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मोदी सरकार करेगी नमामि गंगे की ग्लोबल ब्रांडिंग:उत्तराखंड से सुंदरबन तक गंगा में आए बदलाव पर बनेगी डॉक्यूमेंट्री, ग्रीन ऑस्कर विनर माइक होंगे होस्ट; सार्क देशों में भी दिखाई जाएगी

कानपुर25 दिन पहले
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केंद्र की मोदी सरकार नमामि गंगे प्रोजेक्ट को ग्लोबल लेवल पर ले जाएगी। इसके लिए उत्तराखंड से वेस्ट बंगाल में सुंदरबन तक गंगा नदी की मौजूदा हालत और पहले की स्थिति को एक डॉक्यूमेंट्री में पिरोया जाएगा। 44 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री में एक तरफ जहां सुंदरबन की जैव विविधता होगी तो उछलकूद करतीं डॉल्फिन भी दिखेंगी। इसके अलावा इंडस्ट्रियल प्रदूषण से बचाने के लिए हुए सीवेज टैपिंग जैसे विकास के काम भी दिखेंगे।

नेशनल जियोग्राफिक की टीम दिसंबर-2021 तक पूरे देश में गंगा किनारे शूटिंग करेगी। इसे देश के साथ ही सार्क देशों में भी दिखाया जाएगा। डॉक्यूमेंट्री के होस्ट तीन बार ग्रीन ऑस्कर अवार्ड जीतने वाले माइक पांडेय होंगे।

एशिया के सबसे बड़े नाले की तस्वीर दिखेगी
नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के डायरेक्टर जनरल राजीव रंजन मिश्रा ने कानपुर डीएम आलोक तिवारी और नगर आयुक्त अक्षय त्रिपाठी को इस बारे में लेटर भेजा है। कानपुर में 128 साल पुराने और एशिया के सबसे बड़े सीसामऊ नाले को टैप करने की स्टोरी को भी इस फिल्म में शामिल किया जाएगा।

इसके लिए सितंबर में टीम आएगी। कानपुर के अलावा वाराणसी, प्रयागराज में शूटिंग की जाएगी। इसमें गंगा किनारे हो रही ऑर्गेनिक फॉर्मिंग, एक्सपर्ट, साइंटिस्ट और आम आदमी की राय को भी डॉक्यूमेंट्री में शामिल किया जाएगा। बता दें कि 2071 किमी. भू-भाग में प्रवाहित होने वाली गंगा नदी का कानपुर में पड़ने वाला हिस्सा सबसे अधिक प्रदूषित माना जाता है।

दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कानपुर पहुंचे थे और नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत हुए बदलाव का जायजा लिया था।
दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कानपुर पहुंचे थे और नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत हुए बदलाव का जायजा लिया था।

ग्रीन ऑस्कर अवॉर्ड विनर करेंगे होस्ट, कई भाषाओं में होगी डब
3 टाइम ग्रीन ऑस्कर और एन्वॉयरमेंट कंर्जेवेशन, वाइल्ड लाइफ फिल्म मेकिंग में कई नेशनल अवार्ड जीतने वाले माइक एच पांडेय इस डॉक्यूमेंट्री को होस्ट करेंगे। माइक पांडे 2004 फिल्म समारोह में प्रतिष्ठित पांडा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जिसे ग्रीन ऑस्कर भी कहा जाता है। पांडे को यह अवार्ड फिल्म 'वैनिशिंग जाइंट्स' के लिए दिया गया था। इससे पहले उन्होंने 'कैप्चर एट सरगुजा' और 'शोर्स ऑफ साइलेंस' के लिए भी ग्रीन ऑस्कर पुरस्कार जीते थे।

डॉक्यूमेंट्री में वे गंगा के मौजूदा हालातों और पहले की स्थिति को भी बताएंगे। इसमें सबसे ज्यादा गंगा की वजह से लोगों के जीवन में आए बदलावों को भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। फिल्म को कई भाषाओं में डब भी किया जाएगा।

माइक एच पांडेय सरगुजा के हाथियों पर बनी शॉर्ट फिल्म ‘द लास्ट माइग्रेशन’ को लेकर चर्चा में आए थे। उन्होंने भारतीय महासागर में जहाजों के कारण प्रति वर्ष मर रहीं 350 से 400 ब्लू व्हेल को लेकर भी रिसर्च फिल्म बनाई थी। वे 3 बार ग्रीन ऑस्कर जीतने वाले एशिया के पहले पर्यावरणविद् हैं।
माइक एच पांडेय सरगुजा के हाथियों पर बनी शॉर्ट फिल्म ‘द लास्ट माइग्रेशन’ को लेकर चर्चा में आए थे। उन्होंने भारतीय महासागर में जहाजों के कारण प्रति वर्ष मर रहीं 350 से 400 ब्लू व्हेल को लेकर भी रिसर्च फिल्म बनाई थी। वे 3 बार ग्रीन ऑस्कर जीतने वाले एशिया के पहले पर्यावरणविद् हैं।

28 करोड़ की लागत से साफ हुआ था नाला
कानपुर में 128 साल पुराना सीसामऊ नाला एशिया में सबसे बड़ा है। अंग्रेजों ने शहर के गंदे पानी की निकासी के लिए इसका निर्माण किया था। करीब 40 मोहल्लों से सीसामऊ नाले से रोजाना 14 करोड़ लीटर प्रदूषित पानी गंगा में गिरता था। दो साल पहले नमामि गंगे परियोजना के तहत 28 करोड़ रुपए की लागत से इसे साफ किया गया। छह नालों को टैप किया गया।

लेकिन हकीकत ये है कि आज भी ये नाले गंगा में आए दिन गिरते हैं। मौजूदा समय में परमिया नाला, सीसामऊ नाले की तरह गंगा में रोजाना करोड़ों लीटर सीवेज प्रवाहित कर रहा है। वहीं, गंगा किनारे स्थित पुराना कानपुर में बस्तियों के किनारे गंदगी का अंबार है। 1 लाख से अधिक लोग बस्तियों में रहते हैं और इनका पूरा सीवेज छोटे-छोट नालों के जरिए गंगा में प्रवाहित होता है।

इन जगहों पर होगी शूटिंग
अल्मोड़ा, रानीखेत, द्वारहाट, नैनीताल, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी, सुंदरबन वेस्ट बंगाल, पटना, भागलपुर, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज।

इन सार्क देशों में दिखाई जाएगी फिल्म
भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और मालदीव।

क्या है नमामि गंगे परियोजना?
गंगा और इसकी सहायक नदियों का प्रदूषण खत्म करने और इन्हें पुनर्जीवित करने के लिए 2014 में केंद्र सरकार ने नमामि गंगे परियोजना शुरू की थी। इसकी जिम्मेदारी केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा कायाकल्प को दी गई है। परियोजना की अवधि 18 साल है। सरकार ने 2020-2021 तक नदी की सफाई पर 20 हजार करोड़ रुपए का बजट तय किया है। इसमें 100 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र की है।

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