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कानपुर...जापानी पद्धति से तैयार हो रहे शहर में जंगल:ऑक्सीजन लेवल में आएगा सुधार, मियावाकी तकनीक से रोपे जाएंगे 60 हजार पौधे,10 गुना तेजी से बढ़ते हैं ये पौधे

कानपुर9 महीने पहले
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ग्रीन कवर को बढ़ाने के साथ ही अब शहर में नैचुरल ऑक्सीजन चैंबर नगर निगम बना रहा है। - Dainik Bhaskar
ग्रीन कवर को बढ़ाने के साथ ही अब शहर में नैचुरल ऑक्सीजन चैंबर नगर निगम बना रहा है।

कानपुर देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में है। यहां की हवा को शुद्ध करने के लिए नगर निगम ने पहल की है। शहर में कम होते पेड़-पौधे को बढ़ाने के लिए जापानी मियावाकी पद्धति से छोटे-छोटे शहरी जंगल तैयार किए जा रहे हैं। सोमवार को अमृत महोत्सव के तहत विजय नगर स्थित ट्रैफिक चिल्ड्रेन पार्क में 2 हेक्टेअर में 60 हजार पौधे रोपने की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने भी हिस्सा लिया।

महापौर ने की शुरुआत
सोमवार को पौधे रोपने की शुरुआत महापौर प्रमिला पांडेय, सांसद देवेंद्र सिंह भोले और नगर आयुक्त शिवशरणप्पा जीएन ने की। नगर आयुक्त ने बताया कि 2 हेक्टेअर जमीन में ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले पौधे रोपे जाएंगे। मियावाकी पद्धति बेहद सक्सेस है। इसमें 10 गुना तेजी से पौधों की ग्रोथ होती है और 30 गुना घना जंगल तैयार होता है। 120 बेड बनाकर पौधे रोपे जाएंगे।

नैचुरल ऑक्सीजन चैंबर
ग्रीन कवर को बढ़ाने के साथ ही अब नेचुरल ऑक्सीजन चैंबर नगर निगम बना रहा है। शहर के 4 स्थानों पर पहले ही मियावाकी पद्धति से पौधे रोपे गए हैं। जिनके अच्छे रिजल्ट आए हैं। यहां मियावाकी पद्धति से करीब 1.30 लाख पौधों को लगाया गया है। उद्यान अधीक्षक डा. वीके सिंह के मुताबिक कोरोना महामारी को देखते हुए ऑक्सीजन चैंबर बनाने में इस बार ऑक्सीजन ज्यादा प्रॉड्यूस करने वाले पौधे लगाए जा रहे हैं। कानपुर के एन्वायॅरमेंट में क्षमता के मुताबिक अब भी ऑक्सीजन लेवल कम है।

यहां शहरी जंगल तैयार
बीते साल नगर निगम ने शहर के 4 स्थानों विजय नगर स्थित चिल्ड्रेन पार्क, श्नैश्चर मंदिर ग्रीन बेल्ट, जाना गांव और गोविंद नगर स्थित जोन 4 कैंपस की खाली पड़ी जमीन में मियावाकी पद्धति से ग्रीन जंगल तैयार किया था। इस पद्धति से पौधों की ग्रोथ काफी अच्छी है और ग्रीन कवर भी बढ़ रहा है। बता दें कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2019 के मुताबिक कानपुर में ग्रीन कवर 2.09 प्रतिशत है। जो 33 प्रतिशत के मुकालबे बेहद कम है।

मियावाकी पद्धति की खासियतें
-30 गुना ज्यादा घना होता इस पद्धति से तैयार जंगल सामान्य के मुकाबले
-इस पद्धति से पौधे 10 गुना तेजी से तैयार होते हैं और 30 गुना ज्यादा घने होते हैं।
-300 साल में तैयार होता है पारंपरिक विधि से जंगल
-20 से 30 साल में ही जंगल तैयार हो जाता है मियावाकी पद्धति से
-लोकल एनवायॅरमेंट कंडीशन के आधार पर ही लगाए जाते हैं।
-इसमें प्रति वर्ग मीटर 3 से 5 पौधे लगाए जाते हैं।
-रोपे गए पौधों की लंबाई 60 से 80 सेमी तक होनी चाहिए।
-इंडस्ट्रियल एरिया में ग्रीन कवर बढ़ने से एयर पॉल्यूशन में कमी आएगी।

ये पौधे लगाए जा रहे
पारस, पीपल, जामुन, मौलश्री, अर्जुन पिलखन, शीशम, गोल्डमोहर कैजुरिनाए सुखचैन, गूलर, अशोक, फाइकस, टिकोमा, चंपा, बॉटल ब्रश, जैट्रोफा, बांस कनेर आडू, नासपाती, शहतूत, मेहंदी तुलसी व अन्य।

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