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राष्ट्रपति की 'जिज्जी' को इलाज की दरकार:102 साल की गंगाजली बोलीं- मैंने रामनाथ को राखी बांधी है, कोई मुझे उनसे मिलवा दे.. वो मेरी इच्छा जरूर पूरी करेंगे

कानपुर4 महीने पहलेलेखक: आदित्य द्विवेदी
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देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दिल्ली के राजभवन से अपने कानपुर देहात स्थित पैतृक आवास पहुंच गए हैं। वह आज अपने दोस्तों और सगे संबंधियों से मिलेंगे। इस बीच कानपुर के लाल इमली कॉलोनी में रहने वाली 102 साल की गंगाजली ने भी उनसे मिलने की इच्छा जताई है। उनका दावा है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को वह राखी बांधती रही हैं। राष्ट्रपति अपने छात्र जीवन में उन्हें जिज्जी कहकर पुकारते थे।

बात उस वक्त की है, जब रामनाथ यहांं चार इमली कॉलोनी के मकान नंबर 27/11 में अपने बहनोई सेवाराम के साथ रहते थे। जिज्जी 27/12 में रहती थीं। हालांकि अब गंगाजली आर्थिक तंगी के दौर में हैं। पिछले दिनों वह घर में गिर गई थीं तो उनकी कुल्हे की हड्‌डी टूट गई है। उनके पास इलाज कराने के पैसे नहीं है। जब उन्हें बताया गया कि राष्ट्रपति कानपुर आ रहे हैं तो वह अपने आस-पड़ोस वालों से उनसे मिलवाने की जिद कर रही है। जिज्जी का कहना है कि रामनाथ उनकी कोई बात नहीं टालेंगे, उनका इलाज जरूर करवाएंगे।

बेटे को 36 महीने से नहीं मिला वेतन

खुद को राष्ट्रपति की मुंहबोली बहन बताने वाली गंगाजली चलने फिरने में भी असमर्थ है। उनका छोटा बेटा जीवनलाल और बहू मिथलेश देखरेख करते हैं। लाल ईमली में 36 महीने से वेतन नही मिलने के कारण उनके बेटे को भी वेतन नहीं मिला है। इसलिए वह अपनी मां का इलाज नहीं करवा पा रहा है। गंगाजली को जब मालूम हुआ कि उनके मुंहबोले भाई रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति है और वह कानपुर आ रहे हैं। इस पर गंगाजली बोली कि मैंने उनको राखी बांधी है, हमें जिज्जी बोलते हैं रामनाथ।

कानपुर के लाल इमली एरिया में इसी कॉलोनी में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने छात्र जीवन के 10 साल गुजारे थे। वे यहां अपनी बहन के यहां पढ़ने आए थे।
कानपुर के लाल इमली एरिया में इसी कॉलोनी में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने छात्र जीवन के 10 साल गुजारे थे। वे यहां अपनी बहन के यहां पढ़ने आए थे।

'कोई रामनाथ से मिलवा दो वो मेरा इलाज करवा देंगे'

उम्र के 102 साल पार कर चुकी गंगाजली के तीन लड़के उनका साथ छोड़ चुके हैं। छोटा बेटा सिर्फ दो वक्त की रोटी भर देने में सक्षम है। ऐसे में गंगाजली का इलाज नहीं हो पा रहा है। पिछले दिनों वह गिर गई थीं, जिससे कूल्हा टूट गया। इलाज नही हो पाने के कारण अब गंगाजली टूटे हुए कूल्हे और उससे होने वाले दर्द को अपने जीवन का हिस्सा मान बैठी है। लेकिन कभी कभी बहुत दर्द होने पर चिल्ला कर रोती रहती हैं। बस यही बोलती है कि कोई इलाज करवा दो। उन्हें भरोसा है कि रामनाथ उनकी अंतिम बात जरूर मानेंगे।

डॉक्टरों ने ऑपरेशन की दी है सलाह

गंगाजली का कूल्हा टूटने पर डक्टरों का कहना है कि ऑपरेशन की जरूरत है। इसमे लगभग एक लाख से ज्यादा रुपए की जरूरत पड़ेगी। गंगाजली की छोटी बहू मिथलेश ने बताया कि 36 महीने से लाल ईमली में वेतन नहीं मिला है। बच्चों की पढ़ाई बंद हो गई है। बड़ी मुश्किल से दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो पाता है। इलाज के लिए एक लाख रुपए कहां से लाएंगे।

लाल इमली कॉलोनी में रहकर राष्ट्रपति ने की है पढ़ाई

साल 1959 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हाई स्कूल की पढ़ाई करने अपनी बहन के घर कानपुर आ गए थे। जहां वह लाल इमली के सेटलमेंट क्वार्टर में रहने वाले बहनोई सेवाराम के साथ ही रह कर पढ़ाई कर रहे थे। वहीं पड़ोस में रहने वाली गंगाजली इनकी बड़ी बहन बन गई और राखी बांधने लगी। इस कॉलोनी में लगभग 10 साल तक वे रहे। इस बीच गंगाजली इनको छोटे भाई की तरह स्नेह करती रही। गंगाजली को राष्ट्रपति से पिछली मुलाकात तो नहीं याद है, लेकिन इतना कहती हैं कि रामनाथ वकील बन गए हैं। उनका कहना है कि वह शुरू से बहुत होनहार थे, सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देते थे। रामनाथ को खेलते कूदते लड़ते झगड़ते कभी नहीं देखा।

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