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कानपुर में 50% विकास कार्य भी पूरे नहीं:शासन ने जारी की विकास कार्यों की रैंकिंग, कानपुर में 43.85 परसेंट विकास कार्य ही पूरे हो सके, प्रदेश में हमीरपुर टॉप तो बरेली दूसरे नंबर पर

कानपुरएक महीने पहले
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कानपुर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में शासन की विभिन्न योजनाओं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होती है। शासन इनकी हर महीने समीक्षा करता है। - Dainik Bhaskar
कानपुर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में शासन की विभिन्न योजनाओं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होती है। शासन इनकी हर महीने समीक्षा करता है।

लापरवाहर अफसर और कर्मचारी कानपुर को विकास की प्रगति पर दौड़ाने में बाधा बन रहे हैं। शासन ने विकास कार्यों की प्रगति के आधार पर रैंकिंग जारी की है, जिसमें कानपुर की प्रदेश में 73 रैंक आई है। ये जुलाई महीने की रैंकिंग है। जून में कानपुर की रैंकिंग 71वीं थी। कानपुर में महज 43.85 परसेंट विकास कार्य पूरे किए जा सके हैं।

टॉप पोजिशन पर हमीरपुर
कानपुर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में शासन की विभिन्न योजनाओं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होती है। शासन इनकी हर महीने समीक्षा करता है और प्रदेश स्तर पर रैंकिंग जारी करता है। शासन स्तर से जारी हुई रैंकिंग में हमीरपुर पूरे प्रदेश में पहले नंबर पर है। यहां पर 91.82 प्रतिशत कार्य पूरे हुए हैं।

फर्रुखाबाद की रैंकिंग सबसे खराब
शासन द्वारा जारी विकास कार्यों की रैंकिंग में फर्रुखाबाद जहां सबसे नीचे पायदान 75वें स्थान पर हैं। वहीं बरेली प्रदेश में दूसरे और सुल्तानुपर तीसरे स्थान पर है। बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मनरेगा विभाग, पंचायती राज विभाग, डीआरडीए विभाग की होती है। विभागीय कार्यों की समीक्षा में कानपुर को मनरेगा विभाग में 60वीं, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग में 50वीं, आवास योजना में जिले को 48वीं रैंक मिली है।

पंचायती राज में सुधार
सीडीओ डा. महेंद्र कुमार ने रैंकिंग को लेकर बताया कि विकास कार्यों की समीक्षा की गई है। तय समय में कार्य पूरे नहीं किए गए, जो खराब रैंकिंग का सबसे बड़ा कारण है। लापरवाह अधिकारियों को चेतावनी देकर कार्य में सुधार कराया जाएगा। जरूरत पड़ी तो कार्रवाई भी की जाएगी। बता दें कि पंचायती राज विभाग में कानपुर को 10वीं रैंक मिली है।

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