गेहूं के दाम 100 रुपए प्रति क्विंटल घटे:कानपुर से दूसरों राज्यों को निर्यात पर लगी रोक, सभी ऑर्डर कैंसिल

कानपुर3 महीने पहले
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केंद्र सरकार के गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने का असर दिखने लगा है। केंद्र का आदेश आते ही थोक बाजार में गेहूं के दाम सौ रुपए प्रति क्विंटल गिर गए। अभी इसके और गिरने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही दूसरे देशों के लिए कानपुर से गेहूं एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी ने सभी ऑर्डर कैंसिल कर दिए हैं। कानपुर से गेहूं निर्यात के लिए जाने वाली रैक के सभी आर्डर निरस्त कर दिए गए हैं l

गेहूं के निर्यात पर अचानक रोक लगने से अगले दस दिन तक बाजार में अस्थिरता का माहौल रहेगा। साथ ही सबसे ज्यादा गेहूं खरीदने वाली भारतीय कंपनियों के शेयर भी गिरेंगे। अब वही कंपनियां गेहूं दूसरे देशों को एक्सपोर्ट कर सकेंगी, जिन्हें बैंकों ने लेटर ऑफ क्रेडिट जारी कर रखा है।

सरकारी खरीद हो रही थी कम

व्यापारी नेता ज्ञानेश मिश्रा ने बताया कि सरकार के गेहूं का निर्यात करने पर रोक लगाते ही इसका असर दिखने लगा हे। शनिवार सुबह ही थोक बाजार में गेहूं सौ रुपए प्रति क्विंटल नीचे आ गया। कल तक यह 22 सौ रुपए प्रति क्विंटल था, आज यह 21 सौ रुपए प्रति क्विंटल हो गया। सरकार ने निर्यात इसलिए बंद किया है, ताकि गेहूं के बढ़ते भाव पर नियंत्रण पाया जा सके l बाजार में किसानों को ज्यादा दाम मिलने से सरकारी खरीद कम हो रही थी।

एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी ने कैंसिल किए ऑर्डर

अब तक कानपुर से रेलवे की पांच रैक दूसरे देशों को गेहूं एक्सपोर्ट करने के लिए रवाना हो चुकी है, लेकिन निर्यात पर प्रतिबंध के बाद कानपुर से जाने वाली एक रैक के आर्डर निरस्त कर दिए गए हैंl निर्यात पर रोक लगने का आदेश आते ही गेहूं एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी ने भी हाथ खड़े कर दिए और गेहूं खरीदने से इनकार करते हुए सारे ऑर्डर कैंसिल कर दिए।

शेयर बाजार पर पड़ेगा असर

निर्यात पर रोक लगने से दस दिन तक खरीद-बिक्री का कारोबार ठंडा रहेगा। उसके बाद व्यापारी समझ पाएंगे कि क्या करना है। अचानक निर्देश आने से बाजार में खरीदारी को लेकर अस्थिरता का माहौल हो गया है। इसके अलावा सबसे ज्यादा गेहूं खरीदने वाली भारतीय कंपनियों आईटीसी, कारगिल इंडिया और अडाणी ग्रुप पर भी असर पड़ेगा। जानकारों का कहना है कि खाद्य पदार्थ खरीदने वाली भारतीय कंपनियों के शेयर गिरेंगे।

केंद्र ने तत्काल प्रभाव से लगाया बैन

बता दें कि गेहूं की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने शनिवार को इसके निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। गेहूं को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि देश की खाद्य सुरक्षा के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। साथ ही, पड़ोसी और गरीब देशों को समर्थन करने के लिए भी ऐसा करना जरूरी था। केंद्र के निर्देश के मुताबिक जिन देशों को निर्यात के लिए बैंको द्वारा लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किया जा चुका है, उनका निर्यात जारी रहेगा। यह अधिसूचना डीजीएफटी ने जारी की है।

अभी और घटेंगे गेहूं के दाम

व्यापारी नेता ज्ञानेश ने बताया कि दूसरे देशों में निर्यात की वजह से सरकार को गेहूं नहीं मिल पा रहा था। किसान गेहूं बेचने सरकारी मंडियो में नहीं जा रहे थे। इस कारण भी इसके दामों में उछाल हो रहा था। एक माह में शहर में थोक बाजार में गेहूं के दाम करीब दो सौ रुपए प्रति क्विंटल बढ़े थे। अब निर्यात पर रोक लग गई है, इस वजह से इसके दाम अब घटने लगेंगे।

बांग्लादेश को हर माह 18 हजार टन गेहूं निर्यात,

चीन के बाद भारत ऐसा दूसरा सबसे बड़ा देश है जो गेहूं का उत्पादक है। ब्लूमबर्ग सर्वे के अनुसार, वर्ष 2022-23 में भारत के पास निर्यात करने लायक 12 मिलियन टन गेहूं है। अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में भारत ने 8.5 मिलियन टन गेहूं का निर्यात किया था। बता दें कि भारत सबसे ज्यादा गेहूं पड़ोसी देश बांग्लादेश को निर्यात करता है। वहां के लिए हर माह 18 हजार टन गेहूं जाता है।

इन देशों में निर्यात होता है भारत का गेहूं

रूस, यूक्रेन और मिश्र को भी भारत से ही गेहूं निर्यात होता है। इसके साथ ही भारत पड़ोसी देशों के अलावा अब अफ्रीका और मिडल ईस्ट रीजन में भी गेहूं निर्यात करता है। इसके साथ ही चीन, तुर्की, बोसनिया, सूडान, नाइजीरिया और ईरान भी गेहूं लेने के लिए भारत से बातचीत कर रहे हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बढ़ा निर्यात

बता दें कि रूस-यूक्रेन जंग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गेहूं की कीमत में 40 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है जिससे भारत में गेहूं का निर्यात बढ़ा है। इसके अनुरूप घरेलू स्तर पर मांग बढऩे के बीच गेहूं और इसके आटे के दाम भी काफ़ी ज्यादा बढ़ रहे थे । एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले आटे की कीमत में अब तक करीब 13 फीसदी की तेजी आ चुकी है।

प्याज प्रतिबंधित श्रेणी से बाहर

डीजीएफटी ने एक दूसरी अधिसूचना में जानकारी दी है कि प्याज के बीज की निर्यात नीति में भी बदलाव किया गया है। इसे तत्काल प्रभाव से सीमित श्रेणी के तहत रखा गया है। इससे पहले प्याज के बीज का निर्यात भी प्रतिबंधित श्रेणी में था।

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