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कोरोना संक्रमण से गई दो मरीजों की आंखों की रोशनी:कानपुर मेडिकल कॉलेज में कोविड मरीजों पर शुरू हुआ अध्ययन, विशेषज्ञों का दावा-विश्व में अब तक तीन केस ही सामने आए

कानपुर3 महीने पहले
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दोनों मरीज कानपुर के बजरिया थाना क्षेत्र की रहने वाली हैं। - Dainik Bhaskar
दोनों मरीज कानपुर के बजरिया थाना क्षेत्र की रहने वाली हैं।

कानपुर में कोरोना संक्रमित मरीजों की आंख की रोशनी जाने का मामला सामने आया है। दोनों ही मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि नहीं हुई है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है इनकी रेटिनल आर्टरी ब्लॉक होने से रोशनी गई है। इन दो मामलों के सामने आने पर अब डॉक्टरों की टीम अन्य मरीजों पर भी नजर रख रही है, साथ ही मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने इन दोनों मरीजों की आंखें खराब होने की वजह पता करने के लिए उन्होंने व ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के साथ मिल कर अध्ययन शुरू किया।

सिर्फ दो मरीजों में ही मिले है: डॉ शालिनी मोहन
नेत्र रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ शालिनी मोहन ने बताया कि कोरोना कि दूसरी लहर में संक्रमण से 2 मरीजों में एक की एक आंख और दूसरे मरीज के दोनों आंखों की रोशनी पूरी चली गई। आइबाल के विट्रस फ्लूड (द्रव्य) में भी ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) मिला है।

डेढ़ माह के दौरान गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कालेज के नेत्र रोग विभाग में ऐसे दो केस मिले हैं। मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों का दावा है कि विश्व में पहला केस दिल्ली में मिला था। यहां के दो केस मिलाकर विश्व में अब तक तीन केस ही सामने आए हैं।

कोरोना से आंखों की रोशनी जाने का पहला मामला
उन्होंने बताया कि शहर में कोरोना संक्रमित मरीजों की आंख की रोशनी जाने का पहला मामला सामने आया है। इसमे दो मरीजों की कोरोना संक्रमण ने आंखों की रोशनी ले ली है। जबकि इनकी मरीजों की जांच में ब्लैक फंगस की पुष्टि तक नहीं हुई थी। तमाम जांचों के बाद नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि इनकी रेटिनल आर्टरी ब्लॉक होने से रोशनी चली गई है। अब विशेषज्ञ इस पर मंथन करने पर विचार कर रहे हैं ताकि आगे आने वाले ऐसे रोगियों की आंखों को खराब होने से बचाया जा सके।

इसके लिए मेडिकल कॉलेज के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. लुबना खान के साथ मिलकर अध्ययन शुरू कर दिया है। आंखों के आइबाल के विट्रस का फ्लूड लेकर साइटोलाजी लैब में स्लाइड तैयार कराई गई। फिर उसकी हिमो टॉक्सिन एंड इओसिन (एच एंड ई) स्टेनिंग कराई। अच्छी तरह से स्टेनिंग होने के बाद माइक्रोस्कोपिक जांच में विट्रस के फ्लूड में म्यूकर माइकोसिस की हाइफी और स्पोर्स दोनों मिले।

2 हफ्ते तक चला था इलाज
संक्रमण से थ्रोम्बोसिस यानी थक्कों ने मरीजों की आर्टरी को ब्लॉक कर दिया, जिसके चलते रोशनी चली गई। दोनों मरीज कानपुर के बजरिया थाना क्षेत्र में रहने वाली हैं। जो कोरोना पॉजिटिव आने के बाद से हैलट में इलाज करवा रही थी. करीब 2 हफ्ते इलाज चलने के बाद दोनों की आंखों की रोशनी चली गई.

ब्लैक फंगस ने भी किया परेशान
कोरोना की दूसरी लहर ने कई जानें ले ली। दूसरी लहर जब ढलान पर थी तो ब्लैक फंगस ने भी कई मरीजों को परेशान कर दिया। इस बीच कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से जो खबर सामने आई है वह चौंकाने वाली है। कोरोना संक्रमित दो मरीज ठीक होकर जब घर चले गए तो अचानक उनकी आंख की रोशनी चली गई।

इलाज के लिए हैलट अस्पताल पहुंचे यह दोनों मरीज 42 और 46 साल की महिलाएं हैं. इनमें से एक महिला की एक जबकि दूसरी महिला की दोनों आंखें खराब हो चुकी हैं।ताज्जुब की बात यह है कि इन दोनों ही महिलाओं की ब्लैक फंगस की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई थी।

ब्लैक फंगस से अब तक तीन लोगों की गई आंखों की रोशनी
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में अब तक आए मरीजों में तीन की आंखों की रोशनी ब्लैक फंगस के चलते जा चुकी है। डॉ शालिनी ने बताया कि दूसरी लहर में संक्रमण से 2 मरीजों में एक की एक आंख और दूसरे मरीज के दोनों आंखों की रोशनी पूरी चली गई।

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