IIT कानपुर के प्रोफेसर का दावा आएगी कोरोना लहर:वैक्सीन इम्यूनिटी को बाईपास कर रहा है नया वेरिएंट, माइल्ड लॉकडाउन भी लग सकता

कानपुर8 महीने पहलेलेखक: शलभ आनंद बाजपेयी
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कोरोना की तीसरी लहर को लेकर जो कुछ भी अब तक जानकारों ने संभावनाएं जताई थी वो ओमिक्रॉन वेरिएंट आने से सच साबित होती दिख रही है। कोरोना की दूसरी लहर की तरह घातक नहीं होगी तीसरी लहर और अगर मरीजों की संख्या बढ़ती है तो हो सकता है एक बार फिर से माइल्ड लॉकडाउन लगाने की ज़रुरत हो सकती है। यह कहना है IIT कानपुर के प्रोफेसर पद्मश्री मणीन्द्र अग्रवाल का। प्रो अग्रवाल ने बताया, जनवरी के पहले हफ्ते से शुरू होगी तीसरी लहर और फरवरी में पीक पर होगी। यह नया ओमिक्रॉन वेरिएंट डेल्टा से भी ज्यादा तेजी से फैल रहा है। इसके अलावा यह वैक्सीन को भी बाईपास कर रहा है। अब तक जितने भी केस स्टडी आयी है उसमे इसका संक्रमण बहुत माइल्ड पाया गया है इस लिए इससे ज्यादा घबराने की ज़रूरत नहीं है।

प्रोफेसर अग्रवाल ने आगे बताया, यह वेरिएंट के जो केस सामने आये है उनमे कुछ में नेचुरल इम्युनिटी को बाईपास किया है और कई में नहीं किया है। नेचुरल इम्युनिटी का मतलब जिन लोगों को एक बार कोरोना हो चूका हो या एक बार भी नहीं हुआ हो। उनको घबराने की ज़रूरत नहीं है। इसके आलावा नए वेरिएंट के अब तक जितने भी केस सामने आए है अफ्रीका में उसमे मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करने की जरूरत नहीं देखने को मिली है लेकिन अभी इसके बारे में ज्यादा कहना ठीक नहीं होगा।

वैक्सीन इम्यूनिटी को बाईपास कर रहा है...
प्रो अग्रवाल के मुताबिक, नए वेरिएंट में यह देखने को मिला है कि जिन लोगों ने वैक्सीन लगवा ली है उनको भी यह वेरिएंट अपनी चपेट में ले रहा है। इसमें सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि डेल्टा वेरिएंट के समय भी जिन लोगों ने वैक्सीन लगवाई थी संक्रमण तो उन लोगों को भी हो रहा था लेकिन थोड़ा माइल्ड था। अगले एक हफ्ते में मेरी स्टडी रिपोर्ट तैयार हो जाएगी जिसमे इस नए वेरिएंट के बारे में मेरा आकलन सही तरीके से पेश कर पाउगा।

तीसरी लहर की संभावना....
प्रो अग्रवाल ने बताया, जिस तरह से ओमिक्रॉन वेरिएंट फैल रहा है उसे देखते हुए तीसरी लहर के बारे में जो मैंने सितम्बर महीने में आकलन किया था वह सच साबित होता दिख रहा है। साउथ अफ्रीका में यह बहुत तेजी से फैल रहा है और भारत में भी यह पहुंच चूका है। जनवरी के पहले हफ्ते से भारत में तीसरी लहर दस्तक देगी। तीसरी लहर का पीक फरवरी में आने की संभावना है। जिस समय यह तीसरी लहर पीक पर होगी उस समय रोजाना एक लाख से डेढ़ लाख के बीच संक्रमित मरीजों के संभावना देखने को मिल रही है।

लॉकडाउन लगाना पड़ सकता है...
प्रो अग्रवाल ने बताया, जैसा हम लोगों ने डेल्टा वेरिएंट के दौरान हो रहे प्रसार को रोकने के लिए एक हल्का लॉकडाउन (रात का कर्फ्यू, भीड़ पर प्रतिबंध) लगाया था उसी तरह इस बार भी प्रयोग किया जा सकता है क्योंकि उस हलके लॉकडाउन से बीटा वेरिएंट को रोकने में काफी हद तक मदद मिली थी। इस हलके लॉकडाउन से पीक वैल्यू में काफी कमी आएगी। जिन प्रदेशों में नेचुरल इम्युनिटी कम है वहां मरीजों की संख्या बढ़ेगी और इसे देखते हुए माइल्ड लॉकडाउन लगाया जा सकता है।

पहली और दूसरी लहर की चेतावनी भी दी थी...
प्रो. अग्रवाल ने आईआईटी कानपुर के कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग के फैकल्टी पद्मश्री प्रो मणींद्र अग्रवाल ने इससे पहले पहली व दूसरी लहर का भी पूर्वानुमान जताया था। उनकी रिपोर्ट सही साबित हुई थी। प्रो. अग्रवाल ने कंप्यूटर मॉडल 'सूत्र' के जरिए यह पूर्वानुमान जताया था। अलग-अलग देशों में आई लहरों, वैक्सीनेशन और उपलब्ध स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के बाद अग्रवाल ने अपनी रिपोर्ट जारी की थी।

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