यूपीसीए ने दो बागी एपेक्स मेंबर्स के खिलाफ बैठाई जांच:संघ के मेमोरेंडम के उल्लंघन का आरोप, जांच के नाम पर दबाव बनाने का आरोप

कानपुरएक वर्ष पहले
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​​​​यूपीसीए में अब बागी गुट के अगुआकर राकेश मिश्रा और उनका साथ देने वाले कमल चावला के खिलाफ जांच शुरू कर दी गयी है। इन पर आरोप है, कि इन दोनों ही एपेक्स कमेटी के सदस्य ने यूपीसीए मेमोरेंडम का उल्लंघन किया है। फिलहाल दोनो को जांच का सामना करना होगा। उधर इस जांच के खिलाफ राकेश मिश्र और कमल चावला का कहना है कि दबाव बनाने के लिये जांच का ड्रामा शुरू किया गया है। उन दोनों का तर्क है कि यूपीसीए में मेमोरेंडम को ताक पर रखने वालों के खिलाफ शिकायत करने के बाद यह जांच बैठाई गयी है।

एपेक्स मेंबर पर लगाए गये आरोप,

यूपीसीए द्वारा दो एपेक्स सदस्यों पर आरोप लगाया है कि राकेश मिश्रा और कमल चावला लोढ़ा कमेटी के सिफारिशों का उल्लंघन कर रहे है। एडवोकेट धर्मेंद्र सिंह धर्म ने बताया कि यूपीसीए के क्लास 8 के अनुसार अपेक्स कमेटी का सदस्य किसी और खेल महासंघ का या किसी कंपनी का पदाधिकारी नहीं हो सकता है। लेकिन यूपीसीए में कमल चावला मथुरा डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव होने के साथ मथुरा टेबल टेनिस एसोसिएशन के सचिव पद भी संभाल रखा है। इसी के साथ वह यूपीसीए अपेक्स कमेटी सदस्य भी है। धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि इसी तरह राकेश मिश्रा गाजियाबाद क्रिकेट संघ के अध्यक्ष पद पर तैनात है। साथ ही यूपीसीए की अपैक्स कमेटी में सदस्य भी है। उनके बेटे ललित मिश्रा पिछले कई सालों से यूपी क्रिकेट टीम के सदस्य हैं। यूपीसीए मेमोरेंडम के मुताबिक एपेक्स कमेटी के परिवार का कोई भी सदस्य क्रिकेट टीम का हिस्सा नहीं हो सकता है। इन दोनों ही लोगों की शिकायत दर्ज करा कर दोनो के निष्कासन की कार्रवाई बढ़ाने को कहा गया है।

जांच और आरोप को बताया निराधार

इस पूरे मामले पर यूपीसीए कमेटी के सदस्य राकेश मिश्रा का कहना है कि वह ऑफिस वियरर नहीं है। यदि वह सेलेक्शन कमेटी के सदस्य होते और अपने बेटे का चयन करते हैं तो नियम विरुद्ध होता। वह किसी तरह से पदाधिकारी भी नहीं है। तो ऐसे में यूपीसीए के मेमोरेंडम का किसी भी सूरत में उल्लंघन नहीं हो रहा है। उनके बेटे का चयन सेलेक्शन कमेटी द्वारा किया गया है, ना कि उनके द्वारा। उन्होंने कहा यदि सिलेक्शन कमेटी की चयन प्रक्रिया में कोई गड़बड़ हुआ है, तो उसके जिम्मेदार वह नहीं हो सकते हैं। यह जबरदस्ती दबाव बनाने का खेल है। जिसके आगे वह नहीं झुकेंगे। काबिज गुट द्वारा तमाम तरह की अनियमितताओं को लेकर वह हाईकोर्ट गए हैं। जिस पर वह लोग बौखला गए हैं और इस तरह की हरकतें कर रहे हैं। इससे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है और वह दबाव में नहीं आएंगे।