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नर्क है राखी मंडी:कानपुर की ब्लू-2 जूही योजना (राखी मंडी) को लेकर KDA और नगर निगम के बीच चल रही नूरा कुश्ती, एक आदेश की वजह से 43 साल से नहीं हो सका डेवलपमेंट

कानपुर15 दिन पहले
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महापौर के साथ बैठक करते नगर निगम के कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
महापौर के साथ बैठक करते नगर निगम के कर्मचारी।

कानपुर साउथ सिटी में केडीए ने 1978 में एक योजना डब्लू-2 जूही योजना (राखी मंडी) के नाम से डेवलप की थी। तब से लेकर अब तक केडीए और नगर निगम हैंडओवर को लेकर नूरी कुश्ती कर रहे हैं। आलम ये है कि यहां बीते 43 सालों से 5 हजार आबादी को न तो रोड मिली और न ही स्ट्रीट लाइट तक क्षेत्र में लग पाई। गुरुवार को महापौर प्रमिला पांडेय की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में केडीए ने फिर हैंडओवर की बात कही। इस पर नगर निगम ने कागज मांगा तो सिर्फ 1978 का एक कागज दिखा पाए।

केडीए देता है अलग-अलग जवाब
मीटिंग में मौजूद नगर निगम चीफ इंजीनियर एसके सिंह ने बताया कि एक पीड़ित को जनसुवाई में केडीए ने जवाब देकर बताया कि 1978 में योजना हैंडओवर हो चुकी है। जबकि क्षेत्रीय पार्षद सुनील कनौजिया ने बताया कि आरटीआई में केडीए ने ईयर-2013 में योजना को हैंडओवर किया जाना बताया है।

खुद ही सबकुछ कर डाला
मामले में महापौर प्रमिला पांडेय ने बताया कि जबकि दो विभागों के बीच कोई योजना ट्रांसफर होती है तो दोनों के बीच डॉक्यूमेंट शाइन होते हैं। लेकिन नगर निगम के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है। इस संबंध में केडीए वीसी से चर्चा कर राखी मंडी में विकास कराया जाएगा।

जल निगम की डाली लाइन में लीकेज
राखी मंडी में बीते कुछ सालों तक पहले क्रोमियम काफी मात्रा में डंप था। इससे यहां का ग्राउंड वाटर भी प्रदूषित हो गया था। एनजीटी के आदेश पर यहां जल निगम ने ईयर-2019 में 47 लाख रुपए से वाटर लाइन डाली थी। 2 साल भी पूरे नहीं हुए और वाटर लाइन में कई जगहों से लीकेज हो गया। 2 किमी. वाटर लाइन बिछाकर 240 कनेक्शन दिए गए थे।

महापौर​​​​ ने इस पर नाराजगी जताई और जल निगम को जल्द लीकेज ठीक करने के निर्देश दिए हैं। मीटिंग में केडीए से अधिशाषी अभियंता अतुल मिश्रा, जल निगम अधिशाषी अभियंता शमीम अख्तर समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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