कानपुर...393 करोड़ के भ्रष्टाचार में 24 इंजीनियरों पर केस:छह साल चली जांच में 26 दोषी मिले, दो की हो चुकी मौत, 16 रिटायर हुए, पूरे शहर में बिछाई थी घटिया पाइप लाइन

कानपुर3 महीने पहले

कानपुर शहर में पानी की समस्या के निजात के लिए छह साल पहले बिछाई गई पाइपें बेहद घटिया थीं। जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत हुए फेज-एक के इस काम में 393 करोड़ रुपए की बंदरबांट की गई। करीब छह साल चली जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद जल निगम के परियोजना प्रबंधक बैराज इकाई शमीम अख्तर ने शनिवार देर रात फजलगंज थाने में 24 इंजीनियरों पर एफआईआर दर्ज कराई।

जांच में 26 इंजीनियर दोषी पाए गए थे। लेकिन दो की मौत हो चुकी है। जबकि 16 रिटायर हो चुके हैं। शहर में बिछाई गई घटिया पेयजल पाइप लाइन और इसमें बड़े पैमाने पर किए गए भ्रष्टाचार के मामले में सभी को आरोपी बनाया गया है। आरोपितों में मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, परियोजना प्रबंधक और परियोजना अभियंता, सहायक परियोजना अभियंता स्तर के अभियंता शामिल हैं।

साल 2007 में शुरू हुआ था फेज-एक का काम

साल 2007 में योजना के तहत फेज-1(इनर ओल्ड एरिया) के तहत गंगा बैराज से कंपनी बाग के बीच 2100 व्यास की पीएससी लाइप लाइन (प्री स्ट्रेस्ड कंक्रीट पाइप) डाली गई थी। इसके अलावा कंपनी बाग से फूलबाग और कंपनी बाग से बारादेवी मंदिर गेट तक जीआरपी पाइप (ग्लास रेनफोर्स्ड प्लास्टिक) डाली गई। तहरीर के मुताबिक इस परियोजना के तहत प्रारंभ में उच्च गुणवत्ता की पीएसपी पाइप का प्रविधान था, मगर आपूर्ति न होने का तर्क देते हुए इसमें बदलाव कर दिया गया। खास बात यह कि अधिकारियों ने यह कार्य बिना उच्चाधिकारियों की अनुमति के ही शुरू कर दिया।

कानपुर में आए दिन सड़क पर पेयजल सप्लाई की पाइप लाइन टूटती है, जिससे रोड पर पानी का जमाव होता है।
कानपुर में आए दिन सड़क पर पेयजल सप्लाई की पाइप लाइन टूटती है, जिससे रोड पर पानी का जमाव होता है।

जांच में खुला खेल
2015 में जब यह काम पूरा हुआ तो जगह-जगह पाइपें फूटने लगीं तो शिकायत शुरू हुई। जब पाइप लाइन में लगातार लीकेज की जांच की गई तो पाया गया कि जीआरपी पाइप भी मानक के अनुरूप नहीं थे। माना गया है कि अभियंताओं के भ्रष्टाचार के चलते एक ऐसा लगातार हो रहा है।

इन अभियंताओं पर एफआईआर
एसके अवस्थी, एसके गुप्ता, पीसी शुक्ला और एसके गुप्ता (सभी तत्कालीन परियोजना प्रबंधक हैं और सेवानिवृत्त हो चुके हैं)
रामसेवक शुक्ला व वाईके जैन (दोनों तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सेवानिवृत्त)
सूरजपाल व सैय्यद रहमत उल्ला (दोनों तत्कालीन मुख्य अभियंता, सेवानिवृत्त)
राकेश कुमार चौधरी (कार्यवाहक अधीक्षण अभियंता, तत्कालीन परियोजना प्रबंधक निर्माण इकाई)
डीएन नोटियाल, एसएस तिवारी, लक्ष्मण प्रसाद, विकास गुप्ता, एमएस खान, अमीरुल हसन, पीके शर्मा (सभी तत्कालीन परियोजना अभियंता और सभी सेवानिवृत्त हैं)
दीपक कुमार, मयंक मिश्रा, लालजीत (सभी परियोजना अभियंता, बैराज इकाई)
दिनेश चंद्र शर्मा (तत्कालीन सहायक परियोजना अभियंता, सेवानिवृत्त)
आरके वर्मा, सतवंत सिंह, विपुल ओमरे, सुरेंद्र कुमार (सभी तत्कालीन सहायक परियोजना अभियंता, बैराज इकाई)

इनका हो चुका देहांत
सैय्यद रहमत उल्ला (तत्कालीन मुख्य अभियंता, सेवानिवृत्त)
एमएस खान (तत्कालीन सहायक परियोजना अभियंता, सेवानिवृत्त)

इन कार्यों की हुई जांच
नवाबगंज, विष्णुपुरी, स्वरूप नगर, बेनाझाबर, ब्रह्मानगर, रामबाग, बेकनगंज, हालसी रोड, राजीव पार्क, जूही, प्रेमनगर, गीतानगर, पांडुनगर, निराला नगर, पीली बिल्डिंग, स्लाटर हाउस, गड़रियन पुरवा, दर्शनपुरवा, लाजपत नगर, चुन्नीगंज, गणेश उद्यान, फूलबाग, कर्नलगंज, ऊंचा पार्क, बाबूपुरवा, भैरोघाट, किदवई नगर, अजीतगंज, कौशिक पार्क, रायपुरवा गांधी पार्क, शास्त्री पार्क, जूही एवं गोविंद नगर व चीना पार्क आदि जगहों पर बनाए गए जोनल पंपिंग स्टेशन व पाइप लाइन।

कानपुर के माल रोड पर टूटी पाइपलाइन से उठता फौव्वारा।
कानपुर के माल रोड पर टूटी पाइपलाइन से उठता फौव्वारा।

393.93 करोड़ से फेज-एक में ये हुआ काम

  • 20 करोड़ लीटर का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट गंगा बैराज
  • 40 करोड़ लीटर पंप हाउस
  • 51 किमी मुख्य पाइपलाइन
  • 76 जोनल पंपिंग स्टेशन,
  • 700 किमी पाइप आपूर्ति के लिए

फेज-2 का काम चल रहा है

  • लागत- 475.15 करोड़ रुपए
  • 40 करोड़ लीटर पंप हाउस
  • 20 करोड़ लीटर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
  • 65 किमी मुख्य पाइपलाइन
  • 38 जोनल पंपिंग स्टेशन
  • 957 किमी पाइप लाइन आपूर्ति के लिए
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