वैक्सीन महाअभियान का लक्ष्य आज भी पूरा नहीं:लोगों के स्लॉट बुक लेकिन वैक्सीनेशन सेंटर पर वैक्सीन नहीं, युवाओं में कम होता जा रहा है वैक्सीन को लेकर उत्साह

कानपुरएक वर्ष पहले
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वैक्सीनेशन सेंटर के बाहर लगी ल - Dainik Bhaskar
वैक्सीनेशन सेंटर के बाहर लगी ल

पूरे प्रदेश भर में वैक्सीनेशन अब भी चल रहा है, खूब जोर-शोर से। रोजाना लाखों लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है यह दावा है कि हम वैक्सीनेशन के मामले में अमेरिका से भी आगे निकल चुके हैं। लेकिन असलियत में ऐसा नहीं है। मंगलवार को शहर मे 21000 लोगों का वैक्सीनेशन होना था लेकिन वैक्सीन के लिए जगह जगह लोगों को तरसना पड़ा। कहीं सेकंड डोज नहीं लगी तो कहीं पहली डोज के लिए घंटों इंतज़ार करना पड़ा। सीनियर सिटीजन को भी भटकना पड़ा।

दो बार लौट चुका हूं...
गोविंदनगर के जागेश्वर अस्पताल में वैक्सीन लगवाने पहुँचे कोयलानगर निवासी 48 वर्षीय सुरेश चंद्र व उनकी 45 साल की पत्नी अनीता बिना वैक्सीन लगवाए ही वापस लौटना पड़ा। इतनी दूर से वैक्सीन लगवाने आए निराश होकर लौटते सुरेश सामने लगे 'धन्यवाद मोदी जी' के पोस्टर को निहार रहे थे। उनके साथ उनकी दो छोटी बच्चियां भी थीं। उन्होने बताया सोमवार को जब मैं यहां आया था तब मुझे मंगलवार को आने को कहा गया लेकिन आज भी यहां सिर्फ आश्वासन दिया गया कि जल्द वैक्सीन की डोज आपको लगाई जाएगी लेकिन तारीख नहीं बताई। ऐसे में स्लॉट बुक करने का क्या फायदा।

सुरेश चंद्र व उनकी पत्नी अनीता वैक्सीनेशन सेंटर के बाहर मायूस खड़े
सुरेश चंद्र व उनकी पत्नी अनीता वैक्सीनेशन सेंटर के बाहर मायूस खड़े

सेल्फी लेंगे और सोशल मीडिया में डालकर
गोविंद नगर के रहने वाले 32 साल के दीपक अरोड़ा पत्नी 25 वर्षीय सपना अरोड़ा के साथ वैक्सीन लगवाने गए थे। पत्नी-पत्नी दोनो चश्मा लगाए थे। कारण पूछने पर कहते हैं कि हमने सोचा था कि वैक्सीन लगवाते हुए सेल्फी लेंगे और सोशल मीडिया में डालकर औरों को भी जागरूक करेंगे, लेकिन यहां आकर बताया गया कि वैक्सीन खत्म। हम लोगों ने एक हफ्ते पहले ही यहां का स्लॉट बुक किया था, फिर भी वैक्सीन नहीं लगी। अब शायद हम लोगों को दूसरे जिले में ही वैक्सीन लगवानी पड़ेगी।

वैक्सीन न मिलने पर लोगों को समझाता मेडिकल स्टाफ
वैक्सीन न मिलने पर लोगों को समझाता मेडिकल स्टाफ

आईआईटी का सेंटर बहुत दूर है....
लाल बंगला के रहने वाले रतन चोपड़ा ने बताया, हमारे घर के सामने ही वैक्सीनेशन सेंटर बना है। आए दिन हम लोगों को यहां हँगामा करते देखते है। बुधवार को कई लोगों ने बताया कि आईआईटी के सेंटरों में काफी वैक्सीन बच जाती है इसका मुख्य कारण यह है कि वैक्सीन ऐसे सेंटरों में ज्यादा भेजी जा रही है जहां एक आम आदमी आसानी से नहीं पहुच सकता। आईआईटी का कॅम्पस शहर के बाहर बना है और वहाँ पहुचने के लिए तीन बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट बदलना पड़ता है। इसके अलावा वहां पहुचने के बाद तीन से चार जगह सेक्युर्टी चेक बना है जिस वजह से लोग ऐसी जगहों पर जाने से कतराते है।

महाअभियान का लक्ष्य एक भी दिन पूरा नहीं हुआ....
शासन और प्रशासन जितनी भी कोशिश कर ले लेकिन एक भी दिन महाअभियान का लक्ष्य पूरा नहीं कर सके है। सोमवार को 25 हज़ार का लक्ष्य था वो पूरा नहीं कर पाए और लोगों को कई जगह हंगामा करना पड़ा। इसी तरह पिछले हफ्ते भी पूरे शहर भर से वैक्सीनेशन सेंटरों से हंगामा कि खबर आती रही लेकिन तब भी प्रशासन और शासन नहीं जागा है।

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