राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार गांव पहुंचेंगे महामहिम:दोस्त और गांव के लोगों को अपने रामनाथ का बेसब्री से इंतजार, गांव में दीवाली जैसा माहौल, कुलदेवी मंदिर में फौजी ने गाया स्वागत गीत

कानपुर7 महीने पहले

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 27 जून को अपने पैतृक गांव कानपुर देहात के परौंख आ रहे हैं। मौजूदा समय में राष्ट्रपति का गांव में न ही कोई मकान है और न ही कोई परिवार का सदस्य रहता है। इसके बाद भी उन्हें गांव की माटी और वहां के लोगों से इतना लगाव है कि परिवार समेत गांव आ रहे हैं। यहीं उनका जन्म हुआ था। गांव के लोगों को बेसब्री से इंतजार है। गांव के हर घर में साफ-सफाई और रंग-रोगन का काम चल रहा है। जिस तरह से दीवाली पर हर घर में होता है। राष्ट्रपति की कुलदेवी पथरी देवी मंदिर में गीत-संगीत का कार्यक्रम चल रहा है। लोग ढोल-मजीरे की थाप महामहिम के स्वागत में गीत गा रहे हैं।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पुरानी फोटो, जब वो अपने अपने पुराने दोस्तों के साथ थे।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पुरानी फोटो, जब वो अपने अपने पुराने दोस्तों के साथ थे।

बिहार के राज्यपाल रहने के दौरान आखिरी बार आए थे गांव
रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल भी रहे हैं। वे आखिरी बार 2017 में परौंख गांव आए थे। 25 जुलाई 2017 को वे देश के राष्ट्रपति बने। उसके बाद वह गांव नहीं आ सके। कई लोगों को राष्ट्रपति भवन में बारी-बारी से मिलने के लिए बुलाया था। इसके साथ ही समय-समय पर गांव के प्रमुख लोगों से हालचाल भी लेते रहते हैं। अब राष्ट्रपति का कार्यक्रम निर्धारित होने के बाद पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। कई घरों में तो उत्साह के चलते रंग-रोगन और मेंटेनेंस का काम तेजी से चल रहा है। गांव में हर घर के बाहर चौपाल सी लगी है। रात-दिन सिर्फ राष्ट्रपति के आगमन को ही लेकर चर्चा है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनके बचपन के दोस्त सतीश मिश्र। चर्चा है कि राष्ट्रपति कोविंद सतीश से मिलने उनके घर भी जाएंगे।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनके बचपन के दोस्त सतीश मिश्र। चर्चा है कि राष्ट्रपति कोविंद सतीश से मिलने उनके घर भी जाएंगे।

गांव के लोगों में उत्साह और उम्मीदें भीं
राष्ट्रपति के आगमन को लेकर गांव के लोगों में उत्साह के साथ ही उम्मीदें भी हैं। राष्ट्रपति के बचपन के दोस्त विजय पाल सिंह भदौरिया का कहना है कि गांव में डिग्री कॉलेज खुलवाने के लिए राष्ट्रपति से गुजारिश करेंगे। आस-पास डिग्री कॉलेज नहीं होने से कई बच्चे आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। पूर्व प्रधान बलवान सिंह ने कहा कि 70 गलियों का एस्टीमेट बनाकर भेजा था। दो साल बाद भी बजट पास नहीं हुआ। गांव के विकास को लेकर भी वह राष्ट्रपति से चर्चा करेंगे। जितने लोग गांव में उतने तरह की चर्चाएं और राष्ट्रपति से अपेक्षाएं लिए बैठे हैं। सभी में एक अलग सा उत्साह देखने को मिला।

राष्ट्रपति कुल देवी की पूजा करने के बाद कार्यक्रमों में लेंगे हिस्सा
राष्ट्रपति के पिता दिवंगत मैकूलाल ने पथरीदेवी मंदिर की नींव रखी थी। वह यहां पर अक्सर पूजा-पाठ करने आते थे। इसके चलते महामहिम को भी मंदिर से बेहद लगाव और आस्था। इसी के चलते पिता के बाद अब उन्होंने मंदिर का जीर्णोंद्वार कराया और अब यहां पर दर्शन करने आएंगे। यह मंदिर गांव के लोगों की भी आस्था का केंद्र है। इसके बाद फिर वह अन्य कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

पथरी देवी मंदिर में गीत-संगीत का कार्यक्रम चल रहा है। लोग महामहिम के स्वागत में खुशी मना रहे हैं।
पथरी देवी मंदिर में गीत-संगीत का कार्यक्रम चल रहा है। लोग महामहिम के स्वागत में खुशी मना रहे हैं।

...सजा है गांव गुलशन सा, मेरे सरकार आए हैं

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कुलदेवी पथरी देवी के मंदिर में गुरुवार को अलग ही नजारा देखने को मिला। गांव के लोग राष्ट्रपति के आगमन की खुशी में ढोल मजीरा के साथ स्वागत गीत गा रहे हैं। गांव में रहने वाले फौज से सेवानिवृत्त बबलू सिंह गौर और बुजुर्ग भानु प्रताप सिंह की जोड़ी ने अपने गीतों से गांव में उत्सव जैसा माहौल बना दिया है। सजा है गांव गुलशन सा, मेरे सरकार आए हैं....किस तरह से करूं मैं नमन आपका स्वागतम स्वागतम स्वागतम... इस गीत को ढोल मजीरे पर गाया तो लोग खुशी से झूम उठे। राष्ट्रपति गांव आने के बाद इसी मंदिर में अपनी कुलदेवी का दर्शन करने जाएंगे।

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