पतालों में भर्ती हैं तो कोई सरकार में। इसी गांव के मनोज ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग का कोई भी अधिकारी इस गांव की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है।

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