सीएसए में शासन की विशेष टीम करेगी जाँच:वित्तीय एवं विभागीय अनियमितताओं की जांच करेगी विशेष जांच दल, तीन सदस्यीय टीम शासन को सौंपेगी रिपोर्ट

कानपुर2 महीने पहले
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चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय - Dainik Bhaskar
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में मंडलायुक्त राजशेखर की रिपोर्ट पर शासन ने विशेष दल से जांच कराने का निर्णय लिया है। इस टीम में कानपुर के मंडलायुक्त के अलावा कुलपति आचार्य नरेंद्र देव विश्वविद्यालय के और शासन से वित्त नियंत्रक कृषि निदेशालय शामिल रहेंगे। सीएसए में मृतक आश्रितों की नियुक्ति, वेतन विसंगतियों और बिना मानकों के प्रोमोशन का मामला सामने आया है। जिस पर एक जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त से मांगी गई थी। ऐसा माना जा रहा है कि तीन सदस्यीय विशेष दल की जांच के बाद सीएसए में बड़े घोटाले का पर्दाफ़ाश होगा।

नियमावली के खिलाफ की गई भर्ती

शासन को शिकायत की गयी थी कि 1981 में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मृत घोषित संवर्ग की नियमावली का उलंघन किया गया है। बिना किसी नियम परिनियम के अवैध रूप से 150 से अधिक व्यक्तियों को शोध सहायकों के पद पर भर्ती किया गया। बाद में उनको एसोसिएट प्रोफेसर तक का स्केल का भुगतान दिया जा रहा है। इसी तरह दो दर्जन से अधिक वैज्ञानिको एवं अन्यकर्मियों को शासन से गैर शैक्षणिक पदों में अनुमति लेकर भर्ती किया गया। बाद में स्केल और पद नाम बदलकर शिक्षक संवर्ग में पहुँचा दिया गया।

बड़े पैमाने पर पाई गई वेतन विसंगतियां, चहेतों की कराई भर्ती

CSA में आईसीएआर के वेतन देने के नाम पर परमिशन ली गयी। फिर गैर शैक्षणिक पदों पर भर्ती व्यक्तियों (केवी के वैज्ञानिकों) को मुख्यालय पर लाकर शिक्षक बनाकर बना दिया गया। इतना ही नही उनके स्थान पर गैर शैक्षणिक में अनुमति लेकर एक एक पद के लिये कई बार भर्तियां की गई। इन गैर शैक्षणिक शिक्षक को 2 वर्ष की सेवा विस्तार देने के बाद शिक्षको की तरह सत्र लाभ भी दिया गया। कई शिक्षकों का चयन एक ही पद पर किया गया। अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों को अस्थाई रूप से विश्वविद्यालय के चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्त किया। बाद में उनको कोर्ट से समान कार्य समान वेतन का स्टे दिखवाया गया। बाद में उनको परमानेंट नियुक्त कर दिया गया।

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