कुरीतियों का तर्पण कर बेटियों ने किया पितृ विसर्जन:पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई की पौत्री सहित विधायक हुई शामिल

कानपुर11 दिन पहले
महिलाओं ने अपने पूर्वजों और मृत परिवार जनों की आत्मा की शांति के लिए किया पितृ विसर्जन और पिंडदान

पितरो को पानी देने के लिए कानपुर में महिलाये सामने आई। गंगा किनारे सरसैया घाट में कई महिलाओं ने पूर्वजों के लिए तर्पण किया। बकायदा मंत्रोंच्चारण के बीच मृतक परिवारीजनों को और पूर्वजों के लिए पिंडदान किया गया। इस कार्यक्रम में कोख में मार दी गई अजन्मी बेटियों के लिए भी तर्पण किया।

इस धार्मिक अनुष्ठान में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई की पौत्री नंदिता मिश्रा ने उनके लिए तर्पण और पिंडदान किया। इस कार्यक्रम का आयोजन युग दधीचि देह दान संस्था आयोजित कर रही है। यह आयोजन पिछले 11 वर्षों से सरसैया घाट में अजन्मी बेटियों के लिए किया जा रहा हैं।

मातृ शक्ति को मजबूती देता आयोजन

पितरो के तर्पण का कार्यक्रम महिला शक्ति का प्रतीक बनता जा रहा हैं। इस कार्यक्रम में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हालांकि समाज में स्थापित मान्यता हैं, जिसमें सिर्फ बेटे ही पूर्वजों को पानी दे सकते हैं। बेटों को ही तर्पण और पिंडदान का अधिकारी बताया गया हैं। इस मान्यता को सरसैया घाट में तर्पण कर महिलाओं ने तोड़ने का काम किया है।

दावा : वैदिक काल में महिलाओं को रहा हैं पिंडदान का अधिकार

देहदान संस्थान के मनोज सेंगर ने दावा किया कि वैदिक काल में महिलाओं को तर्पण का अधिकार था। माता सीता ने भी अपने ससुर दशरथ का तर्पण और पिंडदान किया था। वहीं मध्यकाल में देश में कुरीतियां व्याप्त होती चली गई और महिलाओं से उनके अधिकार छीने जाते रहे। तर्पण करने वाली महिलाओं का कहना है, जब महिलाएं हर कदम में पुरुषों के साथ चल रही हैं, तो उनसे तर्पण का अधिकार कैसे छीना जा सकता है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेई की पौत्री ने किया पिंडदान

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की पौत्री नंदिता मिश्रा ने कहा कि अटल बिहारी बाजपेई उनके बाबा थे वह उनका तर्पण और पिंडदान करने के लिए यहां आई हैं। कल्याणपुर से विधायक नीलिमा कटियार ने भी आयोजन में भाग लिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को वैदिक काल में तर्पण का हक हासिल था वह उसी परंपरा को निभाने का काम कर रही हैं। वहीं कार्यक्रम के आयोजक मनोज सेंगर ने कहा कि संस्था लगातार 11 सालों से अजन्मी कन्याओं के लिए तर्पण के कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। जिसमें महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है महिलाएं अजन्मी बेटियों के लिए तर्पण करने के साथ ही अपने पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान भी करती हैं। ऐसा करने से पुरुषों और महिलाओं के बीच भेदभाव खत्म हो रहा है। वहीं महिलाएं अपने हक के लिए जागरूक हो रही है।

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