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हैलट में दवाईयों का टोटा माँग के बावजूद मिली दवाइयां:शासन और प्रशासन दोनों सुस्त, पिछले 24 घंटों में हो चुकी है चार मौतें, 26 स्टाफ ट्रान्सफर नही मिले नये कर्मचारी

कानपुर3 महीने पहले
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हैलट अस्पताल - Dainik Bhaskar
हैलट अस्पताल

हैलट और उससे जुड़े अस्पतालों में दवाओं की किल्लत बरक़रार है। दैनिक भास्कर ने अस्पतालों में खत्म हो रही दवाइयों के बारे में हॉस्पिटल प्रशासन को पहले ही चेताया था, उसके बावजूद अब तक प्रशासन जाएगा और नाही शासन। अस्पतालों में करीब एक महीना से यह परेशानी चल रही है। शासन भी इसका कोई हल नहीं निकल पा रहा है और प्रशासन के हाथ में कुछ है नहीं। मेडिकल कॉलेज से अधिक दबाव डालने पर उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन ने पिछली बार सिर्फ सात दवाएं भेजी हैं जबकि मेडिकल कॉलेज ने 60 दवाएं मांगी थी। इस बार भी ऐसा ही कुछ हुआ है। अस्पतालों द्वारा भेजी गयी दवाइयों की लिस्ट में 70 से 75 क्रिटिकल दवाइयां थी जिसमे से सिर्फ 6 दवाइयां ही भेजी है। इसके अलावा हैलट में स्टाफ का क्रंच भी आ गया है। अभी हाल ही में यहां से करीब 26 डॉक्टर्स, नर्स और अन्य मेडिकल स्टाफ का ट्रांसफर किया गया है।

कई जीवन रक्षक इंजेक्शन बाहर से मंगवाने पड़ रहे है...
अस्पतालों के हालात ऐसे हो गए है कि अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर लोकल परचेज पर इंजेक्शन पैरासिटामाल और डेक्सामेथासोन जैसी जीवनरक्षक इंजेक्शन मंगवा रहा है। वह भी अधिकतम एक सप्ताह चल सकेंगे। ऐसे में यहां भर्ती मरीजों का इलाज राम भरोसे ही चल रहा है। हैलट प्रशासन ने दूसरी बार 70 से 75 दवाओं की किल्लत की बात कहकर डिमांड रिक्वेस्ट भेजी थी, मगर मिली सिर्फ 6 दवाएं वो भी जिस मिलीग्राम का इंजेक्शन माँगा था उसका आधा मिला। वहीं जिस मिलीग्राम की टेबलेट मांगी थी वो भी आधी ही मिली, ऐसे में कैसे होगा सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज।

शासन को पत्र लिख अवगत करवाया...
इस बारे में जब हमने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ संजय काला से बात कि तो उन्होंने बताया, हमने दो बार दवाइयों की रिक्वेस्ट भेजी, लेकिन वहां से पूरी दवाइयां एक बार भी नहीं भेजी गई है। आज हमने प्रशासन और शासन को पत्र लिख कर एक बार फिर से दवाइयों की किल्लत के बारे में अवगत करवाया है, देखते है वहां से अब क्या जवाब मिलता है।

स्टाफ बहुत कम है...
डॉ संजय काला ने बताया, अभी हाल ही में हमारे यहां से 26 लोगों का ट्रांसफर हुआ है। इसके बाद से मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में स्टाफ क्रंच हो गया है। कई डॉक्टरों को डबल शिफ्ट में काम करना पड़ रहा है। इसी वजह से हमने ओपीडी की टाइमिंग में भी बदलाव किया है, जो डॉक्टर ओपीडी में 5 से 6 घंटे बैठते थे, उनका समय हमने तीन घंटे कर दिया है, जिससे अस्पताल में भर्ती मरीजों को कोई दिक्कत न हो।

दवाइयों और स्टाफ की किल्लत से तो नहीं हुई चार मौतें...
पिछले 24 घंटे में हैलट अस्पताल में डेंगू और अनजान बुखार से चार मौतें हो चुकी है। जब हमने प्राचार्य से पूछा की कहीं दवाइयों या डॉक्टरों की कमी की वजह से तो नहीं हुई यह मौतें, तो डॉ संजय ने बताया, यह मौते जो हुई है वह लोग काफी सीरियस कंडीशन में हैलट में भर्ती हुए थे, उन चरों मरीजों का इलाज पहले निजी अस्पतालों में चलता रहा, लेकिन जब उनकी हालत बिगड़ी तो निजी अस्पताल वालों ने सभी को हैलट रेफर कर दिया।

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