कानपुर में मंदिर परिसर में निर्माणाधीन मजार को लेकर बवाल:बजरंग दल के पदाधिकारियों ने किया तोड़फोड़ का प्रयास, पुलिस से झड़प के बाद हंगामा; मौके पर फोर्स तैनात

कानपुर4 महीने पहले
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मंदिर परिसर में बनी मजार को देखते बजरंग दल के कार्यकर्ता और पुलिस।  - Dainik Bhaskar
मंदिर परिसर में बनी मजार को देखते बजरंग दल के कार्यकर्ता और पुलिस। 

कानपुर के बर्रा थाने के पास स्थित मंदिर परिसर में मजार के निर्माण को लेकर गुरुवार को बजरंग दल ने जमकर हंगामा किया। कार्यकर्ताओं ने मजार को हटाने का प्रयास किया। मगर मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बवाल शुरू कर दिया। पुलिस ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को थाने में बुलाकर शांत कराया। हालांकि, मौके पर पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है।

मंदिर परिसर में मजार को लेकर बढ़ा विवाद
मामला बर्रा थानाक्षेत्र का है। यहां से चंद कदम की दूरी पर भद्रकाली और बालाजी महाराज का मंदिर बना है। परिसर में स्वर्गीय बैजनाथ कुशवाहा के पूर्वजों की ओर से बनाई गई एक छोटी सी कच्ची मजार बनी हुई है। थाना प्रभारी अजय सेठ ने बताया कि गुरुवार को मंदिर परिसर में मजार का निर्माण होने की बात को लेकर बजरंग दल पदाधिकारी दिलीप सिंह संग उनके कार्यकर्ता हंगामा करने लगे। साथ ही तोड़फोड़ शुरू कर दी। सूचना मिलते ही बर्रा थाने का फोर्स पहुंचा और आक्रोशित बजरंगियों को शांत कराया।

बर्रा थाने की पुलिस और बजरंग दल के बीच झड़प।
बर्रा थाने की पुलिस और बजरंग दल के बीच झड़प।

कच्चा मजार को 2002 में किया गया था पक्का
बताया जा रहा है कि स्वर्गीय बैजनाथ कुशवाहा के पूर्वजों की ओर से बनाई गई एक छोटी सी कच्ची मजार 2002 में बैजनाथ के लड़के रामबाबू व इनके भाइयों ने उसे पक्का कर दिया था। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसके पीछे झाड़ फूंक कर चढ़ावे का पैसा प्राप्त करना था। मंदिर परिसर में सिर्फ हिंदुओं का ही आना-जाना है। अन्य किसी भी संप्रदाय का कोई व्यक्ति नहीं आ सकता।

एक बार फिर माहौल बिगाड़ने की कोशिश
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मंदिर परिसर में बने मजार को तोड़ने का प्रयास करके एक बार फिर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया। गनीमत रही थाने के चंद कदम की दूरी का मामला होने के चलते पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। आक्रोशित बजरंगियों को शांत कराया गया। जांच में पता चला कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को अगर किसी बात पर आपत्ति थी तो उन्हें थाने या अन्य किसी अफसर से पहले शिकायत करनी चाहिए थी।

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