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कानपुर के निजी अस्पताल का कारानाम:गाल ब्लैडर का इलाज कराने आए रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी का मोबाइल गायब, अस्पताल बोला- चोरी तो आम बात

कानपुर6 दिन पहले
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अस्पताल ने खड़े किए हाथ, कहा चोरी तो आम बात। - Dainik Bhaskar
अस्पताल ने खड़े किए हाथ, कहा चोरी तो आम बात।

कोरोना काल में भी अस्पतालों में चोरी की वारदात थम नहीं रही है। कानपुर के एक निजी अस्पताल में पत्नी के गाल ब्लैडर का इलाज कराने आए रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी का वार्ड बॉय ने मोबाइल व अन्य सामान पर हाथ साफ कर दिया। खासबात यह है कि जब मरीज ने इसकी सूचना अस्पताल प्रशासन को दी, तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए। मामला जिले के कृष्णा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का है। जहां से एक रिटायर्ड एयर फोर्स कर्मी का नया मोबाइल व अन्य समान वार्ड बॉय ने चुरा लिया। रविवार को पुलिस के आने पर भी अस्पताल प्रशासन ने कोई सहयोग नहीं किया। सहयोग न मिलने पर मरीज के परिजनों ने परिसर में हंगामा किया।

वार्ड बॉय ने किया हाथ साफ
दरअसल, दो जून को रिटायर्ड एयरफोर्स ऑफिसर शिवदेनी पंडित ने अपनी पत्नी सियापति को गाल ब्लैडर निकालने के लिए कृष्णा सुपर स्पेशलिटी में भर्ती कराया था। 4 जून को जब वह अपनी पत्नी के लिए पानी की बोतल भरने नीचे गए तो आईसीयू में काम करने वाले एक वार्ड बॉय ने उनका चार्जिंग पर लगा मोबाइल फोन व अन्य समान वहां से चोरी कर लिया। शिवदेनी पंडित ने बताया, जब मैं पानी भर कर वापस आ रहा था तो मैंने उस वार्ड बॉय को कमरे से निकलते हुए देखा और उससे पूछा तो उसने बताया की आपको नीचे काउंटर पर बुलाया जा रहा है, यह बताने आया हूँ। जब अंदर जाकर देखा तो कमरे से फोन व अन्य सामान गायब मिला।

अस्पताल ने खड़े किए हाथ, कहा चोरी तो आम बात
इस मामले की शिकायत जब शिवदेनी पंडित ने अस्पताल प्रशासन से की तो उनका जवाब सुनकर वह दंग रह गए। शिवदेनी ने बताया कि, प्रशासन ने उनको साफ कह दिया यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है। अस्पताल में सामान चोरी होना तो आम बात है। और फोन चोरी होना तो यहां आम बात है। सीसीटीवी दिखाने की बात पर प्रशासन ने परिजनों को टरका दिया।

पुलिस दिखी बेदम, चल रही मजिस्ट्रेट जांच
इंसान के लिए पीड़ित परिवार रेल बाज़ार ठाणे पहुंचा। उसने पुलिस से आपबीती बताई। इसके बाद थाना प्रभारी ने अस्पताल पहुंचे। अस्पताल पहुंचकर उन्होंने सीसीटीवी फुटेज दिखाने की बात कही, लेकिन बिना फुटेज दिखाए सिपाही संग उनको वापस लौटा दिया गया। जबकि, ओवरबिलिंग और मरीजों की मौत को लेकर अस्पताल पर पहले ही तीन मामले चल रहे हैं। जिसकी मजिस्ट्रेट जांच चल रही है।