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कानपुर सेंट्रल से फर्जी रेलवे कर्मी पकड़े जाने का मामला:ठगों पर एक और FIR, रेलवे कर्मचारियों की भी भूमिका जांच में संदिग्ध मिली

कानपुर9 दिन पहले
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रेलवे कर्मचारी बन विभाग में करते रहे काम, रेलवे को भनक नहीं।  ठगी के शिकार युवकों की तहरीर पर एक और एफआईआर दर्ज। - Dainik Bhaskar
रेलवे कर्मचारी बन विभाग में करते रहे काम, रेलवे को भनक नहीं। ठगी के शिकार युवकों की तहरीर पर एक और एफआईआर दर्ज।

सेंट्रल स्टेशन कानपुर में 16 फर्जी रेलवे कर्मचारी पाए जाने का मामला तूल कपड़ता जा रहा है। जीआरपी ने शुक्रवार को ठगी के शिकार युवकों की तहरीर पर एक और एफआईआर दर्ज की है। रेलवे कर्मचारियों की भी भूमिका संदिग्ध मिली है। मामले में अब तक जीआरपी ने रेलवे में फर्जी नियुक्ति करने वाले तीन शातिर ठगों की गिरफ्तारी कर ली है। तीनों को जेल भेजने के साथ ही अन्य सभी ठगी के शिकार हुए फर्जी रेलवे कर्मचारियों को छोड़ दिया गया है। जांच में उनके खिलाफ कोई भी साक्ष्य नहीं मिले।

रेलवे का फर्जी नियुक्ति पत्र देकर कराते रहे वसूली
सीओ जीआरपी कमरुल हसन खान ने बताया कि गुरुवार को टिकट चेकिंग स्टाफ सुनील पासवान ने संदिग्ध पनकी रतनपुर निवासी रुद्र प्रताप ठाकुर उर्फ दिनेश सिंह को गिरफ्तार किया था। जांच के बाद उसके दो साथी पी-रोड निवासी पवन कुमार गुप्ता और रेलबाजार फेथफुलगंज निवासी शिव नारायण को भी गिरफ्तार कर लिया। तीनों ने मिलकर रेलवे में फर्जी नियुक्तियां की और सेंट्रल स्टेशन पर तैनाती कर दी थी। पकड़े जाने पर पूरे गैंग का खुलासा हुआ और पुलिस ने तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। अब दूसरी एफआईआर ठगी के शिकार अंकुर की तहरीर पर रुद्र प्रताप उर्फ दिनेश, पवन कुमार गुप्ता, मोहित, शिवनारायण त्रिपाठी, दिनेश गौतम और अनुज अवस्थी के खिलाफ दर्ज की गई है। फरार जालसालों की तलाश में जीआरपी की एक टीम ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है।

रेलवे कर्मचारी बन विभाग में करते रहे काम, रेलवे को भनक नहीं
आपको जानकर हैरत होगी कि हरिद्वार निवासी यासिर अराफात, फर्रुखाबाद निवासी अभिषेक, कानपुर के शिवाला निवासी मानस द्विवेदी और फर्रुखाबाद निवासी अनुज प्रताप फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर महीनों से सेंट्रल स्टेशन पर नौकरी करते रहे। इसकी भनक रेलवे विभाग को भी नहीं लगी। इसके साथ ही पार्सल विभाग में हरिद्वार निवासी अंकुर, उन्नाव अजगैन निवासी जीनू यादव, आनंद कुमार, हमीरपुर निवासी प्रदीप कुमार, विजय नगर कानपुर निवासी गौरव कटियार, प्रयागराज निवासी बृजलाल, बलिया निवासी पवन यादव और कानपुर के साढ़ गोपालपुर निवासी वंशगोपाल नौकरी कर रहे थे, लेकिन रेलवे कर्मचारियों को भनक भी नहीं लगी। इसको देखते हुए जीआरपी सीओ ने कई रेलवे कर्मचारियों को भी संदेह के घेरे में लिया है और जांच कर रहे हैं।

पांच से पंद्रह लाख लेकर दी थी नौकरी
पूछताछ में सामने आया कि शातिरों ने पकड़े गए फर्जी रेलवे कर्मचारियों को पांच से 15 लाख रुपए देकर स्टेशन पर नियुक्तियां की थी। इसके चलते रेलवे का फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर नौकरी करने वाले पकड़े गए 15 युवकों को छोड़ दिया गया है। इसके साथ ही गैंग से जुड़े अन्य जालसाजों की तलाश की जा रही है।

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