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कानपुर में गंगापुल 4 माह के लिए बंद:शुक्लागंज को कानपुर से जोड़ने वाले गंगापुल पर अब भारी वाहन नहीं गुजरेंगे, सिर्फ बाइकें चल पाएंगी

कानपुर2 महीने पहले
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ट्रैफिक के दबाव के कारण पुल में लगी बेल्ट खुलने लगी थी, साथ ही पुल में कई जगहों पर दरारें भी पढ़ गयी थी। - Dainik Bhaskar
ट्रैफिक के दबाव के कारण पुल में लगी बेल्ट खुलने लगी थी, साथ ही पुल में कई जगहों पर दरारें भी पढ़ गयी थी।

शुक्लागंज को कानपुर से जोड़ने वाले नए गंगापुल को अगले चार महीने के लिए रविवार को कैंट की तरफ से बंद कर दिया गया। इस नए पुल को 2018 में अधूरे कामों के बावजूद आम पब्लिक के लिए चालू कर दिया गया था। जिससे शुक्लागंज की तरफ से आने वाले लोगों को काफी आराम हो गया था। इस पुल पर ज्यादा ट्रैफिक और दिन में लगने वाले जाम की वजह से कैंट की तरफ झाड़ी बाबा पड़ाव का काम काफी दिनों से नहीं हो पा रहा था।

पुल को बंद करने से पहले और ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए पहले ही सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक ने कानपुर व उन्नाव डीएम को पत्र लिखकर नए गंगापुल को बंद करने की जानकारी दे दी थी। रविवार को बंद किए गए पुल से सिर्फ दो पहिया वाहन ही निकल पाएंगे। आने वाले दिनों में इस पर भी रोक लग सकती है।

ट्रैफिक के दबाव के बाद खोला था नया पुल
परियोजना प्रबंधक केएन ओझा ने बताया, ट्रेफिक का दबाव बहुत ज्यादा था इसी वजह से यह उल हमने पहले केएचएल दिया था। लेकिन अब इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की तारीख पास आती आ रही है इसी लिए हमने इस पुल को बंद करने के लिए पहले ही पत्र लिख कर उन्नाव और कानपुर के डीएम को इन्फॉर्म कर दिया था। कानपुर से उन्नाव व शुक्लागंज जाने व आने वाले लोगों को अब गंगा बैराज यह जाजमऊ कि तरफ बने पुल का ही इस्तेमाल करना होगा। हालांकि उन्हें पांच से 10 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ेगा।

शुक्लागंज के लोगों के लिए परेशानी
शुक्लगंज के रहने वाले शिवेंद्र सिंह ने बताया कि, जब यह पुल 2018 में तैयार नहीं हुआ था तो इसे खोला ही क्यों गया। इस पुल के बंद हो जाने से लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच कानपुर पहुंचने के लिए 10 से 15 किमी का चक्कर लगाना पड़ेगा।

पुराना पुल पहले ही बंद किया जा चुका है
शुक्लागंज को कानपुर से जोडऩे वाले पुराना गंगापुल को पहले ही अनिश्चितकालीन के लिए बंद कर दिया गया है। आपको बता दें यह पुल ब्रिटिश शासनकाल में बना था और यह तकरीबन 100 साल पुराना है। ट्रैफिक के दबाव के कारण पुल में लगी बेल्ट खुलने लगी थी, साथ ही पुल में कई जगहों पर दरारें भी पढ़ गयी थी, इसी लिए बाउंड्रीवाल लगा कर वाहनों का आना-जाना बंद कराया गया था।