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कैबिनेट मंत्री का कोर्ट से भागने का मामला:सत्ता के रसूख के आगे कोर्ट का आदेश बेमानी; राकेश सचान के खिलाफ नहीं हुई FIR

कानपुर3 महीने पहले
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कैबिनेट मंत्री राकेश सचान - Dainik Bhaskar
कैबिनेट मंत्री राकेश सचान

कैबिनेट मिनिस्टर राकेश सचान मामले में अब कोर्ट की तहरीर भी सामने आ गई है। यह आर्म्स एक्ट में दोषी करार होने के बाद कोर्ट से फरार होने को लेकर है। उस घटना के बाद कोर्ट ने पुलिस को राकेश सचान के खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए तहरीर दी थी। कोर्ट के आदेश के बाद भी उनके खिलाफ FIR दर्ज नहीं की गई है। सत्ता और शासन के दबाव में पुलिस पूरी तरह से बैकफुट पर है।

पढ़िए एक-एक बिंदु पर कैबिनेट मंत्री के रसूख के आगे बेबस कानपुर पुलिस कमिश्नरेट और लचर सिस्टम पर पूरी खबर…।

मंत्री के रसूख के आगे बेबस हुई कानपुर पुलिस
कोर्ट की तहरीर के मुताबिक, आर्म्स एक्ट के मामले में कैबिनेट मिनिस्टर राकेश सचान की 6 अगस्त को अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट आलोक यादव की कोर्ट में सुनवाई थी। इस दौरान दोषी साबित होने के बाद सजा का आदेश लेकर कोर्ट से राकेश सचान भाग निकले थे।

इस मामले में भले ही कैबिनेट मिनिस्टर राकेश सचान ने 8 अगस्त को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। उन्हें एक साल की सजा और 1500 रुपए जुर्माना भी हो गया। मगर, कोर्ट की ओर से दी गई तहरीर के 10 दिन बाद भी कैबिनेट मिनिस्टर के खिलाफ FIR नहीं दर्ज हो सकी है। मंत्री के रसूख के आगे पूरा सिस्टम बेबस है।

कैबिनेट मंत्री के कोर्ट से भागने के बाद जज ने कैबिनेट मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए किया था आदेश।
कैबिनेट मंत्री के कोर्ट से भागने के बाद जज ने कैबिनेट मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए किया था आदेश।

अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट-3 आलोक यादव (ACMM-3) की तहरीर
“अभियुक्त राकेश सचान अपने अधिवक्ता के साथ कोर्ट पहुंचे। मेरे द्वारा खुले न्यायालय में निर्णय घोषित किए जाने हेतु अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में लेने के लिए कोर्ट मोहर्रिर को आदेश दिया गया। इसके बाद अभियुक्त को दोषी करार दिया गया। अभियुक्त को सजा के बिंदु पर सुना गया। इसके बाद दंड की अवधि निर्धारित करने के लिए और अभियुक्त के खिलाफ यथोचित आदेश पारित करने के लिए अपने अशुलिपिक को आदेश लिखने के लिए न्यायालय से उठकर अपने विश्राम कक्ष में आया। अपने अर्दली को उपयुक्त पत्रावली जिसमें निर्णय भी संलग्न था को विश्राम कक्ष में लाने के लिए मौखिक आदेश दिया।

इस दौरान पेशकार ने मुझे (जज) को बताया कि 739/1901 के अंतर्गत धारा-20, 25 और 30 का अभियुक्त राकेश सचान निर्णय की पत्रावली लेकर न्यायिक अभिरक्षा से फरार हो गया है। इसके चलते दंड की अवधि पर आदेश किया जाना संभव नहीं हो सका। अभियुक्त के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया जाता है। NBW जारी करने के लिए कानपुर पुलिस कमिश्नर को अलग से पत्र जारी किया जाए। न्यायालय में कार्यरत रीडर काे आदेश दिया जाता है कि इस मामले में अभियुक्त के खिलाफ संबंधित थाने में तहरीर देते हुए सुसंगत धाराओं में FIR दर्ज कराना सुनिश्चित करें।”

जज के रीडर की ओर से कोतवाली थाने में राकेश सचान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए 6 अगस्त को दी गई थी तहरीर।
जज के रीडर की ओर से कोतवाली थाने में राकेश सचान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए 6 अगस्त को दी गई थी तहरीर।

आज तक पुलिस जांच भी पूरी नहीं कर सकी
कानपुर जॉइंट पुलिस कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी से इस बारे में बात की गई। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने अपने रीडर को FIR दर्ज कराने का आदेश दिया है। मेरे पास कोर्ट ने कोई सीधे आदेश नहीं दिया है। कोर्ट मोहर्रिर ने कैबिनेट मंत्री राकेश सचान के कोर्ट से भागने के संबंध में एक पत्र दिया था। इसकी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी जाएगी। इसके बाद कोर्ट जो आदेश देगा, वह कार्रवाई की जाएगी।