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राष्ट्रपति बोले- स्वच्छता को जनआंदोलन बनाएं:कानपुर के लोग जो ठान लेते हैं वो करके दिखाते हैं, टॉप- 5 साफ शहर में नाम हो

कानपुर2 महीने पहले

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कानपुर दौरे के दूसरे दिन गुरुवार को हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (HBTU) पहुंचे। यहां उन्होंने कानपुरवासियों से स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने की अपील की। कहा कि- मैं कानपुर के लोगों के स्वभाव को जानता हूं। जो ठान लेते हैं, वह करके रहते हैं। अगले सर्वेक्षण में कानपुर देश के सबसे साफ 5 शहरों में शामिल हों।

कानपुर से जुड़ा होने के कारण मेरी कानपुरवासियों से अपेक्षा भी है। स्वच्छता सर्वेक्षण में यह देखने को मिला कि कानपुर 2016 में 173वें से 21वें स्थान पर पहुंच गया। ये खुशी की बात है, लेकिन संतोष नहीं है। कानपुर के प्रशासनिक अफसरों से अपेक्षा करता हूं कि वे इंदौर सहित देश के अन्य स्वच्छ शहरों की व्यवस्था को जाकर देखें। वहां के अफसरों से तालमेल बैठाकर कानपुर को टॉप-5 साफ शहर बनाने के लिए पहल करें। कचरामुक्त बनाने के लिए जनप्रतिनिधि, अफसर, नागरिक सब मिलकर काम करें।

पूर्व छात्र जरूरतमंद छात्रों की मदद करें

राष्ट्रपति ने कहा कि HBTU में आकर मैं प्रसन्न हूं। कानपुर आता हूं तो मुझे अपने विद्यार्थी जीवन की यादें ताजा हो जाती हैं। मेरा आग्रह है कि पूर्व विद्यार्थी जरूरतमंद छात्रों की मदद करें। बेटियों की भागीदारी तकनीकी शिक्षा में पूरी नहीं है। छात्राओं की संख्या कम है। अब समय की जरूरत है कि तकनीक के क्षेत्र में भी बेटियों को प्रोत्साहन मिले। इससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

BHTU भी अपनी रैंक सुधारे

मुझे बताया गया है कि नेशनल इंस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क में HBTU 166 नंबर पर है। 2047 तक ये देश के टॉप 25 संस्थानों में अपना नाम शामिल कर सकें। आप सबको संकल्पबद्ध होकर काम करना होगा। इससे पहले उन्होंने यूनिवर्सिटी के 100 सालों के सुनहरे सफर को 400 किलो के खास टाइम कैप्सूल में रखकर 10 मीटर नीचे सुरक्षित किया। उनके साथ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद थीं।

संस्थान के इतिहास को संजोने वाला तीसरा कैप्सूल

400 किलो का टाइम कैप्सूल किया गया तैयार।
400 किलो का टाइम कैप्सूल किया गया तैयार।

कानपुर में संस्थान के इतिहास को संजोते हुए ये तीसरा कैप्सूल है, जो धरती के अंदर रखा गया। इससे पहले 2006 में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के शताब्दी वर्ष समारोह में इतिहास को टाइम कैप्सूल में धरती में संजोया गया था। इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने प्रत्यारोपित किया था। इसमें शोध कार्य भी संरक्षित हैं।

शताब्दी स्तंभ में इसे संरक्षित किया जाएगा।
शताब्दी स्तंभ में इसे संरक्षित किया जाएगा।

आईआईटी में टाइम कैप्सूल
इसके बाद ईयर-2010 में आईआईटी कानपुर में गोल्डन जुबली समारोह के मौके पर टाइम कैप्सूल को धरती के अंदर डाला गया था। इसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने प्रत्यारोपित किया था। इसका वजन करीब 2 टन था। इस पर 20 टन वजन के संगमरमर को रखा गया है, जिसे बाड़मेर से मंगवाया गया था। इसमें शोध कार्यों के साथ, मिनी कंप्यूटर, पेन ड्राइव और सीडी भी रखी गई हैं।

इसलिए रखा जाता है टाइम कैप्सूल
टाइम कैप्सूल धरती के अंदर दशकों तक सुरक्षित रह सकते हैं। प्रलय, विनाशकारी भूकंप आदि आने के बाद भी इनमें रखा गया डाटा पूरी तरह सुरक्षित रह सकता है। टाइम कैप्सूल को भविष्य की पीढ़ियों के लिए रखा जाता है, ताकि इससे संस्थान के बारे में जानने में मदद मिल सके।

आईआईटी कानपुर में 2 टन वजनी टाइम कैप्सूल जमीन में दबाया गया है।
आईआईटी कानपुर में 2 टन वजनी टाइम कैप्सूल जमीन में दबाया गया है।

नाइट्रोजन गैस भी डाली गई
कुलसचिव ने बताया कि कैप्सूल में लंबे समय तक डॉक्यूमेंट सुरक्षित रहें, इसके लिए इसमें नाइट्रोजन गैस भी भरी गई। जिस स्तंभ में इसे सुरक्षित किया गया वह साढे़ 3 मीटर चौड़ा और इसकी गोलाई लगभग 12 मीटर है। कैप्सूल को जमीन के अंदर ले जाने के लिए 10 मीटर गहराई तक पाइप लगाया गया है।

400 किलो का है वजन
इस खास कैप्सूल का आउटर सेल बेहद मजबूत है, इसका वजन करीब 300 किलो है और इनर सेल का वजन करीब 100 किलो है। मिट्टी में ये कैप्सूल अपने आप ही जमीन में धंसता जाएगा। मिट्‌टी में जैसे-जैसे नमी बढ़ेगी ये जमीन के नीचे चलता जाएगा।

100 का सिक्का जारी किया
शताब्दी समारोह के मौके पर राष्ट्रपति ने 100 रुपए का सिक्का भी जारी किया। वेस्ट कैंपस और संस्थान के 100 साल इतिहास को दर्शाती पुस्तक का विमोचन भी हुआ। शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में पूर्व छात्र रहे त्रिवेंद्रम में पुलिस कमिश्नर के पद पर कार्यरत व विवि से 1991 में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले बलराम उपाध्याय, बिरला इंस्टीट्यूट आफ साइंटिफिक रिसर्च जयपुर में कार्यकारी निदेशक व एचबीटीयू से वर्ष 1969 में केमिकल टेक्नोलाजी से ग्रेजुएट रहे प्रो. पूर्णेंदु घोष, यूरो-अमेरिकन प्लास्टिक (अमेरिकन कंपनी) के संस्थापक योगेश गोयल भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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