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कानपुर... रामायण काल का एतिहासिक देवी मंदिर:लव और कुश का मुंडन और कर्ण छेदन संस्कार मां सीता ने यहां कराया, मां सीता ने की तपस्या तो नाम पड़ा तपेश्वरी देवी मंदिर

कानपुर10 दिन पहले
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पुराणों के मुताबिक मां सीता को तपस्या करते देख उनके साथ 4 देवियों ने भी पूजा-अर्चना की थी। देवियों के तप के कारण ही इस मंदिर का नाम तपेश्वरी मंदिर पड़ा। - Dainik Bhaskar
पुराणों के मुताबिक मां सीता को तपस्या करते देख उनके साथ 4 देवियों ने भी पूजा-अर्चना की थी। देवियों के तप के कारण ही इस मंदिर का नाम तपेश्वरी मंदिर पड़ा।

कानपुर में एक ऐसा मंदिर भी जो रामायण काल से जुड़ा हुआ है। शारदीय नवरात्र शुरू होते ही तपेश्वरी देवी मंदिर में कोविड प्रोटोकॉल के तहत दर्शन कराए जा रहे हैं। यहां नवरात्र के छठवें दिन से भव्य आयोजन शुरू होते हैं। पुराणों के मुताबिक यहां मां सीता ने अपने पुत्र लव और कुश का मुंडन संस्कार कराया था। मां ने यहां पुत्र की कामना के लिए तप किया था।

ये है मंदिर का इतिहास
पुराणों के मुताबिक जब लंका पर विजय के बाद भगवान राम अयोध्या पहुंचे तो धोबी के ताना मारने पर मां सीता को उन्होंने त्याग दिया था। लक्ष्मण जी जानकी जी को लेकर ब्रह्मावर्त स्थित वाल्मीकि आश्रम के पास छोड़ गए थे। आज जहां तपेश्वरी माता मंदिर स्थित है तब वहां घना जंगल था और मां गंगा वहीं से बहती थीं।

सीता जी ने तब यहां पुत्र की कामना के लिए तप किया था। भगवती सीता के तप से ही तपेश्वरी माता का प्राकट्य हुआ था। लव कुश के जन्म के बाद सीता जी ने मां के समक्ष ही दोनों पुत्रों का मुंडन और कर्ण छेदन कराया था।

तपेश्वरी देवी मंदिर में कराया जा रहा है कोविड प्रोटोकॉल का पालन।
तपेश्वरी देवी मंदिर में कराया जा रहा है कोविड प्रोटोकॉल का पालन।

नहीं चढ़ाया जा रहा प्रसाद
कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराने के लिए इस बार मंदिर में प्रसाद नहीं चढ़ाया जा रहा है। हर भक्त हाथों में प्रसाद चुनरी व जय माता दी के जयकारों के साथ माता के दरबार तक पहुंचता दिखाई देता है। मंदिर के पुजारी राम लखन ने बताया की बीते कई वर्षों से नवरात्रि में 251 दिए की देशी घी की अखंड ज्योति माता के समक्ष जलाई जा रही है, श्रद्धा अनुसार जो भी भक्त अखंड ज्योति में घी चढ़ावा चढ़ाते हैं।

सदियों पहले मिला मठ
पुराणों के मुताबिक मां सीता को तपस्या करते देख उनके साथ 4 देवियों ने भी पूजा-अर्चना की थी। देवियों के तप के कारण ही इस मंदिर का नाम तपेश्वरी मंदिर पड़ा। मान्यता है कि सैकड़ों साल पहले मां सीता कानपुर के बिठूर में ठहरी थीं। माता सीता बिठूर से आकर इस मंदिर में तप करती थीं।

तपेश्वरी देवी मंदिर का गर्भ गृह।
तपेश्वरी देवी मंदिर का गर्भ गृह।

मंदिर में महिलाएं ज्यादा आती हैं
मंदिर में एक मठ भी निकला जिसको माता सीता के नाम से जाना जाता है यहां आकर हाजिरी लगाएं तो उनकी मुराद मातारानी की कृपा से पूरी हो जाती है। इसके चलते इस मंदिर पर पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की उपस्थित अधिक होती है। महिलाएं देवियों से संतान की प्राप्ति के लिए कामना करती हैं। कामना पूरी होने पर यहीं पर मुंडन कराया जाता है।

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