प्लाज़्मा को लेकर हाहाकार ब्लड बैंक हुये खाली:बढ़ते डेंगू और बुखार के मरीजों को नहीं मिल पा रहा है प्लाज़्मा, तीमारदार हो रहे है परेशान

कानपुरएक महीने पहले
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शहर में बढ़ते दिमागी बुखार, डेंगू के मरीजों और मच्छरों के प्रकोप से होने वाली अन्य बीमारियों ने ब्लड बैंक और मरीजों के सामने नई मुसीबत कड़ी कर दी है।अस्पतालों में मरीजों की लंबी लाइन लग रही है। काफी मरीजों में डेंगू जैसे लक्षण हैं। उनकी प्लेटलेट्स काउंट कम आ रही हैं। ऐसे में शहर के ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की डिमांड काफी अधिक हो गई है। इसकी वजह से अब शहर के प्रमुख सरकारी और चैरिटेबल ब्लड बैंकों में प्लेटलेट की कमी आ गई है। सोमवार को शहर के 5 प्रमुख सरकारी और चैरिटेबल ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की सिर्फ 123 यूनिट ही उपलब्ध थीं।

एक पेशेंट में चढ़ती हैं कई यूनिट...
हैलट इमरजेंसी के इंचार्ज डॉ एसके सिंह ने बताया, जिस तरह से इमरजेंसी में मरीज आरहे है उनमे ज्यादातर मरीजों को डेंगू के लक्षण दिखाई दे रहे है। ज्यादातर मरीजों में प्लेटलेट्स पहले से घटे हुए है या यहां एडमिट होने के बाद बड़ी तीजी से घट रहे है। जिन पेशेंट्स की प्लेटलेट्स काउंट 15 से 20 हजार तक होती हैं। उनका प्लेटलेट काउंट बढ़ाने के लिए सामान्य तौर पर 4 से 5 प्लेटलेट यूनिट चढ़ाई जाती हैं। सामान्य रैंडम डोनर प्लेटलेट्स में 15 से 20 हजार प्लेटलेट काउंट बढ़ता है। ऐसे में एक ही पेशेंट पर जब इतनी प्लेटलेट्स की खपत हो जाती है, ऐसे में अगर मरीजों की संख्या काम नहीं हुई तो ब्लड बैंक और मरीजों पर बड़ा संकट आ सकता है।

परेशान हैं तीमारदार...
कोरोना काल में कानपुर शहर में रक्त की कमी करवा दी थी, अभी उससे शहर के ब्लड बैंक उभर भी नहीं पाए थे कि डेंगू और अन्य बीमारियों ने ब्लड की खपत बढ़ा दी है। हालात ये हैं कि सोमवार को हैलेट अस्पताल को उर्सला ब्लड बैंक से गंभीर मरीजों के लिए ब्लड मांगना पड़ा। शहर के ब्लड बैंक वाले तीमारदारों का ब्लड लेकर बदले में उन्हें जिस ग्रुप का ब्लड या प्लेटलेट्स चाहिए होता है वह प्रोवाइड करवाते है, लेकिन इस समय डोनर न मिलने की वजह से तीमारदारों को बड़ी दिक्कत झेलनी पड़ रही है।

सबसे ज्यादा मांग थैलेसीमिया के मरीजों की...
आपको बता दें हैलट अस्पताल में डेंगू के बाद सबसे अधिक मांग और दिक्कत थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों, गर्भवती महिलाओं और घायलों को हो रही है। ब्लड ना मिलने की वजह से तीमारदारों का बुरा हाल है। कई लोग जो बाहर के जिलों से यहां इलाज करवाने आये है वह लोग अपने गांव से डोनर की व्यवस्था कर रहे है।

सिंगल डोनर प्लेटलेट ज्यादा फायदेमंद...
डॉ एसके सिंह ने बताया, अगर मरीज के इलाज के हिसाब से देखा जाये तो नार्मल रैंडम डोनर प्लेटलेट की जगह सिंगल डोनर प्लेटलेट मरीज को ज्यादा फायदा पहुंचती है और मरीज उससे जल्दी रिकवर भी होने लगता है। सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की एक यूनिट से मरीज में 40 से 50 हजार प्लेटलेट काउंट बढ़ जाता है। जिन पेशेंट्स का प्लेटलेट काउंट 10 से 15 हजार है और उसे ब्लीडिंग भी हो रही है तो सिंगल डोनर प्लेटलेट्स उस मरीज के लिए कारगर साबित होती है, लेकिन यह काफी महंगी होती हैं और इसकी उपलब्ता शहर में सिर्फ दो ही जगह है।

वायरल फीवर सीधे लीवर पर कर रहा है असर...
शहर में फैले वायरल फीवर के जो भी मरीज अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं उनके लीवर और किडनी पर सीधे असर कर रहा है यह बुखार। हैलट अस्पताल के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.एसके गौतम ने बताया, आमतौर पर जब मरीज को फीवर होता है तो उसका लीवर कमजोर हो जाता है, लेकिन इस चल रहे बुखार के कारण मरीजों के लीवर और किडनी दोनों पर ज्यादा असर कर रहा है। भर्ती हो रहे मरीजों का एसजीपीटी और एसजीओटी लेवल काफी बढ़ा हुआ है, इससे इन्फेक्शन फैलने का खतरा इन मरीजों पर और बढ़ गया है।

हैलट ब्लड बैंक-33 यूनिट मायांजलि चैरिटेबल ब्लड बैंक- 22 आईएमए चैरिटेबल ब्लड बैंक-16 यूनिट उर्सला ब्लड बैंक- 40 यूनिट मंगला चैरिटेबल ब्लड बैंक- 12

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