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कानपुर में योगी की रैली, हारी सीटों पर फोकस:30 सितंबर को DAV ग्राउंड से भाजपा करेगी चुनावी आगाज... शहर की तीन सीटें जीतना है लक्ष्य

कानपुर2 महीने पहले
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योगी आदित्यनाथ की 30 सितंबर को कानपुर में होने वाली जनसभा से भाजपा का चुनावी आगाज हो जाएगा। जनसभा डीएवी ग्राउंड पर रखी गई है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि कैंट, आर्य नगर और सीसामऊ तीनों सीटों को ध्यान में रखकर जनसभा स्थल का चयन किया गया है।

ये इसलिए भी अहम है कि विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा ये सीटें हार गई थीं। इस बार यहां भाजपा अभी से अपनी तैयारी शुरू कर रही है। पार्टी के थिंक टैंक का मानना है यदि हिन्दू वोट एक एकजुट हो जाएं तो तीनों हारी हुई सीटें इस बार भाजपा के खाते में होगी।

भाजपा के लिए विधानसभा कैंट की राह सबसे कठिन
नए परिसीमन के बाद 2012 में कैंट विधानसभा में सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाता थे। यहां 40 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं। ऐसे में भाजपा की राह यहां सबसे ज्यादा कठिन है। 2012 में मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो गया था, तो भाजपा के रघुनंदन भदौरिया ने जीत दर्ज की थी। जबकि 2017 में सपा और कांग्रेस गठबंधन में यह सीट कांग्रेस के खाते आई थी। मुस्लिम वोटों के सहारे सोहेल अख़्तर अंसारी लगभग 9 हजार वोटों से भाजपा के रघुनंदन भदौरिया से जीत गए।

लंबे समय से सीसामऊ में जीत का ख्वाब संजोए है भाजपा
सीसामऊ विधायक इरफ़ान सोलंकी को विधायकी पैतृक विरासत में मिली हुई है। तीन बार से वे खुद विधायक हैं। जबकि पूर्व में इनके पिता हाजी मुश्ताक सोलंकी आर्य नगर विधानसभा से विधायक रहे। उनकी असमय मृत्यु के बाद खाली हुई सीट पर इरफ़ान सोलंकी काबिज है।

परिसीमन के बाद वर्ष 2017 में इस सीट पर सपा को कांग्रेस से गठबंधन का सीधा फायदा मिला था। लगभग 5 हजार के अंतर से इरफान ने यहां से भाजपा के सुरेश अवस्थी को हराया था। इस बार इस सीट पर भाजपा की नजर है।

भाजपाइयों का मानना है कि यदि हिन्दू वोट एक साथ आता है तो सपा के इस किले को भेदा जा सकता है। इसी क्रम में पिछले दिनों भाजपा सांसद ब्रज लाल 3 दिनों तक कई कार्यक्रमों में सक्रिय रहे थे।

आर्य नगर में हार का अंतर सिर्फ 5 हजार था
आर्य नगर विधानसभा शुरू से ही भाजपा का गढ़ रही है। परिसीमन से पहले यह जनरलगंज विधानसभा थी। इस सीट पर सबसे ज्यादा ब्राह्मण और बनिया वोटर हैं। तीसरे नम्बर पर इस विधानसभा में मुस्लिम मतदाता है। 2017 के चुनाव में सपा से कांग्रेसी गठबंधन हुआ था।

उसके बाद आर्य नगर विधानसभा में ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाताओं का सपा के प्रति रुझान बढ़ा और भाजपा के गढ़ में सपा ने जीत दर्ज कराई थी। यहां भाजपा के सलिल विश्नोई लगभग 5 हजार वोटों से हार गए थे। इस सीट पर ब्राह्मणों की नाराज़गी दूर करने के लिए भाजपा के ब्राह्मण नेताओं को सक्रिय किया गया है।

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