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मौत के आंकड़ों में घोटाला:कानपुर के हैलट अस्पताल का मामला; स्वास्थ्य विभाग ने कहा- 500 मौतें हुईं, हैलट के पोर्टल पर महज 340 दर्ज

कानपुर2 महीने पहले
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कोरोना काल में मौत के आंकड़ों में घोटाला जारी है। ऐसा ही एक मामला कानपुर के सबसे बड़े हॉस्पिटल लाल लाजपत राय (हैलट) का है। यहां स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अप्रैल और मई में करीब 500 मौतें हैलट अस्पताल में हुई हैं। लेकिन अस्पताल के पोर्टल पर महज 340 मौतें दर्ज की गई हैं। यानी 160 मौतों के आंकड़ों को छिपाया जा रहा है।

कई दिनों तक मृतकों के आंकड़े उपलब्ध नहीं कराने पर CMO को रिपोर्ट करने वाली डेटा टीम ने इस बारे में लगातार 7 पत्र हॉस्पिटल को लिखे हैं। इसके बाद भी हैलट प्रशासन मौत के आंकड़ों को नहीं बता रहा है। हैलट से मृतक प्रमाण पत्र नहीं मिलने से तमाम परिजन चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

दैनिक भास्कर के पास हैं पत्र

दैनिक भास्कर को ऐसे कई पत्र मिले हैं, जिनमें हैलट प्रशासन से मरने वालों की लिस्ट मांगी गई है। इससे साफ है कि हैलट प्रशासन मरीजों की मौत पर पर्दा डालने का काम कर रहा है। कोरोना के पीक में हैलट में एक दिन में सबसे ज्यादा 18 मौतें हुई हैं।

मौत के आंकड़े बने रहस्य

हैलट में कुल कितने मरीजों की मौत हुई है? यह बात अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। हैलट प्रशासन के रजिस्टर में आने वाले मरीज और डिस्चार्ज होने वाले मरीजों का रिकॉर्ड तो है, लेकिन कितने मरीजों की मौत हुई इसकी जानकारी हैलट अस्पताल प्रशासन नहीं दे रहा है।

मई में जारी पत्रों का विवरण

डेटा डेस्क ने 20 मई तक 6 पत्र जारी कर हैलट प्रशासन से मृतकों की संख्या पूछी है। पहला पत्र 3 मई को जारी किया गया था, उसके बाद 7 मई को जारी लेटर में भी डिटेल मांगी गई। फिर 10-13 और 15 मई को मृतक मरीजों की संख्या मांगी गई। इस पर भी मृतक मरीजों की संख्या नहीं देने पर 20 मई को दो पत्र जारी किए गए। अभी भी हर रोज हैलट में मृतकों के परिजन लगातार डेथ सर्टिफिकेट के लिए चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

मृतक की पत्नी से कह दिया- आपके पति यहां भर्ती नहीं हुए थे
कल्यानपुर की वंदना का आरोप है कि उनके पति विवेक 17 अप्रैल को हैलट अस्पताल के कोरोना वार्ड में सुबह 10 बजे भर्ती हुए थे। उन्होंने हैलट का पर्चा बनवाकर इलाज भी शुरू करवा दिया था।डाॅक्टर अच्छे से इलाज भी कर रहे थे, लेकिन हालात ज्यादा गंभीर होने के कारण उनके पति की मौत हो गई। जब वह हैलट में पति के मौत का प्रमाणपत्र लेने गई तो उनको बताया गया कि हैलट अस्पताल में उनके एडमिट होने का कोई प्रमाण नहीं है। उनके पति यहां भर्ती ही नहीं हुए थे। डाॅक्टर की रिपोर्ट नहीं लगने के कारण नगर निगम से डेथ सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहा है।

परिजन अब RTI लगाकर जवाब मांगने के लिए मजबूर
कई मृतकों के परिजन अब RTI के तहत जानकारी मांग रहे हैं। जबकि कई परिजन लगातार चक्कर लगा रहे हैं, फिर भी उनको हैलट अस्पताल से लिखा-पढ़ी में मौत के कारणों का जवाब नहीं मिल पा रहा है। फतेहपुर के रहने वाले अधिवक्ता योगेंद्र बताते हैं कि वह हैलट में अपने पिता की मौत के बाद कोरोना पॉजिटिव का सर्टिफिकेट लेने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। 19 अप्रैल को उनके पिता गया प्रसाद भर्ती हुए थे और उनकी मौत 22 अप्रैल को जो गई थी। कई दिनों बाद मजबूरी में उन्होंने RTI के तहत हैलट प्रशासन से जवाब मांगा है। दोनों मामलों में GSVM के प्राचार्य डॉ आरबी कमल कहते हैं कि मामले उनके संज्ञान में नहीं हैं, मालूम करके समाधान किया जाएगा।

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