आईआईटी की पूर्व छात्रा का स्टार्टअप लाया रंग:स्वजल तकनीक से भारत सरकार गाँव, स्कूल, अस्पतालों में सप्लाई करेगी स्वच्छ जल, एमओयू हुआ साइन

कानपुर7 महीने पहले
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पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र का स्टार्टअप रंग लाया है। स्टार्टअप स्वजल की मदद से स्कूलों अस्पतालों सहित रूरल इलाकों में शुद्ध पानी की पूर्ति हो सकेगी। इसके लिए भारत सरकार ने एमओयू साइन कर दिया है। सरकार कंपनी की तकनीक के माध्यम से जल को स्वच्छ कर विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई करेगी।

पिछड़े इलाकों में होगी शुद्ध पेयजल की आपूर्ति

अब गांव, मलिन बस्ती और रूरल इलाकों में भी शुद्ध जल पीने को मिलेगा। शुद्ध जल की पहुंच स्कूल के बच्चों और अस्पतालों तक भी होगी। आईआईटी कानपुर की पूर्व छात्रा डॉ विभा त्रिपाठी के स्टार्टअप स्वजल से से सपना साकार होने को है। वाटर प्यूरीफायर का काम करने वाली कंपनी स्वजल के साथ भारत सरकार ने एमओयू साइन किया है। इसके तहत कंपनी की तकनीक पर सरकार पिछड़े इलाकों तक शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कर आएगी। इस तकनीक की मदद से दूषित पेयजल संबंधित बीमारियों पर लगाम लगेगी। भारत सरकार के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड एवं केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सजल के साथ एमओयू किया।

हर क्षेत्र में मिलने वाले दूषित जल को करेगा प्यूरिफाई

डॉ विभा त्रिपाठी ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई कानपुर से की है। उन्होंने कानपुर आईआईटी से फिजिक्स में पीएचडी किया है। स्टार्टअप की शुरुआत उन्होंने अपने बेटे के साथ की है। डॉक्टर त्रिपाठी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित इनोवेटिव पुरीफिकेशन टेक्नोलॉजी पर आधारित है हर क्षेत्र में मिलने वाले दूषित जल को प्यूरिफाई कर सकता है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर आधारित यह सिस्टम एक जगह बैठकर भी संचालित किया जा सकता है। विभाग इस समझौते के तहत रूरल इलाकों तक शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराएगा।

पानी के लिए लगने वाली भीड़ को देख कर आया विचार

आईआईटी कानपुर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाली पूर्व छात्रा को स्टार्टअप का ख्याल पानी को तरसती भीड़ को देख कर आया। उन्होंने बताया हैदराबाद स्थित अपने घर के पीछे लोग स्वच्छ जल पाने के लिए लाइन लगाते थे। वहीं से उन्हें यह विचार आया कि इस क्षेत्र में कुछ किया जा सकता है। उसके बाद उन्होंने इस पर काम करना शुरू किया और नतीजा सामने है।

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