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  • DG CBCID Also Inquired On The Second Day Of IAS Iftkharuddin: The Connection Of Funding For Religious Propaganda Was Lying, Who Used To Bear The Expenses Of Youth Engaged In Publishing Religious Books And Propaganda

IAS इफ्तखारुद्दीन के दूसरे दिन भी DG-CBCID ने की पूछताछ:धार्मिक प्रचार-प्रसार के लिए होने वाली फंडिंग का कनेक्शन लताश रही SIT, धार्मिक किताबें छपवाने और प्रचार-प्रसार में लगे युवाओं का कौन उठाता था खर्च

कानपुर19 दिन पहले
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यूपीएसआरटीसी के एमडी सीनियर आईएएस इफ्तखारुद्दीन। - Dainik Bhaskar
यूपीएसआरटीसी के एमडी सीनियर आईएएस इफ्तखारुद्दीन।

सीनियर आईएएस यूपीएसआरटीसी के चेयरमैन इफ्तखारुद्दीन से एसआईटी की टीम ने दूसरे दिन लगातार पांच घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान यह पूछा गया कि आखिर धार्मिक पुस्तकों के प्रकशन व धार्मिक प्रचार-प्रसार में लगे युवकों के टीम को फंडिंग कौन करता था। हांलाकि आईएएस ने किसी भी तरह की फंडिंग से इनकार किया है। गुरुवार को दोबारा पांच घंटे पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया गया। जल्द ही एसआईटी अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
धार्मिक साहित्य छपवाने और तकरीरें कराने वाले युवकों को कहां से होती थी फंडिंग, इसका साक्ष्य जुटा रही SIT
सरकारी आवास पर तकरीरों के वायरल वीडियो मे फंसे यूपीएसआरटीसी के चेयरमैन तथा पूर्व मंडलायुक्त मो. इफ्तिखारुद्दीन से एसआईटी ने लगातार दूसरे दिन भी पूछताछ की। बुधवार को लिए गए बयान से आए नए सवालों पर एसआईटी की टीम ने पूछा कि आखिर धार्मिक साहित्य छपवाने के लिए कहां से धन आता था...? धार्मिक प्रचार प्रसार में लगे युवकों का खर्च कौन उठाता था...? इन साहित्यों को किस प्रकाशन ने पब्लिश किया है...? उनकी लिखी शुद्ध धर्म, शुद्ध भक्ति और शुद्ध उपासना शीर्षक कि किताबों को लिखने में किसने सहयोग किया...? इसके अलावा और कितने पुस्तकों का प्रकाशन आपने कराया है...? इस तरह के सैकड़ों सवालों के जवाब उनसे पूछे गए। पूछताछ और जांच के दौरान इस बात के कोई प्रमाण नहीं मिले कि धर्म प्रचार के लिए कहीं से वित्तीय मदद मिली है।
हथकरघा विभाग तक पहुंची एसआईटी की जांच
एसआईटी ने पता लगाने की कोशिश की कि तकरीर और धार्मिक साहित्य छपवाने के लिए फंड का इस्तेमाल कहां से किया गया। इसी कड़ी में एसआईटी कानपुर स्थित हथकरघा मुख्यालय तक पहुंच गई। पूर्व मंडलायुक्त के पास कानपुर में तैनाती के दौरान हथकरघा आयुक्त का भी चार्ज था। एसआईटी के मुताबिक, मो. इफ्तिखारुद्दीन के खिलाफ सीधे तौर पर किसी तरह के लेनदेन या फिर सरकारी धन के खर्च की संलिप्तता नहीं पाई गई। पूछताछ के दौरान यह जरूर सामने आया है कि कुछ हथकरघा समितियों ने एनएसजीसी से मिलने वाला सूत सरकारी रेट पर खरीदा और उन्हें बुनाई में इस्तेमाल करने के बजाय खुले बाजार में बेच दिया था।

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