आतंकी वारदात का खतरा टला:सिक्योरिटी एजेंसीज ने किया 50 फीसद काम पूरा, बताया यूपी सुरक्षित

कानपुर6 महीने पहले
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एटीएस लगातार आतंकी मामले में सफलता हासिल कर रही है। सेंट्रल सिक्योरिटी एजेंसीज को एटीएस ने जो मेल भेजी है। उसमें जिम्मेदार अधिकारियों को यूपी सेफ का भरोसा दिलाया है। साथ ही ये भी लिखा है कि ऑपरेशन 50 परसेंट कंपलीट बट ऑल इज सेफ। यानी यूपी से आतंक फैलाने वाले एटीएस के रडार पर हैैं। एटीएस और एनआईए ने माड्यूल बस्र्ट होने की जानकारी भी सेंट्रल सिक्योरिटी एजेंसीज को दे दी गई है। कह सकते है कि प्रदेश में जो आतंकी खतरे की आशंका थी वो फिलहाल खत्म हो गयी है।

रेलवे की सरकारी कॉलोनी में रहते थे स्लीपर सेल्स

पूछताछ के दौरान बिहार के एक परिवार का नाम सामने आया है। जो ध्वस्त हुई रेलवे कॉलोनी में पहले रहता था। इस परिवार के तीन लोग दिखावे के लिए कोचिंग ट्यूशन का काम करते थे। इसी की आढ़ में छोटे बच्चों को दीनी तालीम दी जाती थी। ये बच्चे अब युवा हो गए हैैं। जबकि तीनों भाई 10 जुलाई के बाद से अंडरग्राउंड हो गए हैैं। एटीएस को ये भी जानकारी मिली है कि अपने घरों में ट्यूशन कोचिंग पढ़ाने के बहाने किशोरों का ब्रेन वॉश करते थे।

10 साल पहले देश के दुश्मनों से मिला था कमांडर मिनहाज

एटीएस सूत्रों ने जो मिनहाज का इतिहास तैयार किया है। उसके मुताबिक मिनहाज के परिवार का 2013 मेें बिजनौर के जाटान मुहल्ले में हुए धमाके में शामिल था। हालांकि इस धमाके में कुछ लोग मिनहाज के पिता के शामिल होने की बात बताते हैैं, लेकिन एटीएस ने इसकी पुष्टि नहीं की है। 10 साल पहले यानी 2010 में जालंधर में एक्यूआईएस ने ट्रेन में धमाका किया था। इसी दौरान गजावत-उल- हिंद की नींव रखी गई। 2010 में मिनहाज पाकिस्तान से लौैटा था। दिल्ली में उसकी मुलाकात उमर हलमंडी से कराई गई। एक्यूआईएस के सब कांटिनेंट के कमाण्डर इन चीफ उमर हलमंडी ने दिल्ली में बैठक कर मिनहाज को लखनऊ भेजा था।

2011 से सक्रिय है, गजावत-उल- हिंद

एटीएस के कटे पर्चों के मुताबिक 2011 से गजावत-उल- हिंद का मूवमेंट शुरू हुआ। विशेष समुदाय से जुड़े हुए उन लोगों की तलाश शुरू की गई, जो समाज के सताए हुए थे। उन्हें संगठन का स्लीपर सेल बनाया गया। मेरठ और बिजनौर से शुरू हुए इस संगठन को यूपी की राजधानी लखनऊ तक पहुंचा दिया गया। चूंकि कानपुर से आस पास के जिलों तक पहुंचना आसान था और कानपुर से संगठन के लिए फंडिंग भी ठीक मिल सकती थी, लिहाजा कानपुर को कमांडिंग सेंटर बनाया गया। एटीएस ने अपने पर्चों में ये भी जिक्र किया है कि शहर के रूरल एरियाज में मिनजाह जमात लगाता था। लोगों में किसी को खुद मौलाना, तो किसी को हाजी बताता था और धर्म के प्रचारक के नाम पर लोगों को इकट्ठा किया जाता था।

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