कानपुर में GSVM के जूनियर डॉक्टरों से मारपीट:शराब पीकर हंगामा करने का आरोप, लोगों ने समझाया तो भिड़ गए, फिर लोगों ने दौड़ाकर पीटा, कार भी तोड़ डाली

कानपुर3 महीने पहले
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हमले में क्षतिग्रस्त डॉक्टरों की कार। - Dainik Bhaskar
हमले में क्षतिग्रस्त डॉक्टरों की कार।

कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर को शनिवार देर रात स्वरूप नगर थाना क्षेत्र में पीट दिया गया। मेडिकल कॉलेज के चार जूनियर डॉक्टर और हमीरपुर में तैनात डॉक्टर दोस्त के साथ स्वरूप नगर के अनिल मीट वाला में खाना खाने गए थे। इस बीच डॉक्टरों का मोहल्ले के कुछ लोगों से विवाद हो गया, जिसके बाद मोहल्ले वालों ने डॉक्टरों को सड़क पर दौड़ा दौड़ा कर पीटा। कार्रवाई न होने पर डॉक्टरों ने इमरजेंसी ठप करने की चेतावनी दी है। देर रात तक उपद्रवियों की तलाश में पुलिस जगह जगह दबिश देती रही।

ऐसे शुरू हुआ विवाद...
दरअसल शनिवार देर रात अनिल मीट शॉप पर कुछ डॉक्टर अपने दोस्तों के साथ डिनर करने पहुंचे। खाना खाने के बाद जब वह लोग रेस्टोरेंट से बाहर आए तो जूनियर डॉक्टर मोहल्ले में खड़े होकर जोर जोर से बात करने लगे, इस पर जब कुछ लोगों ने उनको मना किया तो वह पांचों डॉक्टर उनसे भिड़ गए और गलियां देने लगे। यह सब सुन कर मोहल्ले के अन्य लोग अपने घरों से बाहर आगए और डॉक्टरों को समझा बुझा कर शांत कराने लगे।

लेकिन उन पांचो डॉक्टरों में से दो लोगों ने वहां खड़े कुछ लोगों को बाद में देख लेने की धमकी दे डाली, जिसपर इस विवाद ने मारपिट का रूप ले लिया। विवाद इतना बढ़ गया कि कई लोग अपने घरों से हॉकी स्टिक और डंडे निकाल लाए और डॉक्टरों को दौड़ा दौड़ा कर पीटने लगे। किसी तरह डॉक्टरों ने भाग कर अपनी जान बचाई। मोहल्ले वालों ने डॉक्टरों की कार को भी नहीं बक्शा। डॉक्टर की गाड़ी में भी जमकर तोड़फोड़ की। सूचना मिलने पर जब पुलिस पहुंची तो वहां से सभी भाग निकले। देर रात तक उपद्रवियों की तलाश में पुलिस जगह जगह दबिश देती रही।

हैलट इमरजेंसी ठप करने की दी धमकी...
पीटे गए अपने साथी डॉक्टरों के सपोर्ट में अन्य जूनियर डॉक्टरों ने कॉलेज के प्राचार्य को हैलट इमरजेंसी बंद करने की धमकी देने लगे। डाक्टरों का कहना था कि दोषियों को जब तक पकड़ा नहीं जाएगा तब तक इमरजेंसी का काम ठप रहेगा। इस पर जब प्राचार्य डॉ संजय काला से बात की तो उन्होंने बताया कि देर रात इस मामले की सूचना मुझे मिली कि कुछ जूनियर डॉक्टरों का विवाद किसी से हुआ है, मैंने तुरंत थाना प्रभारी को उन उपद्रवियों के खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लेने के लिए कहा और जूनियर डॉक्टरों से बात कर उन्हें समझाया कि पुलिस को अपनी कार्यवाही करने का समय दे, तब कहीं जाकर जूनियर डॉक्टर माने।

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