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दलहन के आयात शुल्क में 31 जनवरी तक मिलेगी छूट:नई फसल तक आयात शुल्क में छूट दिये जाने की मांग पर अड़े है दलहन आढ़ती, केंद्र की एक महीने की रियायत को बताया नाकाफ़ी

कानपुर4 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो

देश मे दाल की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिये केंद्र सरकार ने आयात शुल्क में एक महीने की और रियायत देने का निर्णय लिया है। इस मुद्दे पर आन्दोलित शहर के दलहन कारोबारियों ने इस निर्णय को अपनी जीत बताता है। पिछले कुछ समय से दलहन के आढ़ती आयात शुल्क नहीं लिये जाने को लेकर आन्दोलित रहे है। जिनकी मांगों पर केंद्र सरकार ने 31 दिसम्बर तक आयात में शुल्क नही लेने का निर्णय लिया था। वही कारोबारियों का कहना है कि दलहन की नई फसल आने तक आयात शुल्क माफ किया जाये। केंद्र सरकार ने इस पर 31 दिसम्बर 2021 तक के बिलिंग आर्डर पर 31 जनवरी 2022 तक शुल्क नही लेने का निर्णय लिया है।

आढ़तियों ने नई फसल आने तक आयात शुल्क में मांगी छूट

उ प्र खाद्य पदार्थ उद्योग व्यापार मण्डल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा ने बताया कि पिछले काफी समय से दाल के दाम लगातार आसमान छू रहे है। इसको लेकर आंदोलित देशभर के आढ़तियों ने केंद्र सरकार से आयात शुल्क माफ करने की मांग की थी। इसको लेकर दलहन कारोबारी लगातार आंदोलित भी रहे। इस पर केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर तक छूट देने की बात कही थी, जिसे नये आदेश में 31 जनवरी 2022 तक बढ़ा दिया गया है। लेकिन यह छूट भी 31 दिसम्बर 2021 के बिलिंग आर्डर ओर ही मिलेगी। देशभर के आढ़तियों ने नई फसल आने तक दलहन के आयात शुल्क में रियायत देने की मांग रखी है। ज्ञानेश मिश्र का कहना है यह राहत नाकाफी है। उनकी दलील है कि नई फसल बाजार में अप्रैल महीने के बाद आती है। ऐसे में केंद्र सरकार को कम से कम इस वित्तीय वर्ष तक आयात शुल्क नही लेना चाहिए, ताकि बाजार में दलहन के दाम नियंत्रित रहे हैं और आम जनता को भी राहत मिले।

मांगें नही मानने पर आंदोलन करेंगे आढ़ती

नौबस्ता गल्लामंडी में एक बैठक कर आढ़तियों ने तय किया है कि यदि उनकी मांगे नही मानी गयी तो वह प्रदेश स्तर और आंदोलन करेंगे। उन्होने कहा कि आयात शुल्क का असर सीधे दलहन की कीमतों ओर पड़ता है। जिससे आम जनता प्रभावित होती है। डीजल और पेट्रोल की कीमतों ने पहले से महंगाई को चरम पर कर रखा है। ऐसे में आयात शुल्क से ही रसोई की महंगाई पर काबू पाया जा सकता है।

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