सपा नेता के आंगन में 1 घंटे रहे राष्ट्रपति:चौधरी हरमोहन के जन्मशताब्दी समारोह में पहुंचे महामहिम, कहा- वे बड़े समाज सुधारक थे

कानपुर10 दिन पहले

चौधरी हरमोहन सिंह की जन्म शताब्दी वर्ष में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज मेहरबान सिंह पुरवा पहुंचे। समाजवादी चिंतक-विचारक रहे चौधरी हरमोहन सिंह की पैतृक गांव में इससे पहले समाजवादी मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और अखिलेश का आना जाना आम बात रही है। यह पहला मौका था जब देश के राष्ट्रपति यहां पहुंचे।

कानपुर की राजनीति में चौधरी हरमोहन का सबसे लंबा सफर

चौ हरमोहन सिंह यादव 42 साल तक सक्रिय राजनीति में रहते हुए किसी ना किसी सदन के सदस्य रहे। वह नगर निगम में सभासद से लेकर कई बार राज्य सभा के सदस्य तक बने रहे। उनके राजनीतिक सफर में उनको शौर्य चक्र से भी सम्मानित किया गया है। उनके बेटे सुखराम सिंह यादव विधान परिषद के अध्यक्ष रहे हैं। वर्तमान में वह सपा से राज्यसभा के सदस्य हैं।

मुलायम सिंह यादव के साथ चौधरी हरमोहन सिंह यादव।
मुलायम सिंह यादव के साथ चौधरी हरमोहन सिंह यादव।

यादव महासभा के अध्यक्ष रहते मुलायम को दिया था समर्थन

वरिष्ठ पत्रकार महेश शर्मा बताते हैं कि चौधरी हरमोहन सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह मृत्यु के बाद यादव महासभा अजीत चौधरी को अपना नेता मानने जा रही थी, जिस पर चौधरी हरमोहन सिंह ने यादव महासभा के सामने एक प्रस्ताव रखा कि चौधरी चरण सिंह अभी तक नेता रहे हैं, लेकिन अब हमारे नेता मुलायम सिंह यादव होने चाहिए। जिसके बाद से मुलायम सिंह का कद अचानक बड़ा हुआ और चर्चाओं में आए। इसका एहसान मुलायम सिंह यादव जिंदगी भर मानते रहे। हमेशा चौधरी हरमोहन सिंह का सम्मान किया। मुलायम सिंह यादव के पारिवारिक मसलों में चौधरी हरमोहन सिंह यादव से सलाह मशवरा माना जाता रहा है।

पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह के साथ चौधरी हरमोहन सिंह (दाएं से पहले)।
पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह के साथ चौधरी हरमोहन सिंह (दाएं से पहले)।

और मुलायम के बाद बढ़ती गई दूरियां

जैसे-जैसे मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक सक्रियता कम होती गई वैसे वैसे ही चौधरी हरमोहन सिंह के परिवार और अखिलेश की बीच की दूरियां बढ़ती चली गई। चौधरी हरमोहन के देहांत के बाद अचानक अखिलेश और सुखराम यादव की तनातनी खुले मंच पर दिखने लगी। उसकी वजह थी कि सुखराम सिंह यादव शिवपाल सिंह खेमे से ज्यादा नजदीक थे। जिससे अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री रहते सुखराम का कई बार मंच पर सार्वजनिक तौर पर भी अपमान किया।

आज नौबत राजनीतिक तौर पर एक दूसरे के विरोधी के तौर पर बन गई है। सुखराम यादव ने अब तो खुले मंच पर कहना शुरू कर दिया है कि मुलायम सिंह को मुलायम सिंह बनाने वाली यादव महासभा थी जिसमें उनके पिता चौधरी हरमोहन सिंह का ही एक मात्र योगदान था।

यादव वोटों को साधने की कोशिश में भाजपा

उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले भाजपा यादव वोटों को साध रही है। हाल ही में भाजपा ने लखनऊ में यादव सम्मेलन कराया था। अब इसे मंडल और जिले स्तर पर भी आयोजित किया जा रहा है।