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यूपी में सियासी मुद्दा बनेगा सिख दंगा?:36 साल बाद आरोपियों को गिरफ्तार करने की तैयारी, कानपुर में 67 चिन्हित, 13 की हो चुकी मौत;11 केस में चार्जशीट जल्द

कानपुरएक महीने पहले
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1984 में कानपुर में हुए सिख दंगो में 300 से ज्यादा सिख मारे गए थे और सैकड़ों घर तबाह हुए थे। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
1984 में कानपुर में हुए सिख दंगो में 300 से ज्यादा सिख मारे गए थे और सैकड़ों घर तबाह हुए थे। (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में 1987 का सिख दंगा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। दंगों के 36 साल बाद पुलिस ने इसमें तेजी दिखाई है। सूत्रों की मानें तो चुनाव से पहले इस मामले में कई आरोपी गिरफ्तार हो सकते हैं। इसके लिए SIT ने 67 आरोपियों को चिन्हित कर लिया है। इसमें 13 की मौत हो चुकी है, जबकि 54 जिंदा हैं।

फरवरी 2019 में SIT का गठन हुआ था
1984 में कानपुर में हुए सिख दंगो में 300 से ज्यादा सिख मारे गए थे और सैकड़ों घर तबाह हुए थे। हालांकि, जांच करने वाले रंगनाथ मिश्रा आयोग ने दंगों में 127 मौतें होने की बात कही थी। लेकिन दंगे में मारे गए लोग जांच से संतुष्ट नहीं थे और उन्हें इंसाफ नहीं मिल सका था। इस पर योगी सरकार के आदेश पर फरवरी 2019 में SIT का गठन किया गया था।

आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए शासन से मांगी अनुमति
2019 में गठित SIT को जांच करके 6 महीने में अपनी रिपोर्ट देनी थी। लेकिन ढाई साल बीतने के बाद भी अब तक जांच पूरी नहीं हो सकी और पांच बार जांच का समय बढ़ाया गया। SIT ने 20 नृशंस हत्याकांड के मामलों की जांच शुरू की थी। इसमें से 6 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट लगाकर बंद कर दिया गया जबकि तीन और मामले भी फाइनल रिपोर्ट (FR) की तरफ बढ़ रहे हैं।

11 मामलों में SIT ने सबूत जुटाकर 67 आरोपियों को चिह्नित किया है। इसमें से 13 आरोपियों की मौत हो चुकी है और 54 जिंदा है। इन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। गिरफ्तारी की अनुमति मिलते ही अरोपियों को गिरफ्तार करके चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जाएगी। SIT के SSP बालेंद्रु भूषण ने इसकी पुष्टि की।

उन्होंने बताया कि 11 गंभीर मामलों की जांच में हत्या, आगजनी और दंगों के साक्ष्य मिले हैं। इन मामलों में 67 आरोपियों को चिह्नित किया गया था। इसमें 13 की मौत हो चुकी है। अब 54 आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। इसमें से कई आरोपी बुजुर्ग हो चुके हैं और बेहद गंभीर बीमारियों से भी जूझ रहे हैं। शासन की अनुमति मिलते ही आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जाएगा।

पंजाब जाएगी एसआईटी की जांच टीम
एसआईटी के एसएसपी बालेंद्रु भूषण ने बताया कि सिख विरोधी दंगों की जांच कर रही एसआईटी 14 सितंबर को पंजाब रवाना हो गई। यहां अलग-अलग शहरों में रह रहे वादी और मृतक के परिवार वालों के बयान दर्ज करेगी। उसके बाद इन सभी के कोर्ट में बयान दर्ज कराए जाएंगे।

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