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  • Seeing The Rough Road, The Ambulance Driver Said, Bring The Patient Here; Seven To The Woman And 4 Km To The Young Man. The Relatives Took Away From The Cot, The Villagers Said This Is Often The Case

फतेहपुर में बदहाल हेल्थ सिस्टम के दो दर्दनाक किस्से:कच्चा रास्ता देखकर एंबुलेंस गांवों तक नहीं पहुंच सकी; फिर महिला को 7 किमी और युवक को 4 किमी तक चारपाई पर ले गए

फतेहपुर3 महीने पहले

फतेहपुर में सरकारी दावों की पोल खोलने वाले दो मामले सामने आए हैं। यह दोनों ही मामले अगल-बगल के गांव से हैं। यहां एक महिला की कमर में फ्रैक्चर हो गया, वह दर्द से कराहती रही, लेकिन एंबुलेंस गांव तक नहीं आ सकी, मजबूरी में परिजन चारपाई पर लिटाकर महिला को 7 किमी तक ले गए।

वहीं, दूसरे मामले में युवक की तबीयत बिगड़ जाने से उसके भाई उसे चारपाई पर लिटाकर 4 किमी दूर गांव के बाहर तक ले गए, यहां भी एंबुलेंस को बुलाया गया था, लेकिन रास्ता खराब होने की वजह से एंबुलेंस अंदर नहीं आ सकी।

असोथर क्षेत्र के सरकंडी और एलकुआं गांव की यह दो अलग-अलग तस्वीरें हैं, जो सरकारी सिस्टम के हाल को बयां कर रही हैं।
असोथर क्षेत्र के सरकंडी और एलकुआं गांव की यह दो अलग-अलग तस्वीरें हैं, जो सरकारी सिस्टम के हाल को बयां कर रही हैं।

बारिश की वजह से रास्ते में कीचड़ ही कीचड़

गांव वालों का कहना है कि कच्चा रास्ता होने की वजह बारिश में मुख्य मार्ग से संपर्क टूट गया है। इमरजेंसी में मरीजों को ले जाने का कोई साधन नहीं है। जिले में भाजपा के 6 विधायक और एक सांसद हैं। दो विधायको में एक प्रदेश सरकार के खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री तो दूसरे प्रदेश के कारागार राज्यमंत्री है और जिले की सांसद केंद्रीय राज्यमंत्री है। इसके बावजूद भी ग्रामीणों को पक्की सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं नसीब हो रही हैं।

कमर में था फ्रैक्चर, दर्द से तड़पती रही महिला
असोथर क्षेत्र के सरकंडी ग्राम पंचायत के मजरा बब्बू का डेरा में बेटन की पत्नी शिवकली कुछ दिन पहले जंगल जाते समय कीचड़ में गिर गईं थीं। शिवकली को काफी चोट पहुंची। परिजनों ने एंबुलेंस को फोन करके बुलाया। घरवाले इंतजार ही कर रहे थे कि एंबुलेंस चालक का परिजनों के पास फोन आया कि सात किमी. पहले पक्की सड़क से आगे नहीं जा सकते हैं। मरीज को यहां तक लाना पड़ेगा।

महिला की कमर में फ्रैक्चर हो गया था, जिसकी वजह से उसे तुरंत ले जाना जरूरी था, इसके बावजूद एंबुलेंस अंदर तक नहीं आई।
महिला की कमर में फ्रैक्चर हो गया था, जिसकी वजह से उसे तुरंत ले जाना जरूरी था, इसके बावजूद एंबुलेंस अंदर तक नहीं आई।

एंबुलेंस चली न जाए, चारपाई से ही लेकर भागे
बारिश की वजह से कच्चा रास्ता दलदल बन गया है। एंबुलेंस चालक का फोन आते ही तुंरत घर वाले चारपाई पर लिटाकर शिवकली को ले जाने की तैयारी कर लगे। वह 7 किलोमीटर तक दौड़ते हुए गए पक्का रास्ता आने पर एंबुलेंस वहां आई और शिवकली को जिला अस्पताल ले गई।

बेटा राममिलन ने बताया कि गांव तक पक्का रास्ता नहीं होने के कारण एंबुलेंस और अन्य वाहन नहीं पहुंच पाते। इसलिए मां को चारपाई पर लिटाकर करीब सात किलो मीटर तक ले जाना पड़ा। उन्हें एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर ने कमर में फ्रैक्चर बताया है।

रास्ते में इतना कीचड़ है कि एंबुलेंस चालक ने एंबुलेंस अंदर लाने से मना कर दिया।
रास्ते में इतना कीचड़ है कि एंबुलेंस चालक ने एंबुलेंस अंदर लाने से मना कर दिया।

दूसरा मामला एलकुआं गांव का

असोथर ब्लॉक के सरकंडी ग्राम सभा के एलकुआं गांव में कच्चा रास्ता होने से बीमार मरीज को चारपाई से ले जाना पड़ा। यहां भी एंबुलेस को फोन किया गया था, लेकिन चालक एंबुलेंस को लेकर गांव के अंदर नहीं आ सका। भाई धर्मपाल ने बताया कि कच्ची सड़क होने की वजह से चारपाई से ले जा रहे हैं, आगे एंबुलेंस खड़ी है। गांव से मेन रोड चार किलोमीटर दूर है।

जब कई बार कहने के बाद भी एंबुलेंस अंदर नहीं आई तो बीमार युवक के भाइयों ने चारपाई से ले जाना ही ठीक से समझा।
जब कई बार कहने के बाद भी एंबुलेंस अंदर नहीं आई तो बीमार युवक के भाइयों ने चारपाई से ले जाना ही ठीक से समझा।
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