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हर्बल अर्क से बना स्प्रे खत्म करेगा मच्छर:पीपीएन कॉलेज और रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों ने एथेनाल मिलाकर बनाया स्प्रे, कॉलेज की लैब में पानी में विकसित किया लार्वा उसमें किया स्प्रे का छिड़काव

कानपुर5 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो

शहर में बरसात के मौसम में मच्छरों और उनसे होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए पीपीएन कॉलेज और एमजेपी रूहेलखंड विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने पत्तियों के रस से स्प्रे तैयार किया। इनका दावा है की रूके हुए पानी में और घर में जगह जगह स्प्रे करने से मच्छर और डेंगू का लार्वा विकसित नहीं हो पाता है।

अगैव अमेरिकाना कमल कैक्टस से बना है स्प्रे
अगैव अमेरिकाना कमल कैक्टस से बना है स्प्रे

सिंथेटिक इंसेक्टिसाइड का इस्तेमाल किया गया है...
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सत्य प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि, रोग फैलाने वाले मच्छर एक्टिव हो गए है। इसको रोकने के लिए लोग सिंथेटिक इंसेक्टिसाइड का इस्तेमाल करते है, जिससे हमारी आहार श्रंखला में पाये जाने वाले लाभदायक कीट भी मर जाते है। अध्ययन करने के बाद डेंगू एन्टी मेटामॉर्फॉसिस स्प्रे तैयार किया गया है। एडीस एजेपट्टी मच्छर डेंगू का वाहक होता है। स्प्रे कर देने मात्र से पानी में डेंगू का लार्वा नहीं डेवलप हो पाते है।

घरों में आजम से बनाया जा सकता है स्प्रे...
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर सौरभ मिश्रा ने बताया कि, स्प्रे को आसानी से अपने घर पर बनाया जा सकता है। इसमें अगैव अमेरिकाना कमल कैक्टस (जो कि पौधों की नर्सरी में 35 से 40 रुपये में उपलब्ध होता है) पौधे की पत्तियों के जूस को इथेनॉल के साथ मिलाकर घोल का 5 प्रतिशत भाग पानी मे मिला लें। इसके बाद तैयार मिश्रण को बोतल में भर ले और नालियों में और रुके हुए पानी में सुबह शाम स्प्रे करते रहे। दो बार स्प्रे करने से 24 घंटे मच्छरों के लार्वा नहीं डेवेलोप हो पाते है। हम लोगों ने इसे कमल कैक्टस पौधे की पत्ती में फाइटोकेमिकल्स और फ्लेवोनॉयड पाये जाते है। जो कि कीड़ों पर काफी असरदार होता है। अध्ययन मे पता चला है कि जिस पानी मे मच्छरों के लार्वा देखे गए थे, उस पानी पर स्प्रे किया गया। स्प्रे पड़ने के बाद मच्छरों की पूरी मेटामोरफॉसिस ही नही हो पायी।

स्प्रे को जगह इस्तेमाल किया जा सकता है...
इस स्प्रे को कूलर की टंकी ,नालियों और रुके हुए पानी में डाला जा सकता है। मच्छर मारने वाले मिश्रण को एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर सौरभ मिश्रा और पीपीएन कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर सत्य प्रकाश श्रीवास्तव ने तैयार किया है। तैयार मिश्रण को पीपीएन कॉलेज की लैब में लार्वा युक्त पानी में डालकर जांच लिया गया है। परिणाम बेहतर आए हैं। यूरेका जर्नल में प्रकाशित और नेशनल सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल दिल्ली में जांच के लिए भेजने की तैयारी है।

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