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कानपुर...काली-मंदिर में बकरे की बलि देने पर FIR:PETA के सदस्यों ने रुकवाई सालों से चल रही प्रथा, लगाया धक्का-मुक्की और छेड़छाड़ करने का आरोप

कानपुर21 दिन पहले
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कोतवाली थाने में संस्था के पदाधिकारियों ने मंदिर प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। - Dainik Bhaskar
कोतवाली थाने में संस्था के पदाधिकारियों ने मंदिर प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।

कानपुर के प्राचीन काली मंदिर में दीपावली की रात बकरे की बलि देने का मामला सामने आया। PETA (पीपल फॉर एनिमल्स संस्था) की तहरीर पर शनिवार को पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली। संस्था की महिला पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि बलि का विरोध करने पर उनके साथ अभद्रता और छेड़खानी की गई। इसके बाद विवाद और बढ़ गया है। मामला बंगाली मोहाल शिवाला का है।

भड़के पुजारी, PETA की महिलाओं ने लगाया धक्का-मुक्की का आरोप आवास-विकास निवासी डॉ. अर्चना त्रिपाठी PETA की पदाधिकारी हैं। वह कानपुर में पशुओं की सुरक्षा के लिए काम करती हैं। उनके मुताबिक बंगाली मोहाल शिवाला काली मंदिर में दिवाली की आधी रात बकरों की बलि दी जाती है। जबकि मंदिर या सार्वजनिक जगह पर बलि गैर-कानूनी है। इसी के विरोध में दीपावली से ठीक एक दिन पहले कोतवाली थाना में सूचना दी गई थी। इसके बाद भी पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया। इस पर दीपावली की रात वह खुद मंदिर गईं और बलि का विरोध किया।

मंदिर में बलि के विरोध में हंगामा करते पीपल फॉर एनिमल्स संस्था के पदाधिकारी।
मंदिर में बलि के विरोध में हंगामा करते पीपल फॉर एनिमल्स संस्था के पदाधिकारी।

इस दौरान मंदिर के पुजारी, कर्मचारी और भक्तों ने बवाल कर दिया। संस्था की महिलाओं से अभद्रता करते हुए बाहर निकाल दिया और छेड़खानी भी की। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने मामला शांत कराया।

कोतवाली थाना प्रभारी रामकुमार गुप्ता ने बताया कि शनिवार को संस्था की डॉ. अर्चना त्रिपाठी की तहरीर पर मंदिर प्रबंधन पर पशु क्रूरता अधिनियम और छेड़खानी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
मंदिर प्रबंधन अब क्रॉस एफआईआर दर्ज कराएगा
बलि चढ़ाने पर एफआईआर दर्ज होने पर कानपुर में बवाल हो गया है। एक पक्ष कार्रवाई सही बता रहा है। उधर, दूसरा पक्ष इसे हिंदू धर्म के खिलाफ साजिश बता रहा है। मंदिर प्रबंधन भी डॉ. अर्चना त्रिपाठी और उनकी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर देगा। थाना प्रभारी ने बताया कि मंदिर में बवाल करने पर जांच के बाद संस्था पर भी एफआईआर दर्ज की जाएगी।
भले ही मेरी बलि चढ़ा दो, लेकिन बकरों की नहीं
मैं इन बकरों की बलि नहीं होने दूंगी... । भले ही मेरी बलि ही क्यों न चढ़ा दीजिए। काली मां को खुश करने के लिए बलि देना गैरकानूनी है। यह कहते हुए संस्था के युवक-युवती मंदिर में घुस गए। उन्होंने बलि रोकने के लिए हंगामा किया। पुजारियों ने कहा कि ये लोग पूजा में बाधा डाल रहे हैं। इन्हें बाहर निकाल दिया जाए। हंगामे की सूचना पर कोतवाली पुलिस पहुंची और बलि रुकवाई। तब मामला शांत हुआ।

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