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कानपुर...पेयजल परियोजना में पार हुईं भ्रष्टाचार की हदें:टेस्टिंग में ही 30 जगहों पर फूटा था फव्वारा, 6 सालों में 15 किमी वाटर लाइन में 832 लीकेज, 30 लाख आबादी को अब तक नहीं मिला पानी

कानपुर14 दिन पहले
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गंगा बैराज लाइन में लीकेज के बाद नरौना चौराहा पर धंस गई थी आधी रोड। इसमें कई वाहन सवार घायल भी हो गए थे। - Dainik Bhaskar
गंगा बैराज लाइन में लीकेज के बाद नरौना चौराहा पर धंस गई थी आधी रोड। इसमें कई वाहन सवार घायल भी हो गए थे।

कानपुर में जेएनएनयूआरएम (जवाहर लाल नेहरू नेशनल अरबन रिन्यूवल मिशन योजना) के तहत लोगों को शुद्ध पीने का पानी मिले, इसके लिए गंगा बैराज से साउथ सिटी तक 15 किमी की वाटर लाइन बिछाई गई। लेकिन ये योजना पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। इस योजना के तहत कानपुर की 40 लाख आबादी को 40 करोड़ लीटर वाटर सप्लाई होना था। लेकिन आज तक सिर्फ 6 करोड़ लीटर पानी ही 10 लाख आबादी को मिल पा रहा है। इसके पीछे बड़ा कारण ये है कि पूरी क्षमता से वाटर सप्लाई करने पर लाइनें फट जाएंगी। लीकेज में अभी तक 10 हजार करोड़ लीटर से ज्यादा साफ पानी बर्बाद हो चुका है।

टेस्टिंग में ही 30 जगह फूटे थे फव्वारे
योजना में कंपनीबाग से फूलबाग तक और कंपनीबाग से बारादेवी चौराहा तक पाइप लाइन डाली गई थी। मई 2015 में इन लाइनों की टेस्टिंग शुरू की गई। टेस्टिंग के पहले दिन ही 30 जगहों पर फव्वारे फट पड़े थे। इसके बाद से ही योजना में जांच चल रही थी। बता दें कि योजना में भ्रष्टाचार के मामले में तत्कालीन 24 इंजीनियरों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसमें 50 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम का भ्रष्टाचार की आशंका है। ऐसे में पुलिस ने इसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा से कराने का फैसला लिया है।

2018 में चुन्नीगंज में फटा था 20 फीट ऊंचा फव्वारा।
2018 में चुन्नीगंज में फटा था 20 फीट ऊंचा फव्वारा।

832 लीकेज ने बढ़ाई मुश्किलें
जल निगम के सोर्सेज के मुताबिक बीते 6 सालों में 15 किमी की लाइन में 832 लीकेज हो चुके हैं। इनको बनाने में 12 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम खर्च हो चुकी है। दिन लीकेज की वजह से 10 लाख से ज्यादा की आबादी को जलसंकट का सामना करना पड़ता है। जल निगम के परियोजना प्रबंधक शमीम अख्तर ने बताया कि लाइन कमजोर होने की वजह से पूरी क्षमता से पंप नहीं चलाए जा सकते हैं। वहीं ये रोड धंसने का बड़ा कारण भी बन चुके हैं। इसमें कई लोग घायल भी हो चुके हैं।

लाखों नलों से एक बूंद पानी नहीं
योजना के तहत लोगों को नलों से साफ पानी दिया जाना था। शहर में 3 लाख से ज्यादा घरों में नलों के कनेक्शन दिए गए। लेकिन आज तक इन नलों से एक बूंद पानी नहीं आया। लाइनों में कई जगहों पर गैप छोड़ दिए गए। आज तक इन गैप को भरा नहीं जा सका है। जाजमऊ, कृष्णा नगर, गांधीग्राम, वाजिदपुर, श्यामनगर, किदवई नगर, बर्रा विश्वबैंक, हंसपुरम, नौबस्ता समेत दर्जनों एरिया में पानी नहीं पहुंच सका है। वहीं फूलबाग में बनी टंकी से आज तक 3 लाख लोगों को पानी नहीं मिल सका है।

इस प्रकार है पूरी योजना
योजना में 2 फेज में काम हुआ। पहले फेज में 393 करोड़ रुपए से पाइप लाइन डालने का काम हुआ। इसके तहत गंगा बैराज में 20-20 करोड़ लीटर पानी की क्षमता के 2 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बने। यहां से पूरे शहर को पानी सप्लाई के लिए 1800, 1600 और 1400 एमएम के पाइप डाले गए। पाइप डालने का ठेका विचित्रा प्रीस्ट्रेसड कंक्रीट उद्योग प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली के पास था। वहीं दोशियान कंपनी से 25 करोड़ रुपए में पाइप खरीदा गया। इतनी ही लागत इन्हें बिछाने में आई।

लाइन में लीकेज के चलते वीआईपी रोड पर भरा था पानी।
लाइन में लीकेज के चलते वीआईपी रोड पर भरा था पानी।

हादसे की वजह बन चुके हैं लीकेज पाइप लाइन
2018 में चुन्नीगंज के पास 20 फीट ऊंचा फव्वारा फट पड़ा था।
कमिश्नर आवास चौराहा के पास मैकरॉबर्ट गंज रोड 15 मीटर लंबाई तक धंसी।
नई सड़क पर पाइप लाइन फटने से सड़क धंसने के साथ ठप हो गई वाटर सप्लाई।
नानाराव पार्क में पाइप लाइन फटने से धंसी रोड में 3 लोग घायल हो गए।
बड़ा चौराहा पर अचानक धंसी रोड पर बेटे के साथ डॉक्टर सहित समा गए थे।
जीटी रोड गुमटी पर चौराहा धंसने से बाइक सवार गिर थे।
गुमटी नम्बर 5 मार्केट रोड बन गई थी खाई, 2 महीने तक ठप रहा था कारोबार।
रायपुरवा में रोड धंसने से मकानों में आ गई थी दरार।
कंपनी बाग से जीटी रोड रावतपुर रोड पर 30 से अधिक बार धंस चुकी।

हाल ही में माल रोड पर हुए लीकेज के बाद 30 फीट रोड धंस गई।
हाल ही में माल रोड पर हुए लीकेज के बाद 30 फीट रोड धंस गई।

योजना के तहत फेज-1 में ये हुआ काम
लागत-
393.93 करोड़ रुपये

ये हुए काम

  • 20 करोड़ लीटर का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट गंगा बैराज
  • 40 करोड़ लीटर पंप हाउस
  • 51 किमी मुख्य पाइपलाइन
  • 76 जोनल पंपिंग स्टेशन
  • 700 किमी पाइप आपूर्ति के लिए
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