गेहूं पर एक्सपोर्ट बैन होने से जमाखोरी पर लगेगी लगाम:कैट ने निर्णय का किया समर्थन, खाद्य सुरक्षा के लिए बताया जरूरी कदम

कानपुर14 दिन पहले
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केंद्र सरकार के गेहूं पर एक्सपोर्ट बैन करने से स्टॉक की जमाखोरी पर लगाम लगेगी। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सरकार के इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह फैसला पहले घरेलू खपत को पूरा करने के लिए सरकार की जिम्मेदारी को दर्शाता है l जो एक स्वागत योग्य कदम है। देश में खाद्य सुरक्षा की रक्षा के लिए यह कदम आवश्यक था।

रोटी, कपड़ा-मकान की उपलब्धता सरकार की प्राथमिकता

कैट के राष्ट्रीय सचिव पंकज अरोरा ने कहा कि देश में अनिर्धारित, अचानक और व्यापक गर्मी ने गेहूं के उत्पादन को काफी नुकसान पहुंचाया है। वैश्विक स्तर पर गेहूं की कमी है और रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध उसके लिए एक प्रमुख कारक है। भारत सीमांत आय वाले लोगों का देश है और 'रोटी, कपड़ा-मकान की उपलब्धता सरकार की पहली प्राथमिकता रहती है। सरकार ने यह निर्णय इसलिए लिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश में गेहूं की कोई कमी नहीं है।

गेहूं की घरेलू खपत 105 मिलियन मीट्रिक टन

बता दें कि भारत पूरी दुनिया में चीन के बाद गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। लगभग 30 मिलियन हेक्टेयर भूमि का उपयोग गेहूं उत्पादन के लिए किया जाता है। इस साल उत्पादन करीब 125 मिलियन मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। गेहूं की घरेलू खपत 105 मिलियन मीट्रिक टन है।

प्रभाव समझने में लगेंगे 48 घंटे

कैट के नेताओं के अनुसार, देश में गेहूं की कमी से बचने के लिए यह कदम जरूरी था। इसलिए, सरकार ने यह निर्णय लिया। इस प्रतिबंध का किसानों और व्यापारियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन बाजार पर प्रतिबंध के प्रभाव को समझने के लिए कम से कम 48 घंटे की जरूरत है।