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हैलट में सात दिनों बाद आए एंटी फंगल इंजेक्शन:ब्लैक फंगस के इलाज की टूटी चेन, मरीजों का कोर्स फिर से शुरू करना होगा, अब तक चार हो चुकी है मौत

कानपुर3 महीने पहले
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हैलट अस्पताल की फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
हैलट अस्पताल की फाइल फोटो

कोविड वायरस को मात देने वाले मरीजों में ब्लैक फंगस ने कहर बरपाया है। सिर्फ यूपी में ही इसके एक हजार से अधिक मरीज मिल चुके हैं। शहर में इसकी संख्या 49 है। जबकि देश भर में इसके अब तक कई हजार मरीज मिल चुके हैं। कानपुर में ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) के केस लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए पिछले 7 दिनों से न तो इंजेक्शन थे और न ही दवाइयाँ। प्राचार्य डॉ संजय काला यहाँ भर्ती ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए दवाइयां और इंजेक्शन आगरा मेडिकल कॉलेज में मँगवाए, तब जा कर शुक्रवार को इन मरीजों का इलाज फिर से शुरू हो पाया।

एंटी फंगल इंजेक्शन की कमी से इलाज की चेन टूटी...
हैलट अस्पताल के नेत्र विभाग की सीनियर डॉक्टर शालिनी मोहन ने बताया, यह भर्ती मरीजों के ऊपर हम दो प्रकार के कोर्स चलता है। जिसमें ज्यादा संक्रामण होता है उनके लिए 21 दिनों का कोर्स होता है और जिनको कम संक्रमण होता है उन मरीजों के लिए 14 दिनों का कोर्स होता है। इन मरीजों सुबह और शाम इन एंटी फंगल इंजेक्शन के डोज दिए जाते है। अगर कोर्स बीच में टूट जाता है तो इसे एक बार फिर से शुरू करना पड़ता है। कोर्स टूटने से फंगस के और फैलने के साथ साथ मरीजों की आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ता है।

एक बार फिर एंटी फंगल इंजेक्शन की कमी...
यह कोई पहली बार नहीं है जब मरीजों को लगने वाले इंजेक्शन खत्म हुए हो। मई के महीने में शहर में किसी भी मेडिकल स्टोर में लाइपोसोम अम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन नहीं मिल रहे थे। इस वजह से कई मरीजों को अपनी आंखों की रोशनी खोनी पड़ी थी। अभी पिछले हफ्ते ही एक मरीज की मौत इंजेक्शन न मिलने के कारण हुई थी।





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