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महापौर से विवाद के बाद उपनेता सदन का इस्तीफा स्वीकार:BJP ने कानपुर नगर निगम उपनेता सदन की कमान नगर पार्षद सत्येंद्र मिश्रा को सौंपी, पार्टी के बीच राजनीतिक हलचल हुई तेज

कानपुर2 महीने पहले
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उपनेता सदन रहे भाजपा से वरिष्ठ पार्षद महेंद्र नाथ शुक्ला और महापौर प्रमिला पांडेय। - Dainik Bhaskar
उपनेता सदन रहे भाजपा से वरिष्ठ पार्षद महेंद्र नाथ शुक्ला और महापौर प्रमिला पांडेय।

कानपुर नगर निगम में उपनेता सदन को लेकर चल रहे विवाद का सोमवार शाम को अंत हो गया। 19 नवंबर 2020 को हुए नगर निगम सदन में महापौर प्रमिला पांडेय और तत्कालीन उपनेता सदन महेंद्र नाथ शुक्ला के बीच तगड़ा विवाद हो गया था। इस पर महापौर ने उपनेता सदन को 6 महीने के लिए निष्कासित कर दिया था। सोमवार को भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील बजाज ने नगर पार्षद को सत्येंद्र मिश्रा के नाम की घोषणा कर दी।

इस्तीफा हुआ स्वीकार
भाजपा सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ पार्षद महेंद्र नाथ शुक्ला ने जिलाध्यक्ष को अपना इस्तीफा करीब 4 दिन पहले ही सौंप दिया था। इसके बाद पार्टी ने नए उपनेता सदन को लेकर काफी मंथन किया। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता और 2 बार कौशलपुरी से पार्षद रहे सत्येंद्र मिश्रा पर पार्टी ने विश्वास जताया। पार्टी ने हाल ही में उन्हें नगर पार्षद भी बनाया है। साल 2012 से 2017 के बीच सत्येंद्र उपनेता सदन भी रह चुके हैं।

पार्टी द्वारा जारी किया गया लेटर। नगर पार्षद सत्येंद्र मिश्रा।
पार्टी द्वारा जारी किया गया लेटर। नगर पार्षद सत्येंद्र मिश्रा।

सदन में हुआ था विवाद, एफआईआर तक हुई
नगर निगम सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा पार्षद रमेश हटी ने अपने ही अपनी पार्टी के उपनेता सदन महेंद्र शुक्ल पर आरोप लगाया था कि वे धर्मशाले की दुकान नंबर 11 पर कब्जा कर रखा है। इस आरोप पर उपनेता का पारा चढ़ गया और भरे सदन में उन्होंने पार्षद पर तीखी टिप्पणियां कीं।

सदन में हंगामा और माहौल खराब होते देखकर महापौर प्रमिला पांडेय ने उपनेता सदन को समझाना चाहा, लेकिन मामला शांत न होता देख सदन स्थगित कर दिया था। इस दौरान उपनेता ने हत्या कराने का आरोप लगाते हुए जेल भेजने की बात कही थी। इस पर महापौर ने उपनेता सदन को निष्कासित कर दिया था। वहीं पार्षद ने उपनेता सदन के खिलाफ एफआईआर तक करा दी थी।

नगर निगम के इतिहास में हुआ था पहली बार
उपनेता के आचरण को अनुशासनहीनता मानते हुए महापौर ने 6 महीने के लिए सदन से निष्कासित कर दिया था। साथ ही अनिश्चितकालीन के लिए सदन भी स्थगित कर दिया गया था। नगर निगम के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी उपनेता को सदन से निष्कासित किया गया था। इस प्रकरण का पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ ही मुख्यमंत्री तक ने संज्ञान लिया था।

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