कानपुर का बिकरू गांव: लगभग साल भर बाद:गैंगस्टर विकास दुबे के साथ गांव से गुलामी, आतंक और अत्याचार का भी अंत; लोगों ने 30 साल बाद चुनी अपनी सरकार

कानपुर4 महीने पहलेलेखक: प्रमोद कुमार त्रिवेदी
  • कॉपी लिंक

उत्तर प्रदेश में कानपुर जिले के बिकरू गांव में करीबन साल भर पहले 3 जुलाई की रात को यूपी पुलिस और हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की गैंग के बीच घंटों गोलियां चलीं थीं। इस गोलीकांड में पुलिस के आठ जवानों की मौत हो गई थी। हालांकि, इस घटना के कुछ ही दिन बाद 9 जुलाई को विकास भी पुलिस के एनकाउंटर में मारा गया था। विकास के खात्मे के साथ ही बिकरू में आतंक और अत्याचार का भी अंत हो गया था। विकास दुबे की मौत के बाद उसके गांव में 3 दशकों बाद लोकतंत्र का उत्सव मना और लोगों ने दिल खोलकर पंचायत चुनाव में सहभागिता की। स्थानीय लोग बताते हैं कि गांव में ऐसा पहली बार हो रहा है जब गांव के प्रधान ने पंचों की सहमति से 9 जुलाई को पहली बैठक बुलाई है।

पिछले साल 9 जुलाई को विकास के खात्मे के बाद बीते एक साल में बिकरू में क्या बदलाव हुआ? पंचायत चुनाव के बाद लोगों ने मतदान में किस तरह हिस्सा लिया, यहां चुनी गई सरकार को लेकर लोगों का क्या कहना है, इसके साथ ही भास्कर ने भूमिगत होकर रह रहे फरियादी राहुल तिवारी को भी खोजा और उनसे बात की।

यह तस्वीर विकास दुबे के गांव बिकरू की है। यहां लोग गांव की सरकार चुनने के बाद से ही बड़े खुश हैं।
यह तस्वीर विकास दुबे के गांव बिकरू की है। यहां लोग गांव की सरकार चुनने के बाद से ही बड़े खुश हैं।

30 साल बाद मना लोकतंत्र का उत्सव
बिकरू गांव में सड़क के एक तरफ अधिकांशत: ब्राह्मणों के घर हैं तो दूसरी तरफ अन्य जातियां रहती हैं। हम दूसरी तरफ के हिस्से में पहुंचे तो 60 साल के विश्वनाथ मिले। विश्वनाथ ने बताया कि 1990 के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि प्रधान के चुनाव में 10 उम्मीदवार खड़े हुए थे, वरना विकास दुबे के डर से कोई पर्चा नहीं भर सकता था। पहली बार वोट देकर हमने अपना प्रधान संजय कोरी को बनाया है। प्रधान ही नहीं जिला-जनपद के चुनाव में भी विकास दुबे की मर्जी से वोट पड़ते थे। वह खड़े होकर वोट डलवाता था।

विश्वनाथ याद करते हुए बताते हैं, कि 1990 में विकास दुबे के परिवार से प्रधान बना। 1995 में वो खुद प्रधान बन गया। इसके बाद से लेकर उसके ही लोग प्रधान बनते गए। आखिरी बार अंजलि दूबे प्रधान थीं जो विकास के छोटे भाई की पत्नी है। विकास के एनकाउंटर के बाद उसे पद से हटा दिया गया था। इस बार वार्ड क्रमांक एक से सदस्य अमित कुमार बने हैं।

यह तस्वीर बिकरू गांव की है। अब दूसरे गांवों की तरह यहां भी लोगों की चहल-पहल दिखाई देती है।
यह तस्वीर बिकरू गांव की है। अब दूसरे गांवों की तरह यहां भी लोगों की चहल-पहल दिखाई देती है।

एक महीने का राशन उसके गुर्गे खा जाते थे

अमित बताते हैं कि जब विकास था तो एक महीने का राशन उसके गुर्गे खा जाते थे। एक महीने राशन देता था और दूसरे महीने एक लड़का आकर अंगूठा लगवाकर ले जाता था। ऐसे ही मकान के सवा लाख में से केवल 40 हजार देता था। 40 हजार भी नगद न देकर केवल बजरी-ईंट-सीमेंट देता था। मजे केवल उसके मोहल्ले के लोग करते थे। उसके मरने के बाद से सुकून है। शिकायत करने की बात पर कहते हैं कि वो तो पुलिस वालों की भी पिटाई लगा देता था। बोरा में भरकर नीम के पेड़ से बांधकर पिटाई लगाता था। कौन लड़ सकता था?

पंचों को बैठक में आने से रोकते हैं विकास के रिश्तेदार

अमित आरोप लगाते हैं कि अभी विकास के सब गुर्गे भले ही जेल में गए, लेकिन उसका रिश्तेदार अनुराग दुबे है जो पंचों को मीटिंग में नहीं आने देता। इससे पंचायत की समिति ही नहीं बना पा रहे हैं। अब वह नया विकास दूबे बनना चाहता है।

अमित की बात का समर्थन करते हुए गांव के अजय कहते हैं-पहले विकास ही निर्णय करता था कि हमें कहां काम करना है? एक साल से कोरोना के कारण भले ही काम कम मिला हो लेकिन हम आजाद हैं। अपनी मर्जी से जी सकते हैं। जब चाहें शहर जा सकते हैं और कचहरी में अपने काम करवाने जा सकते हैं वरना विकास के घर से आगे हम कहीं नहीं जा सकते थे।

आज भी लोगों के दिलों में है एनकाउंटर का खौफ

विकास दुबे के पड़ोसियों के पास पहुंचे तो कुछ विकास दूबे के भूत होने का कहकर मजाक उड़ा रहे थे तो कुछ मायूस बैठे थे। मायूस वो लोग थे जो विकास के दम पर रंगदारी करते थे या जिनके लोग विकास के गुर्गे होने से अब जेल में हैं। एनकाउंटर में मारे गए प्रभात की दादी देखते ही कहने लगी-मेरे नाती को मरवाकर भी सब्र नहीं हुआ। फिर आ गए हमें मारने।

लोगों ने बताया कि ये लोग विकास के आदमी नहीं हैं तब वो शांत हुईं। विकास के पड़ोसी राजेश बाजपेयी बताते हैं विकास ने गांव का विनाश कर दिया। इतने तो किसी गांव में नहीं मरे, जितने यहां मर गए या जेल चले गए। 36 लड़के जेल में बंद हैं। कई के घर में तो खेत संभालने वाला मर्द ही घर में नहीं बचा। पूरे साल में एक भी लड़के की शादी नहीं हुई। जो बचे वो शहर भाग गए हैं।

रामू-श्यामू की मां राजलक्ष्मी बताती है कि उसके दोनों बेटे और देवर जेल में हैं। हेमराज राजपूत प्रधानी को लेकर कहते हैं कि मजाल क्या थी कि कोई विकास के फैसले में अंगुली उठा दे। राजनारायण वर्मा और रमेश सिंह कहते हैं कि कुछ सालों में बिकरू गांव खंडहर बन जाएगा। जो मर गए वो तो ठीक हैं लेकिन जो जिंदा हैं. वो ज्यादा बर्बाद कर रहे हैं। वकीलों को रुपया देने में जमीन-जायदाद बिक रही है। विनोद वर्मा कहते हैं कि विकास होता तो सबको तुरंत छुड़ा लाता।

यह तस्वीर हिस्ट्रीशीटर विकास दूबे के घर की है जिसे पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया था।
यह तस्वीर हिस्ट्रीशीटर विकास दूबे के घर की है जिसे पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया था।

विकास का बेटा विदेश गया, हत्याकांड के बाद कोई गांव में नहीं दिखा
विकास के पड़ोसी भोलाराम जैसे कई लोग बताते हैं कि विकास की पत्नी तो गांव आती ही नहीं थी। उसके बच्चे भी गांव से दूर ही रहते थे, लेकिन मां-बाप भी लखनऊ वाले घर चले गए हैं। एमबीबीएस कर रहा बेटा भी वापस विदेश चला गया है। हत्याकांड के बाद से विकास के परिवार या नजदीकी रिश्तेदारों में से कोई भी गांव नहीं आया है। कभी-कभार पुलिस की गाड़ी राउंड लगाकर चली जाती है। आसपास के गांव में जो भी विकास समर्थक थे, केस के बाद गांव की तरफ फटके भी नहीं हैं।

जिस जमीन के लिए लड़ाई थी वो एक साल बाद भी नहीं मिली
विकास दुबे के खिलाफ जिस शिकायत पर पुलिस बिकरू पहुंची थी और विकास ने गोलियां चलाई उसके शिकायतकर्ता राहुल तिवारी पिछले एक साल से भूमिगत हैं। राहुल तिवारी का पता मालुम करते हुए हम जादेपुर गांव पहुंचे तो पता चला कि वो गांव में नहीं हैं। जानकारी लेने पर पता चला कि वो सुबह मिल सकते हैं। सुबह के समय पहुंचे तो राहुल तिवारी मिलने के लिए तैयार हुए। अभी भी उनके चेहरे पर डर साफ झलक रहा था।

राहुल तिवारी को प्रशासन ने सुरक्षा के लिए एक जवान दिया है। एकलौता जवान घर पर ही रहे, इसलिए राहुल ने उस जवान के रहने खाने का इंतजाम अपने घर के एक कमरे में ही कर दिया है। एक जवान से 24 घंटे राहुल की सुरक्षा किस तरह हाे पाती है तो राहुल पत्नी बोली कि इसीलिए तो हम छिपकर रहते हैं। न किसी के कार्यक्रम में जाते हैं और न ही रिश्तेदारी में। कहते हैं कि जब सुरक्षा बढ़ाने की बात करता हूं तब पुलिस के लोग कहते हैं कि चार पहिया खरीद लोगे तो सुरक्षा बढ़ जाएगी।

खबरें और भी हैं...